आपको जानकर हैरानी होगी कि हमारे द्वारा सैलून में काटकर फेंके गए बालों का कारोबार इतना है कि हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान ने इससे हाल ही में करोड़ों रुपए कमा लिए हैं। पूरी दुनिया में मानव वालों सालाना कारोबार कई अरब रुपए का है। वैश्विक बाजार में भारत और पाकिस्तान इस मार्केट के प्रमुख निर्यातक हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच मानव बाल निर्यात के कारोबार पर कब्जा करने की होड़ मची हुई है। दुनिया के कई विकसित देश इसके खरीदार हैं।
जी हां, आपको सुनने में ये भले ही अटपटा लग रहा हो, लेकिन मानव बाल भारत-पाकिस्तान की अर्थ व्यवस्था का मजबूत हिस्सा बनते जा रहे हैं। अमूमन हमरे घरों में टूटे बाल या सैलून में काटे गए बाल कूड़े में फेंक दिए जाते हैं। वहीं कुछ लोगों के लिए ये करोड़ों का कारोबार और कमाई का प्रमुख जरिया है।
पाकिस्तान ने पिछले पांच वर्षों में चीन को एक लाख पांच हजार 461 किलोग्राम मानव बालों का निर्यात किया है। पाकिस्तानी संसद के निचले सदन में पहली बार मानव बालों के निर्यात की वाणिज्यिक कीमत के बारे में रिपोर्ट पेश की गई है। पाकिस्तान के वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से पेश इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पांच साल में उन्होंने मानव बाल के निर्यात से 1.6 मिलियन यूएस डॉलर (भारतीय मुद्रा में 11,43,60,000 रुपये) का व्यापार किया है।
पाकिस्तान से चीन के अलावा उच्च गुणवत्ता वाले मानव बालों का अमेरिका (US), यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) और जापान समेत दुनिया के कई देशों में भी निर्यात किया जाता है, क्योंकि वहां भी मनोरंजन जगत में इसकी काफी मांग है। चीनी मेकअप इंडस्ट्री में मानव बालों की बढ़ती मांग को देखते हुए इसका आयात किया जा रहा है।
पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक, एक प्रमुख ब्यूटिशियन ए एम चौहान बताते हैं कि निर्यातकों ने हेयर सलोन में अपने डस्टबिन लगा रखे हैं। ग्राहकों के काटे गए बालों को बिन में इकट्ठा किया जाता है। निर्यातक 5,000 या 6,000 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बाल खरीदते हैं। इस तरह पाकिस्तान में हेयर कटिंग सैलून चलाने वाले बाल बेचकर अतिरिक्त कमाई करते हैं। इस वक्त पाकिस्तान में हेयर एक्सटेंशन और विग की काफी मांग है।