किर्गिजस्तान में संसदीय चुनावों के खत्म होने के एक हफ्ते बाद ही सांसदों ने एक राष्ट्रवादी नेता को प्रधानमंत्री चुना, जिसे जेल से छुड़ाकर सीधे सरकार का प्रमुख बना दिया गया। पिछले शनिवार को किर्गिजस्तान में एक असाधारण संसद सत्र के दौरान सदयर जापारोव को सांसदों के बहुमत का समर्थन मिला। हालांकि, ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि जेल की सजा काटने के कुछ दिनों के अंदर ही कोई राजनेता सरकार का प्रमुख बन गया हो। इससे पहले भी ऐसे कई कारनामे होते रहे हैं। तो आइए जानते हैं ऐसे राजनेताओं के बारे में...
सत्ता के सिंहासन तक पहुंचने वाले दिग्गज नेता, जो कभी सालों तक जेल में रहे कैद
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नेल्सन मंडेला
अश्वेत लोगों के अधिकारों के लिए दक्षिण अफ्रीका में सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व करने पर दोषी ठहराए जाने से एक साल पहले नेल्सन मंडेला ने कहा था, पृथ्वी पर कोई भी शक्ति आजादी पाने का दृढ़ निश्चय किए हुए उत्पीड़ित लोगों को नहीं रोक सकती है। सजा के दौरान नेल्सन मंडेला को कुख्यात रॉबेन द्वीप पर भेजा दिया गया था। लेकिन जेल में गुजरे 27 सालों ने उन्हें रंगभेद के विरोध का सबसे चर्चित चेहरा बना दिया। इसका नतीजा ये हुआ कि 1990 में रिहा हुए मंडेला को चार साल बाद दक्षिण अफ्रीका का राष्ट्रपति चुना गया।
जवाहर लाल नेहरू
साल 1921 में प्रिंस ऑफ वेल्स के दौरे के बहिष्कार का आह्वान करने के वजह से जवाहर लाल नेहरू को ब्रिटिश हुकूमत ने जेल में डाल दिया था। अलग-अलग मामलों में जवाहर लाल नेहरू ने जेल में लगभग एक दशक बिताया। साल 1947 में आजादी मिलने के बाद नेहरू को देश का पहला प्रधानमंत्री चुना गया।
मिशेल बाचेलेत
चिली की पहली महिला राष्ट्रपति मिशेल बाचेलेत के पिता की सैन्य तख्तापलट के बाद हिरासत में ले लिया गया था। जेल में मिली यातना के कारण साल 1973 में उनकी मृत्यू हो गई। बाद में बाचेलेत को भी गिरफ्तार कर राजनीतिक गतिविधि के लिए यातनाएं दी गईं। हालांकि, जेल से रिहा होने के बाद साल 2006 में उन्हें पहली बार राष्ट्रपति चुना गया।
आंग सान सू की
नोबेल पुरस्कार से सम्मानित और लोकतंत्र के लिए सैनिक सरकार का शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने वाली 'आंग सान सू ची' आज देश-विदेश में जान-पहचाना नाम हैं। बार-बार नजरबंद और रिहाई जैसी कठोर प्रक्रिया से गुजरने के बाद भी शांति का परचम लहराने वाली आंग सान सू ची की पार्टी ने साल 2015 के चुनावों में जोरदार जीत हासिल की, जिससे वह सत्ता में आईं।