ISRO BARC Nuclear Engines Rockets: हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने चंद्रयान-3 को लॉन्च कर दिया है, जिसकी चर्चा दुनियाभर में हो रही है। वहीं अब एक और कमाल की खबर सामने आई है। पीएसएलवी की शानदार सफलता के बाद इसरो ने अब नासा और चीन को टक्कर देते हुए मंगल तक का सफर तय करने की तैयारी शुरू कर दी है। परमाणु ऊर्जा से चलने वाले रॉकेट के लिए इंजन को बनाने के लिए इसरो ने देश की अग्रणी परमाणु एजेंसी भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) के साथ हाथ मिलाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि केमिकल से चलने वाले इंजन कुछ हद तक ही काम आते हैं, लेकिन अगर एक स्पेसक्राफ्ट को एक ग्रह से दूसरे ग्रह तक की यात्रा करनी हो या अनंत अंतरिक्ष में भेजना हो तो परमाणु ऊर्जा से चलने वाले यान ही कारगर साबित होते हैं।
ISRO: नासा और चीन को टक्कर देने की तैयारी में इसरो, बना रहा परमाणु रॉकेट
कैसे काम करेगा परमाणु रॉकेट?
परमाणु इंजन परमाणु विखंडन वाले रिएक्टर जैसे नहीं होते हैं, जिससे बिजली पैदा होती है। दरअसल रेडियो थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर के अंदर प्लूटोनियम-238 या स्ट्रोंटियम-90 जैसे रेडियोएक्टिव मटेरियल का इस्तेमाल किया जाता है। जब यह नष्ट होते हैं तो इससे गर्मी पैदा होती है। इस इंजन के दो हिस्से होते हैं, पहला- द रेडियो आइसोटोप हीटर यूनिट जो गर्मी पैदा करने के लिए जिम्मेदार होगा और दूसरा रेडियो थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर जो इस गर्मी को इलेक्ट्रिसिटी में बदलेगा।