फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

अकेले ही 40 हजार योद्धाओं के बराबर था यह बादशाह, बनाना चाहता था भारत और ब्रिटेन के बीच दीवार

Mon, 23 Nov 2020 09:16 AM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Mon, 23 Nov 2020 09:16 AM IST
विज्ञापन
history of napoleon bonaparte who wanted to build a wall between India and Britain
नेपोलियन बोनापार्ट - फोटो : सोशल मीडिया

नेपोलियन बोनापार्ट फ्रांस का महान बादशाह था। कद-काठी में छोटे नेपोलियन ने अपनी बहादुरी से दुनिया के एक बड़े हिस्से पर अपना राज कायम किया था। आज की तारीख में भी बहुत कम ऐसे लोग हैं, जो नेपोलियन की ऊंचाई तक तक पहुंचे। नेपोलियन के सैनिक उससे मोहब्बत करते थे, तो दुश्मन उससे खौफ खाते थे। ब्रिटेन के महान योद्धा ड्यूक ऑफ वेलिंगटन ने कहा था कि जंग के मैदान में नेपोलियन, 40 हजार योद्धाओं के बराबर है। एक आम आदमी से बादशाह की गद्दी तक का नेपोलियन की जिंदगी का सफर बेहद दिलचस्प रहा था। और उरूज से उनके पतन तक की कहानी भी बेहद दिलचस्प है।



फ्रांस की सत्ता
नेपोलियन का जन्म कोर्सिका द्वीप के अजाचियो में 15 अगस्त 1769 को हुआ था। फ्रांस ने कोर्सिका द्वीप को नेपोलियन के पैदा होने से एक साल पहले ही जेनोआ से जीता था। नेपोलियन के मां-बाप बहुत अमीर नहीं थे। वो सामंती परिवार से नहीं थे, हालांकि वो इसका दावा बहुत करते थे। जब फ्रांस की सेना ने कोर्सिका पर हमला किया था, तो वो स्थानीय लोगों के साथ फ्रांस के विरोध में खड़े हुए थे। हालांकि बाद में उन्होंने फ्रांस की सत्ता मान ली थी। नौ साल की उम्र में नेपोलियन पढ़ाई के लिए फ्रांस चले आए। वो खुद को बाहरी महसूस करते थे। फ्रांस के रीति-रिवाज से नावाकिफ। नेपोलियन की शुरुआती पढ़ाई ऑटुन में हुई।

history of napoleon bonaparte who wanted to build a wall between India and Britain
नेपोलियन बोनापार्ट - फोटो : सोशल मीडिया

सेकेंड लेफ्टिनेंट की रैंक
इसके बाद वो पांच साल तक ब्रिएन में रहे। पढ़ाई का आखिरी साल उन्होंने पेरिस की मिलिट्री एकेडमी में गुजारे। नेपोलियन को सितंबर 1785 में ग्रेजुएट की डिग्री मिली। 58 लोगों की क्लास में वो 45वें नंबर पर रहे थे। जब नेपोलियन पेरिस में थे तभी उसके पिता की मौत हो गई। परिवार पैसे की तंगी झेल रहा था। नेपोलियन की उम्र उस वक्त सिर्फ 16 वर्ष थी। वो परिवार के सबसे बड़े लड़के भी नहीं थे। फिर उन्होंने परिवार की जिम्मेदारी उठा ली। फ्रांस की सेना में नेपोलियन को तोपखाना रेजिमेंट में सेकेंड लेफ्टिनेंट की रैंक मिली थी। वो खूब पढ़ते थे। सेना की रणनीति और लड़ाई से जुड़ी किताबें।

फ्रांस में लोकतांत्रिक क्रांति
फ्रांस में रहने के दौरान उन्हें कोर्सिका की बहुत याद आती थी। अपनी किताब लेटर्स सुर ला कोर्स में नेपोलियन ने आजाद कोर्सिका की कल्पना उकेरी थी, जो फ्रांस के कब्जे से मुक्त था। डिग्री मिलने के साल यानी 1786 में ही वो कोर्सिका लौट आए और अगले दो साल तक वापस सेना की नौकरी पर नहीं गए। 1789 में फ्रांस में लोकतांत्रिक क्रांति हो गई। जनता ने बस्तील जेल पर हमला करके कैदियों को आजाद करा लिया। फ्रांस में एक नए युग की शुरुआत हो चुकी थी। फ्रांस की नई संसद ने कोर्सिका के नेता पास्कल पाओली को वापस जाने की इजाजत दे दी। नेपोलियन भी एक बार फिर कोर्सिका लौट गए।

history of napoleon bonaparte who wanted to build a wall between India and Britain
नेपोलियन बोनापार्ट - फोटो : सोशल मीडिया

नेपोलियन का स्वागत
शुरू में तो कोर्सिका में नेपोलियन का स्वागत हुआ। लेकिन जब उनके छोटे भाई लुसिएन ने पाओली को ब्रिटिश एजेंट कहकर विरोध शुरू किया तो कोर्सिका के लोग बोनापार्ट परिवार के खिलाफ हो गए। नेपोलियन और उनका परिवार इसके बाद फ्रांस में आकर रहने लगे। फ्रांस के प्रति वफादारी दिखाने के लिए नेपोलियन को ज्यादा वक्त नहीं लगा। फ्रांस की सरकार का विरोध कर रहे सैनिकों ने टूलों शहर को अंग्रेजों के हवाले कर दिया था। दक्षिणी फ्रांस स्थित टूलों, भूमध्यसागर में बड़ा सैनिक अड्डा था। फ्रांस के लिए टूलों को दोबारा जीतना जरूरी थी। अगर फ्रांस का उस पर कब्जा नहीं होता, तो फ्रांस में हुई क्रांति पर बड़ा धब्बा लग जाता।

24 की उम्र में ब्रिगेडियर जनरल
टूलों को जीतने की जिम्मेदारी नेपोलियन को दी गई। आखिर में ब्रिटिश सेना को पीछे हटना पड़ा। इस जीत के बाद नेपोलियन को महज 24 वर्ष की उम्र में ब्रिगेडियर जनरल बना दिया गया। युद्ध में नेपोलियन की कामयाबियों के किस्से मशहूर होने लगे। सेना के कमिश्नर ने नेपोलियन की तारीफ में कसीदे पढ़ते हुए चिट्ठी लिखी। उस वक्त फ्रांस की सत्ता मैक्सीमिलियन रॉब्सपियर के कब्जे में थी। देश उनके जुल्मो-सितम से बेहाल था। हजारों लोगों को उसने गुलेटिन या सूली पर चढ़ा दिया था। 1794 की शुरुआत में आल्प्स पर्वत इलाके मे तोपखाने का इंचार्ज बनाया गया। रॉब्सपियर की ताकत कम होने से नेपोलियन के तेजी से चमकते करियर पर ब्रेक लगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
history of napoleon bonaparte who wanted to build a wall between India and Britain
नेपोलियन बोनापार्ट - फोटो : सोशल मीडिया

सरकार के खिलाफ बगावत
लेकिन ये कुछ वक्त के लिए ही था। जब शाही परिवार के भक्तों ने लोकतांत्रिक सरकार के खिलाफ बगावत की, तो सरकार को बचाने की जिम्मेदारी नेपोलियन पर आई। 5 अक्तूबर 1795 को शाही परिवार के समर्थकों ने पेरिस के नेशनल कन्वेंशन को घेर लिया। नेपोलियन ने मुट्ठी भर सैनिकों के साथ करीब बीस हजार लोगों की सेना का सामना किया। उसने अपनी बहादुरी से विरोधियों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। नेपोलियन ने नए गणतंत्र को तो बचाया ही, अपनी तरक्की का रास्ता भी खोल लिया। नेपोलियन ने मार्च 1796 में जोसेफीन नाम की महिला से शादी की।

जोसेफीन और नेपोलियन
जोसेफीन के पति को रॉब्सपियर ने सूली पर चढ़ा दिया था। वो किसी दौर में फ्रांस के सबसे ताकतवर शख्स रहे पॉल बारा की रखैल रह चुकी थीं। जोसेफीन, नेपोलियन से कई साल बड़ी थी। नेपोलियन उन्हें टूटकर प्यार करते थे। लेकिन जोसेफीन के लिए ये शादी महज मौका परस्ती थी। पॉल के छोड़ देने के बाद उन्होंने सिर्फ सहारे के लिए नेपोलियन का हाथ थामा था। शादी के दो दिन बाद नेपोलियन इटली रवाना हो गए थे। उन्हें इटली में सेना का कमांडर बनाया गया था। जब उन्होंने मुआयना किया तो सेना को बेहद कमजोर हालत में पाया। इसके बावजूद उसने कई जंगों में जीत हासिल की।

विज्ञापन
history of napoleon bonaparte who wanted to build a wall between India and Britain
नेपोलियन बोनापार्ट - फोटो : सोशल मीडिया

नेपोलियन की शोहरत
आखिर में वो उत्तरी इटली के बेताज बादशाह बन गए थे। अब उन्हें राज करना आ गया था। वो समझने लगे थे कि कैसे लोगों से काम कराया जाए। कैसे संविधान बनाया जाए। एक साल के भीतर नेपोलियन की शोहरत नई ऊंचाई छूने लगी थी। इटली में नेपोलियन के अच्छे दिन बीते। उस वक्त सिर्फ ब्रिटेन ही था, जो फ्रांस के विरोध में था। साल 1798 में नेपोलियन ने मिस्र पर हमला बोल दिया। वो भारत और ब्रिटेन के बीच का रास्ता रोक कर ब्रिटेन को घुटने टेकने पर मजबूर करना चाहते थे। साथ ही वो पूर्वी दुनिया में फ्रांस के साम्राज्य का विस्तार भी करना चाहते थे। लेकिन नेपोलियन का ये सपना साकार नही हुआ।

ताकतवर सेना की जरूरत
होरासियो नेल्सन नाम के ब्रिटिश कमांडर ने नेपोलियन के 35 हजार सैनिकों को घेर लिया। वो घर भी वापस नहीं जा पा रहे थे। ब्रिटेन और रूस ने फ्रांस के खिलाफ गठजोड़ कर लिया था। फ्रांस में सरकार के नए अगुवा इमैनुअल सीस को महसूस हुआ कि सत्ता के लिए ताकतवर सेना की जरूरत है। इमैनुअल को ऐसे सेनापति की जरूरत महसूस हुई जो पेरिस में रहकर सरकार की हिफाजत करे। मौका अच्छा देख नेपोलियन ने अपने सैनिको को मिस्र में छोड़ा और जा पहुंचे फ्रांस। जब नेपोलियन पेरिस पहुंचे तब तक फ्रेंच सेनाओं ने स्विट्जरलैंड और हॉलैंड में जीत हासिल कर के हालात अपने हक में कर लिए थे।

सत्ता के शिखर पर
लेकिन इमैनुअल और नेपोलियन ने उस वक्त की सरकार का तख्ता पलट करके सत्ता अपने हाथ में ले ली। अब नेपोलियन यूरोप के सबसे ताकतवर देश के अगुवा बन चुके थे। सत्ता के शिखर पर पहुंचने के बाद पूरे यूरोप में नेपोलियन का डंका बज रहा था। एक तरफ तो वो जंग के मैदान में कामयाबी के झंडे बुलंद कर रहा था, तो दूसरी तरफ उसने प्रशासनिक सुधार की ऐसी हवा चलाई जो आज तक मिसाल बनी हुई है। 1802 तक नेपोलियन ने यूरोप में शांति बहाल कर ली थी। ऑस्ट्रिया को इटली के मोर्चे पर शिकस्त दी जा चुकी थी। वहीं जर्मनी और ब्रिटेन ने फ्रांस की ताकत देखकर समझौता करने में ही भलाई समझी।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Bizarre News in Hindi related to Weird News - Bizarre, Strange Stories, Odd and funny stories in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Bizarre and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed