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सैन्य वाहनों की नंबर प्लेट दूसरे वाहनों से क्यों होती है अलग, आप भी चुटकियों में पढ़ सकेंगे

Sat, 03 Oct 2020 01:25 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 03 Oct 2020 01:25 PM IST
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What is difference between Indian Army vehicle registration plates and civilians vehicle registration plates, how to identify them
Army Jeep - फोटो : Team-BHP

पिछले छह महीनों से लद्दाख के पूर्वी हिस्से में भारत-चीन की सेना आमने-सामने हैं। सर्दियों ने दस्तक दे दी है और वहां अग्रिम सैन्य ठिकानों पर तैनात जवानों के लिए रसद पहुंचाने का काम पुरजोर से जारी है। सीमा से सटे इलाकों में सैन्य वाहनों की आवाजाही चरम पर है। वहां के इलाकों में रहने वाले लोग भी वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर देख कर अंदाजा लगा लेते हैं कि यह नागरिक है सैन्य वाहन। लेकिन सैन्य वाहनों के नंबरों को पढ़ना आसान नहीं होता है। आइए जानते हैं इन्हें कैसे पढ़ा जा सकता है...

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CAR HAMIRPUR - फोटो : अमर उजाला

सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स का पालन

पूर देशभर में आम नागरिक मोटर वाहनों का रजिस्ट्रेशन रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस की तरफ से किया जाता है। वहीं ये नंबर वाहन के आगे और पीछे की तरफ लगाए जाते हैं। इन वाहनों पर सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स का पालन करना पड़ता है, जो केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की तरफ से जारी किए जाते हैं।

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Army vehicles - फोटो : ANI

सैन्य वाहन रक्षा मंत्रालय के अधीन

वहीं सैन्य वाहनों पर सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स लागू नहीं होते हैं। वहीं सैन्य वाहन रक्षा मंत्रालय के अधीन होते हैं और ये रक्षा मंत्रालय के तहत ही पंजीकृत होते हैं। इनका रजिस्ट्रेशन नंबर भी बेहद खास होता है, जिसे पढ़ना आसान नहीं होता है। साथ ही, नागरिक वाहनों में केवल पंजीकरण संख्या लिखी होती है, जबकि सैन्य वाहनों में पूरी डिटेल्स होती है।

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Army Vehicles - फोटो : Team-BHP

ऊपर की तरफ तीर का निशान

सैन्य वाहनों पर एक ऊपर की तरफ तीर का निशान होता है, जिसे ‘ब्रॉड एरो’ कहा जाता है। इसे अंग्रेजों के जमाने से ही इस्तेमाल किया जाता रहा है, जिसका मतलब होता है कि यह सरकारी संपत्ति है। ब्रिटिश कॉमनवैल्थ देशों में आज भी इसका प्रचलन है। इस तीर के निशान का फायदा यह होता है कि नंबर गलत नहीं पढ़ा जाता। अगर नंबर प्लेट उलट भी जाए तो तीन के आगे से ही उसे पढ़ा जाएगा।

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Indian Army Vehicle moving towards Ladakh - फोटो : PTI

तीर के आगे दो अंक

तीर के आगे दो अंक लिखे होते हैं, जो पंजीकरण वर्ष को दर्शाते हैं। उसके आगे ‘बेस कोड’ होता है। बेस कोड के बाद सीरियल नंबर या व्हीकल का नंबर लिखा होता है। सीरियल नंबर के बाद व्हीकल की क्लास लिखी होती है। जहां आम नागरिक वाहनों में आगे और पीछे की तरफ सफेद, पीले या हरे रंग की प्लेट लगी होती है। वहीं सैन्य वाहनों की नंबर प्लेट का बैकग्राउंड हरा या काला होता है, जिन्हें अधिकारी इस्तेमाल करते हैं। वहीं इन वाहनों में होने वाले मॉडिफिकेशंस पर मोटर व्हीकल एक्ट लागू नहीं होता है। 

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