17वीं लोकसभा चुनाव 2019 के लिए वाराणसी लोकसभा सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। नामांकन से पहले पीएम मोदी ने काशी के कोतवाल काल भैरव मंदिर में पूजा अर्चना की। पुराणों के मुताबिक, काशी में काल भैरव को स्वयं महादेव ने नियुक्त किया था और काशी में रहने के लिए हर किसी को बाबा भैरव की आज्ञा लेने होती है। काशी में कोई भी शुभ काम शुरू करने से पहले दंड के अधिकारी और कल्याण करने वाले बाबा कालभैरव के दर्शन से मनोकामना तो पूरी होती ही है। उनकी कृपा से हर तरह के कष्ट, दोष व नजर बाधा तक दूर हो जाती है। यह भी मान्यता है कि कालभैरव के दर्शन मात्र से यम के दंड से बचा जा सकता है।
ऐसी मान्यता है कि काल भैरव के दर्शन किए बिना भगवान शिव के दर्शन अधूरे होते हैं। पीएम मोदी जब भी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंचते हैं तो वह काल भैरव के लिए एक अनुष्ठान करते हैं। हिंदू धर्म के लोग मोझ नगरी काशी के महत्व को अच्छे से समझता है। काल भैरव के बारे में कहा जाता है कि वह ऐसे देवता है, जिन्हें सब कुछ पसंद है। मिठाई, फल, मेवे, बिस्कुट, टॉफी, भांग, धतूरा भक्तों के द्वारा सच्चे मन से लगाया गया प्रसाद, इन्हें प्रिय है। इनके दर्शन किए बगैर बाबा विश्वनाथ का दर्शन अधूरा रहता है।
बाबा काल भैरव सदियों से काशी के कोतवाल के रूप में पूजे जाते हैं। वाराणसी की जनता ये मानती है कि प्रभू शहर के रक्षक हैं। शहर में बिना काल भैरव की इजाजत के कोई भी प्रवेश नहीं कर सकता। यह मजाक नहीं सच है कि वाराणसी के कोतावली पुलिस थाने में SHO की कुर्सी पर बाबा काल भैरव बैठते हैं। सालों से यहां ये परंपरा चली आ रही है, जब भी यहां कोई थानेदान की पोस्टिंग होती है, तो वह अपनी कुर्सी पर बाबा काल भैरव को विराजते हैं।
शिवपुराण की कथा में किए गए उल्लेख के अनुसार, एक बार ब्रह्मा और भगवान विष्णु में बड़ा कौन है इस बात को लेकर विवाद पैदा हो गया। जिस दौरान ब्रह्मा जी ने भगवान शंकर की निंदा कर दी। भगवान शिव के गुस्से से ही काल भैरव जी प्रकट हुए और उन्होंने नाखूनों से ब्रह्मा जी का पांचवां सिर काट दिया था। इसके बाद ब्रह्मा जी चतुर्मुख हो गए थे। इसके बाद काल भैरव के नाखून में ब्रह्मा का खून चिपक गया। भैरव ने खूब कोशिश की, लेकिन खून नहीं छूटा। तब भगवान विष्णु ने काल भैरव को काशी भेजा, यहां पहुंचकर उन्हें ब्रह्म हत्या के दोष से मुक्ति मिली और उसके बाद वे यहीं स्थापित हो गए। रूद्र ने इन्हें काशी का कोतवाल नियुक्त किया। आज भी ये काशी के कोतवाल के रूप में पूजे जाते हैं।
बाबा विश्वनाथ काशी के राजा हैं और काल भैरव उनके कोतवाल, जो भक्तों को आशीर्वाद भी देते हैं और सजा भी। यमराज को भी यहां के इंसानों को दंड देने का अधिकार नहीं है। काल भैरव के दर्शन मात्र से लोगों की शनि की साढ़े साती, अढ़ैया और शनि दंड से बचा जा सकता है।