बिहार की लोक संस्कृति की धरोहर और पद्म भूषण से सम्मानित लोक गायिका दिवंगत शारदा सिन्हा की स्मृति में भारतीय डाक विभाग ने एक विशेष आवरण लिफाफा जारी किया है। इस लिफाफा का पटना में आयोजित तीन दिवसीय ‘बिहार फिलेटलिक एग्जिबिशन’ के दौरान अनावरण किया गया। इस अनूठे डाक लिफाफे ने बिहारवासियों में गर्व और खुशी की लहर दौड़ा दी है।
लिफाफे का अनूठा डिजाइन और संकल्पना
इस विशेष आवरण लिफाफे के अग्रभाग पर शारदा सिन्हा के दो चित्र प्रकाशित किए गए हैं। साथ ही, उनकी पहचान हारमोनियम का चित्र भी अंकित किया गया है। लिफाफे पर एक विशेष कैंसिलेशन मुहर भी बनाई गई है, जिसमें दिवंगत शारदा सिन्हा का नाम अंकित है। लिफाफे के पृष्ठ भाग पर उनका संक्षिप्त जीवन परिचय हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में अंकित है।
विशेष आवरण में पद्म भूषण सम्मान प्राप्त करते हुए उनका चित्र और गायन मुद्रा भी प्रदर्शित की गई है। यह लिफाफा मात्र ₹25 की कीमत पर उपलब्ध है, जिससे इसे आम जनता भी आसानी से संग्रह कर सकेगी।
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स्वर कोकिला शारदा की स्मृति में जारी लिफाफा
- फोटो : अमर उजाला
नॉर्थ बिहार फिलेटलिस्ट सोसाइटी की प्रतिक्रिया
नॉर्थ बिहार फिलेटलिस्ट सोसाइटी के सदस्य आचार्य चंद्र किशोर पाराशर ने बताया कि यह भारतीय डाक विभाग के इतिहास में पहली बार हुआ है कि किसी विभूति के दिवंगत होने के एक महीने के भीतर ही विशेष आवरण लिफाफा जारी किया गया हो। इससे पहले ऐसा सम्मान किसी अन्य हस्ती को नहीं मिला था।
शारदा सिन्हा का मुजफ्फरपुर से गहरा जुड़ाव
शारदा सिन्हा का जन्म मुजफ्फरपुर जिले के मरवन गांव में हुआ था, जो उनका ननिहाल था। एक अक्तूबर 1952 को जन्मी शारदा सिन्हा ने बिहार की लोक गायिकी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उन्होंने छठ गीतों से लेकर कई अन्य पारंपरिक गीतों को नई ऊंचाई दी, जिससे वे ‘स्वर कोकिला’ के रूप में मशहूर हुईं।
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स्वर कोकिला शारदा की स्मृति में जारी लिफाफा
- फोटो : अमर उजाला
जनता में खुशी और गर्व
बिहारवासियों ने डाक विभाग के इस कदम की सराहना की है। लोगों का कहना है कि यह लिफाफा शारदा सिन्हा की स्मृति को संजोने का एक अनूठा माध्यम बनेगा। इस पहल ने बिहार के गौरव को एक नया आयाम दिया है। पूर्णिया के निवासी और संगीत प्रेमी रमेश सिंह ने कहा कि शारदा जी हमारे दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगी। यह लिफाफा उनके प्रति हमारी श्रद्धांजलि है।