ईस्ट इंडिया कंपनी के बारे में कौन नहीं जानता है। एक समय में इसे दुनिया की सबसे ताकतवर कंपनी माना जाता था, जिसने भारत समेत दुनिया के एक बड़े हिस्से पर लंबे समय तक राज किया। आपको शायद ही पता है कि इस कंपनी के पास लाखों की फौज थी। इतना ही नहीं, उसकी अपनी खुफिया एजेंसी भी थी। इस कंपनी की स्थापना आज से करीब 419 साल पहले यानी 1600 ईस्वी में हुई थी। वैसे तो उस समय ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ प्रथम ने ईस्ट इंडिया कंपनी को एशिया में कारोबार करने की खुली छूट दी थी, लेकिन बाद में ऐसा हुआ कि यह कंपनी एक कंपनी न रहकर खुद ही सरकार बन गई। हालांकि फिर भी वो शाही परिवार के आदेश पर ही काम करती थी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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एक समय ऐसा भी आया था जब एशिया के लगभग सभी देश ईस्ट इंडिया कंपनी के कब्जे में थे और सिर्फ एशिया ही नहीं बल्कि यूरोप में भी इस कंपनी का दबदबा था। कहते हैं कि भारत में इस कंपनी के पास ढाई लाख से भी ज्यादा लोगों की फौज थी, जिसके दम पर उसने सालों तक भारत पर राज किया।
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आज भले ही लोग बिना पैसों के किसी भी कंपनी में काम करना पसंद नहीं करते हों, लेकिन ईस्ट इंडिया कंपनी में लोगों को अपने करियर की शुरुआत बिना सैलरी के ही करनी पड़ती थी और वो भी पांच साल। हालांकि 1778 ईस्वी में इस समय को घटाकर तीन साल कर दिया गया था। जब लोग नौकरी करते हुए इतने समय को निकाल लेते थे तब कंपनी उन्हें दस पाउंड का मेहनताना देना शुरू करती थी। उस समय के लिए ये पैसे बहुत थे।
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बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईस्ट इंडिया कंपनी में काम करने वालों को कई तरह की सुविधाएं भी मिलती थीं। जैसे कि उन्हें नाश्ता या खाना दिया जाता था। इसके अलावा कंपनी के इंग्लैंड के बाहर के दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारियों को रहने की सुविधा भी मिलती थी। हालांकि बाद में खर्च में कटौती की गई और नाश्ते या खाने की सुविधा 1834 ईस्वी में बंद कर दी गई।
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बकिंघम पैलेस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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1857 ईस्वी में भारत में प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, जिसे भारतीय विद्रोह के नाम से भी जाना जाता है, के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी का बुरा दौर शुरू हो गया। जैसे-तैसे करके कंपनी कुछ दिन और चली, लेकिन 1874 में ब्रिटिश सरकार ने कंपनी को पूरी तरह से बंद कर दिया।