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महिलाओं का दर्द देख शुभी ने किया डिप्टी कलेक्टर बनने का फैसला
Sun, 06 Mar 2016 08:25 PM IST
प्रगति मिश्रा/अमर उजाला, नोएडा
प्रगति मिश्रा/अमर उजाला, नोएडा
Updated Sun, 06 Mar 2016 08:25 PM IST
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- फोटो : प्रगति मिश्रा
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‘तेरे माथे का टीका मर्द की किस्मत का तारा है, अगर तू साजे बेदारी उठा लेती तो अच्छा था, तेरे माथे पे ये आंचल खूब है, लेकिन तू इस आंचल को परचम बना लेती तो अच्छा था’। मजाज लखनवी की इन पंक्तियों को शुभी काकन ने जीवन में उतार लिया। बीडीएस की पढ़ाई के बाद शुभी ने देहात में हेल्थ कैंप लगाए तो महिलाओं की परेशानियां जानी। उनके दर्द को देखा और महसूस किया। तभी से महिलाओं के लिए कुछ करने की ठान ली। इसके बाद मेहनत कर पीसीएस अधिकारी बनी। अलीगढ़ जिले की शुभी काकन यहां डिप्टी कलेक्टर हैं। महिला दिवस से पूर्व उन्होंने अमर उजाला संवाददाता से मन की बात कही। कहा ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियों में भी प्रतिभा की कमी नहीं है।
इस तरह शुरू हुआ सफर
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शुभी काकन ने बताया कि उनके पिता इंजीनियर और मां ग्रहणी है। शहरी और संपन्न लोगों के लिए कोई मुकाम हासिल करना मुश्किल नहीं है, लेकिन ग्रामीण परिवेश में रह रही महिलाओं और लड़कियों को आज भी मदद की दरकार है। बीडीएस की पढ़ाई के बाद गांवों में हेल्थ कैंप का आयोजन किया। महिलाओं के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुना। उस दौरान अहसास हुआ कि सिर्फ इतना काफी नहीं है। महिलाओं के लिए कुछ और करना चाहिए। उनकी दो मौसियां जज हैं। उन्हें देखकर अहसास हुआ कि महिलाएं यदि अफसर बनकर जिम्मेदारी उठाएं तो यह महिला सशक्तीकरण के साथ ही समाज के उत्थान में महत्वपूर्ण काम होगा।
कुछ बेहतर करने को ज्वाइन सिविल सेवा
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शुभी ने बताया कि उनके परिवार में कभी लड़के -लड़की में भेदभाव नहीं किया गया, लेकिन उन्होंने आसपास कई जगह ऐसे उदाहरण देखे जहां महिलाओं के साथ भेदभाव किया जाता है। इसके चलते दिल में महिलाओं के लिए कुछ करने की प्रेरणा पैदा हुई। मौसियों को देखा कि वह अधिकारों का उचित प्रयोग कर कमजोर महिलाओं की मदद किया करती हैं। मन में विचार आया कि मैं भी यदि सिविल सर्विस में चयनित होती हूं तो मैं भी कुछ बेहतर कर सकती हूं।
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बचपन से ही रही होनहार
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शुभी की बचपन से ही पढ़ाई में रुचि थी। उन्होंने हमेशा स्कूल-कॉलेज में बेहतर प्रदर्शन किया। मेडिकल की प्रवेश परीक्षा दी, जिसमें उनका चयन बीडीएस के लिए हुआ। शुभी ने 2012 में बीडीएस की पढ़ाई पूरी की और फिर सिविल सर्विस की तैयारी में लग गईं। 2014 बैच में शुभी का चयन पीसीएस में हुआ।
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बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ पर जोर
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डिप्टी कलेक्टर बनने के बाद भी गांवों में हेल्थ कैंप लगवाती हैं। गांवों में जाकर महिलाओं की परेशानी सुनकर उन्हें दूर करने का अपने स्तर पर प्रयास करती हैं। शुभी लड़कियों के मनोबल को बढ़ाने के लिए प्रेरणा देती हैं। साथ ही गांवों में जाकर लिंग भेदभाव, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ आदि विषयों पर विभिन्न कार्यक्रम के आयोजन में योगदान देती हैं।
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