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Shukrayaan: शुक्र ग्रह के रहस्यों को जानेगा इसरो, भयानक गर्मी और एसिड की बारिश के बीच ऐसे काम करेगा शुक्रयान

Thu, 28 Sep 2023 12:42 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: धर्मेंद्र सिंह Updated Thu, 28 Sep 2023 12:42 PM IST
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isro shukrayaan mission - फोटो : iStock

Shukrayaan Mission: अतंरिक्ष के रहस्यों के जानने के लिए दुनिया के अलग-अलग देशों के बीच होड़ मची है। अब स्पेस रेस में भारत भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (ISRO) चांद, मंगल और सूरज के अध्ययन के लिए भेजे गए मिशन की सफलता के बाद अब शुक्र ग्रह के रहस्यों को जानने की तैयारी में जुटा है। इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने पहले ही एलान कर दिया है कि भारत शुक्र ग्रह (Venus) के वायुमंडल और उसके एसिडिक व्यवहार को जानने के लिए मिशन भेजेगा। चंद्रयान-3 की सफलता के बाद दुनिया भर में भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो की तारीफ हुई है। भारत ने चांद के दक्षिणी हिस्से पर चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग कराकर इतिहास रच दिया। इसके बाद सूरज के रहस्यों को जानने के लिए भारत ने आदित्य L1 मिशन लॉन्च किया है। 



इसरो के अध्यक्ष सोमनाथ ने एक कार्यक्रम के दौरान अपने भाषण में कहा कि शुक्र ग्रह का वायुमंडलीय दबाव धरती से 100 गुना अधिक है, लेकिन यह नहीं पता है कि इतने अधिक दबाव की वजह क्या है? शुक्र ग्रह के चारों तरफ एसिड से भरे बादलों की परत है। इसकी वजह से कोई अंतरिक्षयान शुक्र के वायुमंडल को पार करके उसकी सतह तक नहीं पहुंच सकता है। उनका कहना है कि सौर मंडल की उत्पत्ति कैसे हुई? इसकी जानकारी के लिए शुक्र का अध्ययन जरूरी है। 

 

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isro shukrayaan mission - फोटो : iStock

अगर शुक्र और मंगल को ध्यान से देखते हैं, तो पता चलता है कि आखिर वहां पर जीवन क्यों नहीं है? इस रहस्य को गहराई से समझने और जानने के लिए मिशन भेजना बहुत जरूरी है। अब शुक्रयान मिशन के लिए इसरो पूरी तरह से तैयार है। हालांकि अभी तक यह जानकारी नहीं मिली है कि इसरो कब शुक्रयान को लॉन्च करेगा। भारत का शुक्रयान पहला शुक्र मिशन होगा। 
 

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isro shukrayaan mission - फोटो : iStock

भारत का शुक्र मिशन एक एक ऑर्बिटर मिशन होगा। इसका मतलब है कि शुक्रयान शुक्र के चारों ओर चक्कार लगाते हुए अध्ययन करेगा। इस यान में कई साइंटिफिक पेलोड्स रहेंगे। लेकिन इसमें लगे हाई रेजोल्यूशन सिंथेटिक अपर्चर रडार और ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार सबसे जरूरी होंगे। 

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isro shukrayaan mission - फोटो : iStock

अंतरिक्ष एजेंसी इसरो शुक्रयान के जरिए शुक्र ग्रह की भौगोलिक सरंचना और ज्वालामुखीय गतिविधियों का अध्ययन करेगा। इसके साथ ही शुक्र ग्रह की जमीनी गैस उत्सर्जन, हवा की गति, बादलों और दूसरी चीजों का अध्ययन करेगा। शुक्र के चारों ओर एक अंडाकार कक्षा में शुक्रयान चक्कर लगाएगा। 

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isro shukrayaan mission - फोटो : ANI

कितने साल करेगा अध्ययन 

शुक्र ग्रह का शुक्रयान मिशन चार साल तक अध्ययन करेगा। इतने समय तक के लिए अंतरिक्षयान को तैयार किया जाएगा। उम्मीद है कि GSLV Mark II रॉकेट से  शुक्रयान को लॉन्च किया जाएगा। यह यान 2500 किलोग्राम वजन का होगा, जिसमें 100 किलोग्राम के पेलोड्स लगाए जाएंगे। मिली जानकारी के मुताबिक, फिलहाल इसमें 18 पेलोड्स लगाए जाएंगे। हालांकि कितने पेलोड्स लगाए जाएंगे यह फैसला बाद मे किया जाएगा। 

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