भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों में इस समय अलग-अलग मुद्दों को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। इनमें रूस से लेकर फ्रांस और म्यांमार तक शामिल हैं। हर देशों में प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को जायज मानते हुए सरकार से उसे पूरा करने की मांग कर रहे हैं। रूस का मामला थोड़ा अलग है, जहां प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति पुतिन के विरोधी नेता एलेक्सी नवलनी को छोड़ने की मांग को लेकर सड़कों पर है। वहीं भारत में नए कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन हो रहा है। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से दुनियाभर के कुछ चुनिंदा प्रदर्शनों के बारे में बताएंगे, जिनके अनोखे अंदाज ने सबका ध्यान खींचा।
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थाइलैंड (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
साल 2010 में थाइलैंड की तत्कालीन सरकार के विरोध में सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों ने प्रदर्शन के लिए एक अनोखा तरीका निकाला। प्रधानमंत्री अभिसित वज्जाजिवा के विरोध में विरोधियों ने बैंकॉक की सड़कों पर अपने खून से भरी प्लास्टिक बोतलें रख दीं। इसके लिए करीब 50,000 प्रदर्शनकारियों ने रक्तदान किया और 300 लीटर खून जमा किया। ये खून बोतलों में भरकर पीएम दफ्तर और सड़कों पर छोड़ दिया गया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
पशु-पक्षियों की रक्षा को लेकर हमेशा बात करने वाली संस्था पेटा वैसे तो हमेशा ही कैंपेन के अपने अजीबोगरीब तरीकों के लिए चर्चा में रही है। कई बार तो इसके प्रदर्शनकारी पेड़ों पर चढ़कर महीनों रहते हैं, ताकि जागरुकता ला सके। लेकिन पेटा का एक कैंपेन लंबे समय तक चर्चा में रहा था। इसमें उन्होंने लगभग निर्वस्त्र होकर पिंजरों में बंद होकर जानवरों को मारने का विरोध किया।
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यामी कवई
- फोटो : सोशल मीडिया
परंपरागत सोच वाले देश जापान में इन दिनों एक अजबोगरीब फैशन ट्रेंड कर रहा है। यहां की सड़कों पर युवतियां खून के धब्बों से सने कपड़े, आंखों के नीचे काले घेरे और गले में खूनभरी सीरींज में दिखने लगी हैं। इतना ही नहीं इनके कपड़ों पर लिखा होता है कि मैं मरना चाहती हूं। जापान में ट्रेंड कर रहे इस फैशन को यामी कवई (Yami kawaii) कहा जा रहा है। ये फैशन डिप्रेशन और खुदकुशी से जुड़ा हुआ है। यामी कवई टर्म का इजाद साल 2015 में ही हुआ था, लेकिन जापान में इसकी लोकप्रियता अब बढ़ी है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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साल 2011 में चिली में पढ़ाई का खर्च बढ़ने को लेकर एक विरोध प्रदर्शन हुआ था। इसमें कॉलेज के छात्र सड़कों, चौराहों पर जमा होकर एक-दूसरे को किस कर रहे थे। इसे किसिंग प्रोटेस्ट कहा गया। साथ में स्लोगन भी दिख रहे थे, जिनपर लिखा हुआ था- प्यार मुफ्त है, लेकिन पढ़ाई नहीं। इस तरह के विरोध के बाद नए नियम आए, जिसके तहत शिक्षा पर लोन में ब्याज की दर काफी कम कर दी गई।