चीनी वैज्ञानिकों ने जीन-एडिटेड मैकाक से सर्कैडियन रिदम विकारों के साथ कृत्रिम तरीके से बंदरों का क्लोन बनाया है, जो नींद की समस्याओं, अवसाद और अल्जाइमर रोग से जुड़े शोध में मदद करेंगे। यह पहली बार है कि जीन-संपादित बंदर से बायोमेडिकल रिसर्च के लिए कई क्लोन बनाए गए हैं। चीनी वैज्ञानिकों ने बीते गुरुवार को बंदर की क्लोनिंग की घोषणा चीनी पत्रिका 'नेशनल साइंस रिव्यू' में प्रकाशित दो लेखों के साथ की।
सरकारी शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने कहा कि पहली बार जैवचिकित्सकीय अनुसंधान के लिए बंदर के जीन बदलकर कई क्लोन बनाए गए हैं। क्लोनिंग के माध्यम से जन्मे बच्चों को शंघाई स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस ऑफ चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेस में जन्म दिया गया।
चीन के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि इससे जीन में बदलाव को लेकर नए सिरे से नैतिक चिंताएं पैदा हो सकती हैं। कुछ दिन पूर्व ही जीन में परिवर्तन कर दुनिया के पहले मानव शिशु को जन्म देने का दावा चीन के वैज्ञानिकों ने किया था और इस 'अनधिकृत प्रयोग' को लेकर वैज्ञानिक जगत में उथल-पुथल मच गयी थी।
चीनी वैज्ञानिकों ने क्लोन बनाने के लिए उसी तकनीक का इस्तेमाल किया जो करीब 2 दशक पहले डॉली नाम की भेड़ को तैयार करने में किया गया था। झोंग झोंग और हुआ हुआ नाम के 2 अफ्रीकन लंगूर कृत्रिम तरीके से तैयार किए गए हैं। इन्हें तैयार करने के लिए स्तनपायी जीव बंदरों, एपिस और मानवीय चीजों का सम्मिश्रण किया गया। इनका जन्म 6 से 8 हफ्ते पहले हुआ, इनका क्लोन गैर भ्रूण कोशिका से तैयार किया गया।
इस पूरी प्रक्रिया को सोमैटिक सेल न्यूक्लियर ट्रांसफर (SCNT) के जरिए किया गया जिससे सेल को गर्भ में भेजा गया था। दोनों नवजात बंदरों को बोतल के जरिए दूध पिलाया जा रहा है और उनका विकास सामान्य तरीके से हो रहा है। रिसर्च से जुड़े लोगों का कहना है कि अगले कुछ महीनों में ऐसे ही और अफ्रीकी लंगूरों के क्लोन तैयार किए जा सकते हैं।