Tansen: संगीत में इतनी शक्ति होती है कि इसे सुनने कई बीमारियां भी ठीक हो जाती हैं। अच्छा संगीत सुनने से मन को बेहद शांति मिलती है। इंसान तनाव मुक्त होता है और तरोताजा महसूस करता है। वैसे तो इस दुनिया में संगीत के क्षेत्र में एक से बढ़कर एक फनकार हैं। लेकिन जो संगीत का जादू तानसेन की गायकी में थी, उस तरह का संगीत अभी तक कोई नहीं गा पाया। तानसेन के बारे में कहा जाता है कि जब वो अपना राग छेड़ते थे तो मौसम अपने आप बदल जाता था।
तानसेना की गायकी से आसमान में बादल आ जाते और बरसने लगते थे। जब वो अपना राग दीपक गाते थे तो दीप अपने आप जल जाते थे। यही वजह है कि तानसेन को संगीत सम्राट भी कहा जाता है। तानसेन ने शास्त्रीय संगीत को आगे बढ़ाने में अमूल्य योगदान दिया। तानसेन गायक होने के साथ ही उच्च कोटि के वादक भी थे। जिन्होंने कई रागों का निर्माण किया। मगर, एक हैरान करने वाली बात बहुत कम लोग जानते हैं कि तानसेन बचपन में बोल नहीं पाते थे।
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ऐसा अनोखा पेड़, जिसकी पत्तियां खाकर तानसेन बन गए संगीत सम्राट (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Adobe Stock
इसके लिए उन्हें इमली के पत्ते खिलाए गए। ऐसा कहा जाता है कि तानसेन की गायकी का राज एक इमली का पेड़ था। इसके बाद तानसेन संगीत की दुनिया का सम्राट बन गए। तानसेन संगीत का इतना रियाज करते थे कि उनकी इस साधना को देखकर उस समय के बादशाह अकबर ने उन्हें अपने नौरत्नों में शामिल किया था। उस दौर में बादशाह अकबर के नौरत्नों में शामिल होना एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी।
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ऐसा अनोखा पेड़, जिसकी पत्तियां खाकर तानसेन बन गए संगीत सम्राट (सांकेतिक तस्वीर)
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तानसेन का निधन आगरा में हुआ था। तानसेन की अंतिम अच्छा थी कि जब उनका निधन हो तो उन्हें उनके आध्यात्मिक गुरु मोहम्मद गौस के मकबरे के पास ही दफनाया जाए। इसके बाद ऐसा ही हुआ और उन्हें वहीं दफनाया गया। जिस जगह पर तानसेन को दफनाया गया था उसी जगह एक इमली का पेड़ उग आया। धीरे-धीरे यह मान्यता हो गई कि जो भी इस पेड़ की पत्तियां खाएगा उसका गला सुरीला हो जाएगा।
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ऐसा अनोखा पेड़, जिसकी पत्तियां खाकर तानसेन बन गए संगीत सम्राट (सांकेतिक तस्वीर)
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यही वजह है कि संगीत की साधना करने वाला हर इंसान यहां आता है और पेड़ की पत्तियां अपने साथ ले जाता है। यह पेड़ 600 साल पुराना है और दुनिया भर के संगीतकारों के लिए यह पेड़ किसी धरोहर से कम नहीं है। ऐसी मान्यता है कि इन पेड़ की पत्तियों में तानसेन की रूह बसती है जो भी इस पेड़ की पत्तियां खाएगा उसकी आवाज सुरीली हो जाएगी।
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ऐसा अनोखा पेड़, जिसकी पत्तियां खाकर तानसेन बन गए संगीत सम्राट
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भारतीय शास्त्रीय संगीत के जाने-माने कलाकार पंडित जसराज जब यहां आए तो इस पेड़ की पत्तियों को खाने से खुद को रोक नहीं पाए। जब वो जाने लगे तो कुछ पत्तियां अपने साथ भी ले गए। संगीत की समझ रखने वाले और इतिहासकार मानते हैं कि जो पेड़ की पत्तियां खाता है उसे तानसेन का आशीर्वाद मिलता है।