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अजगर और कोबरा जैसे जहरीले सांपों से इस शख्स को है काफी लगाव, गोद में लेकर करता है सफाई

Mon, 07 Dec 2020 09:45 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Mon, 07 Dec 2020 09:45 PM IST
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Buddhist monk Viletha Sikata creates refuge for snakes at monastery
विलेथा सिकटा - फोटो : सोशल मीडिया

सांपों को धरती के सबसे खतरनाक जीवों में से एक माना जाता है। आमतौर पर यह पालने वाले जीव तो होते नहीं हैं, लेकिन फिर भी कुछ लोगों को सांपों से काफी लगाव होता है। आज हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे अजगर और कोबरा जैसे सांपों से प्यार है। बता दें कि म्यांमार के यंगून में बौद्ध भिक्षु विलेथा सिकटा ने ठुका टेटो मठ में अजगर, वाइपर और कोबरा जैसे खतरनाक सांपों के लिए एक आश्रय स्थल बनाया है।

Buddhist monk Viletha Sikata creates refuge for snakes at monastery
विलेथा सिकटा - फोटो : सोशल मीडिया

दरअसल, 69 वर्षीय बौद्ध भिक्षु विलेथा सिकटा ने इन जहरीले सांपों को बचाने के लिए ऐसा किया है, ताकि इन्हें कोई मारकर काला बाजार में बेच ना दे। विलेथा ने सांपों को शरण देने की शुरूआत उन्होंने पांच साल पहले की थी। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी एजेंसियां विलेथा के द्वारा पकड़े गए सांपों को उनसे लेकर जंगल में छोड़ देती है। अपने गमछा से सांपों की सफाई करने वाले विलेथा ने कहा कि वह प्राकृतिक पारिस्थितिक चक्र की रक्षा कर रहे हैं।

Buddhist monk Viletha Sikata creates refuge for snakes at monastery
विलेथा सिकटा - फोटो : सोशल मीडिया

विलेथा ने कहा कि "एक बार जब लोग सांपों को पकड़ लेते हैं, तो वे संभवतः एक खरीदार को खोजने की कोशिश करते हैं।" विलेथा सांपों को शरण में तब तक रखते हैं, जब तक उन्हें लगता है कि वो जंगल वापस जाने के लिए तैयार नहीं हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट को मानें, तो इन भिक्षुओं को सांपों को खिलाने के लिए लगभग 300 अमरीकी डॉलर के लिए दान पर निर्भर रहना पड़ता है।

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Buddhist monk Viletha Sikata creates refuge for snakes at monastery
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

हाल ही में विलेथा सिकटा ने हलावा नेशनल पार्क में कई सांपों को छोड़ा था। इन सांपों को छोड़कर विलेथा ने कहा कि उन्हें धीरे-धीरे स्वतंत्रता में देखकर खुश हैं, लेकिन ये सांप अगर फिर से पकड़े गए, तो काफी दुख होगा। उन्होंने कहा कि वे बुरे लोगों द्वारा पकड़े जाने पर काला बाजार में बेच दिए जाएंगे।

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Buddhist monk Viletha Sikata creates refuge for snakes at monastery
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

हालांकि, एक निर्धारित समय के बाद इन सांपों को छोड़ना जरूरी हो जाता है। क्योंकि इंसानों के पास रहने से सांपों में तनाव पैदा होता है। संरक्षणवादियों की मानें, तो म्यांमार अवैध वन्यजीव व्यापार में एक वैश्विक केंद्र बन गया है, जिसमें अक्सर चीन और थाईलैंड जैसे पड़ोसी देशों में तस्करी होती है।

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