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कहानी एक सामूहिक आत्महत्या की: 900 लोगों ने एक साथ दे दी थी जान, बेहद रोचक है इसके पीछे की वजह

Sun, 16 May 2021 09:54 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Sun, 16 May 2021 09:54 PM IST
interesting story of jonestown mass suicide where 900 people committed suicide due to superstition
सामूहिक आत्महत्या - फोटो : सोशल मीडिया

आमतौर पर हमारे देश भारत में बिल्ली का रास्ता काटना अपशगुन माना जाता है। इतना ही नहीं, लोग तो छींकने तक को भी अंधविश्वास की श्रेणी में रखते हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी अंधविश्वास से जुड़ी कहानी बताएंगे, जिसके आगे ये सब बेहद ही मामूली हैं। बता दें कि अमेरिका के पास स्थित गुयाना के जोंसटाउन में दिल दहला देने वाली घटना घटी थी। यहां अंधविश्वास में पड़कर करीब 900 लोगों ने एक साथ आत्महत्या कर ली थी।

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जोंसटाउन में सामूहिक आत्महत्या - फोटो : सोशल मीडिया

गुयाना के इस घटना को अबतक की सबसे बड़ी आत्महत्या की घटनाओं में से एक माना जाता है। इस घटना के बारे में, जो भी सुनता है हैरत में पड़ जाता है। दरअसल, इस घटना के पीछे जिम जोंस नामक एक धर्मगुरु का हाथ था। वो खुद को भगवान का अवतार बताता था। जिम जोंस ने लोगों के बीच अपनी पैठ बढ़ाने के लिए जरूरतमंद लोगों की मदद के नाम पर साल 1956 में 'पीपल्स टेंपल' (लोगों का मंदिर) नाम का एक चर्च बनाया और अपनी धार्मिक बातों और अंधविश्वास के दम पर उसने हजारों लोगों को अपना अनुयायी बना लिया।

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जोंसटाउन - फोटो : सोशल मीडिया
जिम जोंस कम्युनिष्ट विचारधारा का था और उसके विचार अमेरिकी सरकार से अलग थे। इसलिए वो अपने अनुयायियों के साथ शहर से दूर गुयाना के जंगलों में चला गया और वहीं पर उसने एक छोटा सा गांव भी बसा दिया। लेकिन कुछ दिनों के बाद ही उसकी असलियत लोगों के बीच आने लगी। वो अपने अनुयायियों (चाहे वो महिला हो या पुरुष) से दिनभर काम कराता था और रात में जब वो थक-हारकर सोने के लिए जाते, तो वो उन्हें सोने भी नहीं देता था और अपना भाषण शुरू कर देता था। इस दौरान उसके सिपाही घर-घर जाकर देखते थे कि कहीं कोई सो तो नहीं रहा।
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जिम जोंस - फोटो : सोशल मीडिया

इतना ही नहीं अगर कोई सोता हुआ पाया जाता था, तो उसे कड़ी सजा दी जाती थी। जिम जोंस अपने अनुयायियों को गांव से बाहर भी नहीं जाने देता था। पुरुष और महिलाएं जब काम करती थीं, तो उनके बच्चों को एक कम्युनिटी हॉल में रखा जाता था। उसके सिपाही गांव के चारों ओर दिन-रात पहरा देते रहते थे, ताकि कोई वहां से भाग न जाए।

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जिम जोंस - फोटो : सोशल मीडिया

जिम जोंस का अंधविश्वास का जाल इतना फैल चुका था कि वो अपने अनुयायियों से कुछ भी कहता, तो लोग उसे मान लेते थे। इसी बीच अमेरिकी सरकार को वहां हो रही गतिविधियों के बारे में पता चला। सरकार ने जिम जोंस पर कार्रवाई करने की सोची। लेकिन इसका पता जिम जोंस को भी चल गया और उसने अपने सभी अनुयायियों को एक जगह इकट्ठा होने को कहा।

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