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वो जीव जो है 'अजर-अमर-अविनाशी'
बीबीसी हिंदी
Updated Tue, 14 Aug 2018 03:20 PM IST
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gelly fish
भूमध्यसागर में रहने वाली जेलीफिश के पास एक अद्भुत और अनोखी क्षमता है- वो अपने जीवन को दोबारा शुरू कर सकती है। एक तरह से अमर कही जाने वाली जेलीफिश या 'टुर्रीटोप्सिस डोहर्नी', के पास एक ऐसी क्षमता है कि ये अपने ही सेल्स की पहचान को बदल कर फिर अपने जीवन की युवा अवस्था में पहुंच सकती है। दूसरे शब्दों में कहें तो ये किसी भी उम्र में अपना आकार-प्रकार बदलकर दोबारा वृद्धावस्था से बालावस्था में आ सकती है।
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Jelly fish
काल्पनिक विज्ञान पर आधारित 'डॉक्टर हू' नाम की टेलीविजन सीरीज में कार्यक्रम का हीरो अपने आप को पूरी तरह एक नए रूप में बदल लेता है। ठीक 'टुर्रीटोप्सिस डोहर्नी' की तरह। टीवी सीरियल में डॉक्टर ऐसा तब करता था जब वो बुरी तरह घायल होता था या फिर मरने के करीब होता था। जेलीफिश के लिए खुद को कभी भी युवा बनाने की ये क्षमता जिंदा रहने का एक अद्भुत सिस्टम है जो वृद्ध हो जाने, बीमार पड़ने या फिर किसी खतरे से सामना हो जाने पर काम आती है। एक बार जब ये प्रक्रिया शुरु हो जाती है तो जेलीफिश की 'बेल' और 'टेंटिकल्स' बदलकर फिर से 'पॉलिप' बन जाते हैं- यानी एक ऐसे पौधे की शक्ल का आकार जो पानी के नीचे खुद को सतह से जोड़कर रखता है।
Jelly fish
ऐसा ये एक प्रक्रिया के अंर्तगत करती है जो 'सेलुलर ट्रांसडिफरेंसिएशन' कहलाती है, जिसमें सेल सीधे तौर पर एक प्रकार से दूसरे प्रकार में बदलकर एक नए शरीर में बदल जाते हैं और ये प्रक्रिया बार-बार की जा सकती है। शोधकर्ताओं की एक टीम ने हाल ही में जेलीफिश के डीएनए के एक छोटे से हिस्से का सीक्वेंस किया। इटली के सेलेंटो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर स्टेफानो पिराइनो इस काम में शामिल थे और अब वो 'फीनिक्स' नाम की एक बहुत बड़ी परियोजना का संयोजन कर रहे हैं जिससे 'टुर्रीटोप्सिस डोहर्नी' के सेल्स का आपसी संवाद आसानी से समझा जा सकेगा।
उनका कहना है कि 'लाइफ रिवर्सल' का पूरा सच तभी जाना-समझा जा सकता है जब इस जीव का जिनोम पूरी तरह सुलझाया जा सके। प्रोफेसर पिराइनो ने लैब में जेलीफिश की मौत को भी देखा है जो कि दुखद है, यानी कि ये पूरी तरह अमर नहीं है।लेकिन फिर भी इसका खुद को किसी भी प्रकार में ढाल लेना अद्भुत है। साथ ही दो और जेलीफिश का भी पता चला है जिनमें ये सब है और इसमें 'ऑरेलिया एसपी 1' भी शामिल है जो पूर्वी चीनी समुद्र की रहने वाली है।
उनका कहना है कि 'लाइफ रिवर्सल' का पूरा सच तभी जाना-समझा जा सकता है जब इस जीव का जिनोम पूरी तरह सुलझाया जा सके। प्रोफेसर पिराइनो ने लैब में जेलीफिश की मौत को भी देखा है जो कि दुखद है, यानी कि ये पूरी तरह अमर नहीं है।लेकिन फिर भी इसका खुद को किसी भी प्रकार में ढाल लेना अद्भुत है। साथ ही दो और जेलीफिश का भी पता चला है जिनमें ये सब है और इसमें 'ऑरेलिया एसपी 1' भी शामिल है जो पूर्वी चीनी समुद्र की रहने वाली है।
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जीवन का एक और मौका
अगर इंसान को लेकर इस प्रक्रिया को देखें तो क्या हम पुर्नजन्म ले सकते हैं? कुछ हद तक हम ये कर पा रहे हैं जैसे जलने, चोट के निशान और धूप में जली त्वचा का खुद को ठीक कर लेना इसी का संकेत हैं। हम अपने हाथों- पैरों की उंगलियों के ऊपरी सिरे दोबारा पैदा कर सकते हैं।
पहले ये एक लोकप्रिय विचार होता था कि हम हर सात या दस सालों में एक नया इंसान बन जाते हैं, क्योंकि इस काल में हमारे शरीर के सारे सेल्स मर जाते हैं और नए सेल्स उनकी जगह ले लेते हैं। हालांकि ये एक मिथक ही था लेकिन ये बात सही है कि हमारे सेल्स लगातार मर भी रहे हैं और बदले भी जा रहे हैं।
अगर इंसान को लेकर इस प्रक्रिया को देखें तो क्या हम पुर्नजन्म ले सकते हैं? कुछ हद तक हम ये कर पा रहे हैं जैसे जलने, चोट के निशान और धूप में जली त्वचा का खुद को ठीक कर लेना इसी का संकेत हैं। हम अपने हाथों- पैरों की उंगलियों के ऊपरी सिरे दोबारा पैदा कर सकते हैं।
पहले ये एक लोकप्रिय विचार होता था कि हम हर सात या दस सालों में एक नया इंसान बन जाते हैं, क्योंकि इस काल में हमारे शरीर के सारे सेल्स मर जाते हैं और नए सेल्स उनकी जगह ले लेते हैं। हालांकि ये एक मिथक ही था लेकिन ये बात सही है कि हमारे सेल्स लगातार मर भी रहे हैं और बदले भी जा रहे हैं।
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लेकिन जैसे- जैसे वक्त बदला, डॉक्टर पूरी तरह बदलाव की प्रक्रिया में तरक्की करते गए। हालांकि इस तरह का पुनर्जन्म बाकी जानवरों में भी होता है लेकिन ये आमतौर पर शरीर के किसी एक हिस्से तक ही सीमित होता है। उदहारण के लिए सालामैंडर।लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज की डॉक्टर मैक्सीमिना युन का कहना है- "सालामैंडर पुनर्जन्म के चैंपियन हैं। कुछ तो अपने दिल, जबड़े, पूरे हाथ-पैर और पूंछ जिसमें रीढ़ की हड्डी शामिल है- को भी पुर्नजीवित कर लेते हैं।"
वो खास प्रक्रिया जिससे सालामैंडर ऐसा कर पाते हैं वो अभी मालूम नहीं है, लेकिन डॉक्टर युन प्रयोग कर रही हैं 'ब्लास्टिमस' के साथ-यानी सालामैंडर के कटे हिस्से में दोबारा शुरू होने पर उस जगह बनने वाला सेल्स का एक गुच्छा। उन्होंने और उनके सहयोगियों ने हाल ही में कुछ प्रमाण ढूंढे हैं कि सालामैंडर कुछ खास तरह के प्रोटीन P53 को रोकते हैं, जिसकी वजह से सेल्स को नया रूप मिल पाता है। उदहारण के लिए इससे सेल्स को पैर के पुर्नजन्म के लिए जरूरी मांसपेशियां, कोशिकाएं और हडिड्यों के टिशू बनाने में सहायता मिलती है।
वो खास प्रक्रिया जिससे सालामैंडर ऐसा कर पाते हैं वो अभी मालूम नहीं है, लेकिन डॉक्टर युन प्रयोग कर रही हैं 'ब्लास्टिमस' के साथ-यानी सालामैंडर के कटे हिस्से में दोबारा शुरू होने पर उस जगह बनने वाला सेल्स का एक गुच्छा। उन्होंने और उनके सहयोगियों ने हाल ही में कुछ प्रमाण ढूंढे हैं कि सालामैंडर कुछ खास तरह के प्रोटीन P53 को रोकते हैं, जिसकी वजह से सेल्स को नया रूप मिल पाता है। उदहारण के लिए इससे सेल्स को पैर के पुर्नजन्म के लिए जरूरी मांसपेशियां, कोशिकाएं और हडिड्यों के टिशू बनाने में सहायता मिलती है।