नेपाल के जंगलों से भटके हुए जंगली हाथियों का झुंड रविवार रात को किशनगंज जिले के दिघलबैंक प्रखंड के गांवों में कहर बरपाते हुए घुस आया। लगभग नौ हाथियों का यह झुंड आठगाछिया पंचायत के गोरुमारा और टंगटंगी गांव पहुंचा और खेतों में घुसकर करीब 10 बीघा मक्का की फसल को पूरी तरह रौंद डाला। सोमवार सुबह तक ये हाथी इलाके में ही डटे रहे, जिससे किसानों में भारी दहशत का माहौल है।
Bihar News: नेपाल से आए नौ जंगली हाथियों ने मचाया कहर, 10 बीघा मक्का की फसल बर्बाद; किसानों में मचा हड़कंप
Kishanganj News: स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले ढाई महीने से हाथियों की इस तरह की घटनाएं लगातार हो रही हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। पढ़ें पूरी खबर...।
किसानों की मेहनत पर फिरा पानी
जानकारी के मुताबिक, हाथियों ने खेतों में लगी मक्के की फसल को खा भी लिया और अपने पैरों तले कुचलकर बर्बाद भी कर दिया। मिस्टर आलम, नईम आलम, महबूब आलम, चंदन कुमार गणेश, महेंद्र लाल गणेश और जलाबो समेत कई किसानों की फसल को भारी नुकसान हुआ है। प्रभावित किसान बुरी तरह परेशान हैं और सरकार से मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
ढाई महीने से जंगली हाथियों का आतंक
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले ढाई महीने से हाथियों की इस तरह की घटनाएं लगातार हो रही हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इस बार भी सोमवार सुबह 10 बजे तक प्रशासन की ओर से कोई सक्रियता नहीं दिखाई दी, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है।
हाथियों का डेरा टंगटंगी गांव में
वर्तमान में हाथियों का झुंड किसान महेंद्र लाल गणेश के खेत में बैठा हुआ है, जिससे गांव के लोग काफी भयभीत हैं। कई ग्रामीण घरों से निकलने से भी डर रहे हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन को सूचना दी है, लेकिन हाथियों को हटाने की प्रक्रिया में देरी हो रही है।
इस घटना को लेकर रेंज अधिकारी अंशुमन कुमार ने बताया कि वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच चुकी है। अभी हाथियों को छेड़ना उचित नहीं होगा। शाम होने के बाद स्थिति के अनुसार हाथियों को हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और किसी प्रकार की अनहोनी से बचने के लिए पूरी सतर्कता बरती जा रही है।
ग्रामीणों ने की मुआवजे और सुरक्षा की मांग
फसल की बर्बादी के साथ-साथ लोगों में अब अपनी जान-माल की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से हाथियों की लगातार आवाजाही पर रोक लगाने के लिए स्थायी समाधान की मांग की है। साथ ही पीड़ित किसानों को उचित मुआवजा दिए जाने की गुहार भी लगाई है।