किसी को गधा कहना एक तरह से मूर्ख कहा जाना समझा जाता है। इसके अलावा कई लोग आम बोलचाल में लगातार काम करने वालों को 'गधे की तरह काम करने वाला' भी कहते हैं। भारत में गधों का इस्तेमाल बोझा ढोने में होता रहा है लेकिन मोटर वाहन के आने के बाद बीते कुछ सालों में गधों की संख्या में काफी कमी आई है। लेकिन अब गधों के बारे में ऐसी बातें सामने आ रही हैं, जिससे शायद इनकी तादाद बढ़ाने में लोगों की दिलचस्पी जागे।
क्या भारत में 7,000 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है गधी का दूध? जानिए हकीकत
गधी के दूध के लाभ
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन ने अपने शोध में पाया है कि बहुत से जानवरों के दूध को कम करके आंका जाता है, इनमें गधी और घोड़ी का दूध भी शामिल है। संगठन का कहना है कि गधी और घोड़ी के दूध में प्रोटीन इस तरह का है कि जिन लोगों को गाय के दूध से एलर्जी है, यह उनके लिए बहुत बेहतर है। साथ ही संगठन लिखता है कि यह दूध एक इंसानी दूध की तरह है, जिसमें प्रोटीन और वसा की मात्रा कम होती है लेकिन लैक्टॉस अधिक होता है। इसमें आगे कहा गया है कि यह जल्द ही फट जाता है, लेकिन इसका पनीर नहीं बनाया जा सकता है।
संयुक्त राष्ट्र का खाद्य एवं कृषि संगठन यह भी कहता है कि इसका उपयोग कॉस्मेटिक्स और फार्मास्युटिकल उद्योग में भी होता है। क्योंकि कोशिकाओं को ठीक करने और प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के भी इसमें गुण हैं। ऐसा कहा जाता है कि प्राचीन मिस्र की महिला शासक क्लियोपैट्रा अपनी खूबसूरती बरक़रार रखने के लिए गधी के दूध में नहाया करती थीं।
NRCG के पूर्व निदेशक डॉक्टर एमएस बसु कहते हैं कि गधी के दूध के दो प्रमुख लाभ पाए जाते हैं, पहला यह महिला के दूध जैसा होता है, वहीं दूसरा इसमें एंटी-एजिंग, एंटि-ऑक्सिडेंट और रीजेनेरेटिंग कंपाउंड्स होते हैं, जो त्वचा को पोषण देने के अलावा उसे मुलायम बनाने में काम आते हैं। डॉक्टर बसु कहते हैं, "भारत में गधी के दूध पर अभी बहुत अधिक रिसर्च की जानी बाकी है। क्योंकि लोगों को इसके फायदों को लेकर जानकारी नहीं है। जबकि यूरोप में इसके बारे में लोग काफी जानते हैं, कामकाजी महिलाएं अपने नवजात बच्चों के लिए गधी के पाश्चुरिकृत दूध का इस्तेमाल कर रही हैं और अब तो अमेरिका ने भी इसकी अनुमति दे दी है। इसमें लैक्टॉज, विटामिन ए, बी-1, बी-2, बी-6, विटामिन डी और विटामिन ई भी होता है। गधी के दूध से बने साबुन, क्रीम, मॉश्चराइजर की बाजार में मांग है और आज भारत में कई महिलाएं गधी के दूध के बने इन उत्पादों का इस्तेमाल कर रही हैं।"
डॉक्टर बसु कहते हैं कि भारत में अभी गधी के दूध से कम उत्पाद बन रहे हैं लेकिन इसमें जब बढ़ोतरी होगी तो गधी के दूध की कमी होगी क्योंकि भारत में गधों की संख्या लगातार कम हो रही है।
कितना दूध देती है गधी?
एनआरसीई गधी के दूध की डेयरी के लिए गुजरात से हलारी नस्ल के गधे ला रहा है। आणंद कृषि विश्वविद्यालय के पशु आनुवंशिकी और प्रजनन विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर डी.एन. रांक कहते हैं कि भारत में गधों की नस्लों के बारे में पहली बार इस तरह का काम हुआ है।
वो कहते हैं, "भारत में गधों की सिर्फ स्पीति नस्ल को मान्यता थी अब गुजरात के जामनगर और द्वारका में पाए जाने वाली हराली नस्ल के गधों को भी मान्यता दी गई है। यह गधे आम गधों से थोड़े ऊंचे और घोड़ों से थोड़े छोटे और सफेद होते हैं। अब तक भारत में सड़कों पर घूमने वाले गधों की नस्ल की पहचान नहीं थी लेकिन अब दो नस्लों को पहचान मिल गई है जो अच्छी बात है।"
प्रोफेसर रांक कहते हैं कि गधों का ध्यान न रखना और उनसे बेतरतीब काम कराने से दूध नहीं मिल सकता है। वो कहते हैं कि एक गधी दिन में अधिकतम आधा लीटर दूध देती है और हर गधी का दूध उसके रख-रखाव के तरीके से घट बढ़ सकता है।
7,000 रुपये लीटर है गधी का दूध
गधी के दूध का कारोबार भारत में उस तरह से नहीं है जिस तरह से यह यूरोप और अमेरिका में शुरू हो चुका है। प्रोफेसर रांक कहते हैं कि भारत में अभी शुरुआत है, गधी का दूध महंगा जरूर है लेकिन यह अभी 7,000 रुपये प्रति लीटर तक नहीं बिक रहा है। वो कहते हैं कि विभिन्न मीडिया संस्थानों ने भी 7,000 रुपये प्रति लीटर का आंकड़ा विदेशों के हवाले से दिया है।
वहीं, डॉक्टर बसु कहते हैं कि यह अभी शुरुआत है लेकिन फार्म में रखकर गधे पालने का चलन तमिलनाडु, केरल या गुजरात में कुछ ही लोगों ने किया है और इसकी खरीद-फरोख्त अधिकतर ऑनलाइन है। सलीम अब्दुल लतीफ दादन मुंबई से वेरी रेयर ऑनलाइन डॉट कॉम नामक एक वेबसाइट चलाते हैं जो ऊंट, भेड़, गाय और गधी के दूध के साथ-साथ उससे बना घी और मिल्क पाउडर भी ऑनलाइन बेचती है। वो कहते हैं, "गधे के दूध का दाम कोई तय नहीं है और यह कोई फार्म के जरिए नहीं आता है। हम अपने लोगों से गांव से इस दूध को मंगवाते हैं। इस दूध को अधिकतर दवाई और कॉस्मेटिक्स के इस्तेमाल के लिए ही लोग लेते हैं।"
सलीम कहते हैं कि 7,000 रुपये प्रति लीटर इसका दाम तब हो सकता है जब इसे आप किसी के पास कहीं दूर भेज रहे हों क्योंकि यह जल्दी खराब हो जाता है, अगर आप इसे मुंबई में ही हाथों हाथ लें तो 5,000 रुपये प्रति लीटर में मिल जाएगा। वो कहते हैं कि सिर्फ साबुन और कॉस्मेटिक्स के उत्पाद से अलग यह पेट के बैक्टीरियल इन्फेक्शन में भी बहुत काम आता है।