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Semiconductor: 1.26 लाख करोड़ रुपये की सेमीकंडक्टर परियोजनाएं हुईं मंजूर, भारत में पहली बार बनेगी फैब यूनिट
Fri, 01 Mar 2024 07:01 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Fri, 01 Mar 2024 07:01 PM IST
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Semiconductor
- फोटो : For Reference Only
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1.26 लाख करोड़ रुपये की तीन सेमीकंडक्टर संबंधी परियोजनाओं को मंजूरी दी है। जिसमें देश का पहला कमर्शियल सेमिकंडक्टर मैन्युफेक्चरिंग प्लांट (वाणिज्यिक सेमीकंडक्टर निर्माण संयंत्र) भी शामिल है।
Ashwini Vaishnaw
- फोटो : For Reference Only
सेमीकंडक्टर फैब - एक विनिर्माण संयंत्र जो सेमीकंडक्टर बनाता है - को टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा ताइवान के पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉर्प (PSMC) के साथ साझेदारी में गुजरात के धोलेरा में लगभग 91,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से स्थापित किया जाएगा। PSMC के ताइवान में 6 सेमीकंडक्टर फाउंड्री हैं।
वैष्णव ने कहा कि यह प्लांट "राष्ट्र के लिए एक बड़ा मोड़" है। यह कहते हुए कि सेमीकंडक्टर एक मूलभूत उद्योग है और चिप्स में पंखे से लेकर AC, फ्रिज, मेट्रो, कार, ट्रेन और हवाई जहाज तक हर चीज में इस्तेमाल होता है।
वैष्णव ने कहा कि यह प्लांट "राष्ट्र के लिए एक बड़ा मोड़" है। यह कहते हुए कि सेमीकंडक्टर एक मूलभूत उद्योग है और चिप्स में पंखे से लेकर AC, फ्रिज, मेट्रो, कार, ट्रेन और हवाई जहाज तक हर चीज में इस्तेमाल होता है।
Semiconductor
- फोटो : iStock
फैब की क्षमता 50,000 वेफर प्रति माह (WSPM) शुरू करने की होगी। एक वेफर में लगभग 5,000 चिप होते हैं।
वैष्णव ने संवाददाताओं से कहा, "व्यावहारिक रूप से, इस प्लांट द्वारा हर साल लगभग 300 करोड़ चिप्स का निर्माण किया जाएगा। ये चिप्स आठ क्षेत्रों को पूरा करेंगे - हाई-पावर कंप्यूटिंग, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा, दूरसंचार, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स... ये चिप्स एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके निर्मित किए जाएंगे।"
वैष्णव ने संवाददाताओं से कहा, "व्यावहारिक रूप से, इस प्लांट द्वारा हर साल लगभग 300 करोड़ चिप्स का निर्माण किया जाएगा। ये चिप्स आठ क्षेत्रों को पूरा करेंगे - हाई-पावर कंप्यूटिंग, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा, दूरसंचार, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स... ये चिप्स एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके निर्मित किए जाएंगे।"
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- फोटो : Pixabay
हालांकि एक सेमीकंडक्टर फैब के निर्माण में आम तौर पर लगभग तीन से चार साल लगते हैं। मंत्री ने कहा कि वे इस समय सीमा को कम करने की दिशा में काम करेंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि देश का पहला सेमीकंडक्टर निर्माण का प्रयास 1962 में किया गया था। उसके बाद 1980, 1984, 2005, 2007 और फिर 2011 में किया गया। उन्होंने कहा, "...जब इरादे और नीतियां स्पष्ट और सटीक हों, तब कामयाबी हासिल होती है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में है कि आज भारत के पहले वाणिज्यिक सेमीकंडक्टर फैब को मंजूरी दी गई थी।"
उन्होंने यह भी बताया कि देश का पहला सेमीकंडक्टर निर्माण का प्रयास 1962 में किया गया था। उसके बाद 1980, 1984, 2005, 2007 और फिर 2011 में किया गया। उन्होंने कहा, "...जब इरादे और नीतियां स्पष्ट और सटीक हों, तब कामयाबी हासिल होती है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में है कि आज भारत के पहले वाणिज्यिक सेमीकंडक्टर फैब को मंजूरी दी गई थी।"