केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बार-बार इस बात का जिक्र किया है कि भारत सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाओं वाले देशों की सूची में कैसे उच्च स्थान पर है। उन्होंने देश की सड़कों पर बेहतर बुनियादी ढांचे और सुरक्षित वाहनों की जरूरत पर भी बार-बार रोशनी डाली है। मंत्री ने हाल ही में यह दोहराया कि केंद्र सरकार यात्री वाहनों में एयरबैग की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है।
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Kia Carens Global NCAP Safety Rating
- फोटो : Global NCAP
गडकरी ने पहले इस बात का जिक्र किया था कि कैसे कारों में 6 एयरबैग को वाहन के किसी भी मॉडल के सभी वैरिएंट्स में अनिवार्य बनाया जा सकता है। यह इस बात पर भी ध्यान दिए बिना होगा कि वह वाहन मास-मार्केट सेगमेंट में है या प्रीमियम या लग्जरी सेगमेंट में है। इस हफ्ते की शुरुआत में, गडकरी ने लोकसभा को बताया कि अगर कोई दुर्भाग्यपूर्ण घटना हो जाती है तो उस स्थिति में ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाने का इरादा है।
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BMW iX Euro NCAP Crash Test
- फोटो : BMW
गडकरी ने बताया, "हमारा विभाग वाहन में पीछे बैठने वाले यात्रियों के लिए भी एयरबैग रखने की कोशिश कर रहा है, ताकि उनकी जान बचाई जा सके। भारत में औसतन लगभग पांच लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं और 1.5 लाख मौतें इसके कारण होती हैं।" अभी तक, कारों में दो एयरबैग अनिवार्य हैं। पीछे बैठने वाले लोगों के लिए कोई एयरबैग नहीं होता है। एक एयरबैग की कीमत 800 रुपये है, हमारी कोशिश अधिकतम सुरक्षा सुनिश्चित करना है।"
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Maruti s-presso Global ncap
- फोटो : Global ncap
गडकरी ने पहले भी इस बात का जिक्र कर चुके हैं कि भारत सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाओं वाले देशों की सूची में तीसरे स्थान पर है। वह वर्ल्ड रोड स्टैटिस्टिक्स (डब्ल्यूआरएस) 2018 के आंकड़ों का हवाला दे रहे थे। सख्त नियम और कानून रैश ड्राइविंग के खिलाफ रोकथाम में महत्वपूर्ण साबित हो सकते है। लेकिन ड्राइवर और पैदल चलने वालों दोनों के लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता को भी बढ़ाने की जरूरत है।
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Maruti Eeco By Global NCAP
- फोटो : Global NCAP
लेकिन जहां तक देश में निर्मित वाहनों का संबंध है, एक आम सहमति है कि इन्हें भी सुरक्षित बनाने की जरूरत है। भारत अगले साल तक वाहनों के लिए अपनी सुरक्षा रेटिंग टेस्ट - भारत एनसीएपी लाने की योजना बना रहा है। और मानक के रूप में ज्यादा एयरबैग वाली सुरक्षित कारों के निर्माण से कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। आम सहमति यह है कि सुरक्षा को वह प्राथमिकता दी जानी चाहिए जिसकी वह हकदार है।