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EV: ईवी उद्योग में ₹3.4 लाख करोड़ का होगा भारी निवेश, तेजी से अपनाने की जरूरत, कोलियर्स की रिपोर्ट में दावा
Sat, 14 Dec 2024 10:24 AM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Sat, 14 Dec 2024 10:24 AM IST
सार
कोलियर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईवी क्षेत्र की अलग-अलग कंपनियों ने 2030 तक चरणबद्ध तरीके से 40 बिलियन अमरीकी डॉलर (3,40,000 करोड़ रुपये) निवेश करने की योजना की घोषणा की है।
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Electric Car
- फोटो : Freepik
कोलियर्स इंडिया ने कहा है कि घरेलू और विदेशी कंपनियों ने अगले छह वर्षों में भारत के इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) और सहायक उद्योगों में 3.4 लाख करोड़ रुपये के भारी निवेश की घोषणा की है। साथ ही कंपनी ने 2030 तक 30 प्रतिशत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में धीमी प्रगति पर चिंता जताई।
Electric Car
- फोटो : Freepik
रियल एस्टेट कंसल्टेंट कोलियर्स इंडिया ने बुधवार को 'भारत में इलेक्ट्रिक वाहन: इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में नया जोश' नाम की एक रिपोर्ट जारी की। जिसमें बताया गया कि भारत में कुल इलेक्ट्रिक वाहन प्रवेश दर 8 प्रतिशत है। इसने 2024 में लगभग 2 मिलियन (20 लाख) इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री का अनुमान लगाया है।
कंसल्टेंट ने बताया, "हालांकि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की गति सराहनीय रही है। लेकिन यह अपेक्षा के अनुरूप उतनी तेज नहीं रही है।"
कंसल्टेंट ने बताया, "हालांकि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की गति सराहनीय रही है। लेकिन यह अपेक्षा के अनुरूप उतनी तेज नहीं रही है।"
Electric Car
- फोटो : istock
रिपोर्ट में बताया गया है कि ईवी परिदृश्य में अलग-अलग कंपनियों ने 2030 तक चरणबद्ध तरीके से 40 बिलियन अमरीकी डालर (3,40,000 करोड़ रुपये) निवेश करने की योजना की घोषणा की है। इसमें से 27 बिलियन अमरीकी डॉलर लिथियम आयन बैटरी विनिर्माण के लिए और 9 बिलियन अमरीकी डॉलर ओई (मूल उपकरण) और ईवी विनिर्माण के लिए निवेश करने की योजना है।
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों और सहायक उद्योगों में अब तक किए गए निवेश के बारे में पूछे जाने पर कंसल्टेंट ने कहा कि इसके आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों और सहायक उद्योगों में अब तक किए गए निवेश के बारे में पूछे जाने पर कंसल्टेंट ने कहा कि इसके आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
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Electric Car
- फोटो : Freepik
रिपोर्ट में कहा गया है, "अगले 5-6 वर्षों में नियोजित निवेशों के क्रियान्वयन से रियल एस्टेट के अनेक अवसर खुल सकते हैं, विशेष रूप से औद्योगिक और भंडारण क्षेत्र में। निवेश से भूमि अधिग्रहण में तेजी आ सकती है। और लिथियम-आयन बैटरी सहित इलेक्ट्रिक वाहन और ओई विनिर्माण इकाइयों की स्थापना में तेजी आ सकती है।"
कोलियर्स इंडिया ने कहा कि भारत ने 2030 तक सड़कों पर 80 मिलियन ईवी के साथ 30 प्रतिशत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
इसने कहा, "हालांकि, बिक्री की मात्रा में लगातार बढ़ोतरी और केंद्रित सरकारी प्रयासों के बावजूद, अब तक प्रगति धीमी रही है।"
कंसल्टेंट ने कहा कि मौजूदा प्रवेश दर 8 प्रतिशत है और कुल ईवी स्टॉक 5 मिलियन से ज्यादा है। जिसके कारण अगले कुछ वर्षों में सभी श्रेणियों में ईवी अपनाने में तेजी से बढ़ोतरी की जरूरत है।
कोलियर्स इंडिया ने कहा कि भारत ने 2030 तक सड़कों पर 80 मिलियन ईवी के साथ 30 प्रतिशत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
इसने कहा, "हालांकि, बिक्री की मात्रा में लगातार बढ़ोतरी और केंद्रित सरकारी प्रयासों के बावजूद, अब तक प्रगति धीमी रही है।"
कंसल्टेंट ने कहा कि मौजूदा प्रवेश दर 8 प्रतिशत है और कुल ईवी स्टॉक 5 मिलियन से ज्यादा है। जिसके कारण अगले कुछ वर्षों में सभी श्रेणियों में ईवी अपनाने में तेजी से बढ़ोतरी की जरूरत है।
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Electric Rickshaw
- फोटो : Lohia
दिलचस्प बात यह है कि रिपोर्ट में बताया गया है कि ईवी को अपनाने की दर सबसे ज्यादा 3-पहिया वाहनों (मुख्य रूप से अंतिम मील के सार्वजनिक आवागमन के लिए उपयोग किए जाने वाले ई-रिक्शा) में है। जहां परिचालन व्यय में कमी ईवी वेरिएंट की खरीद पर एकमुश्त खर्च को कम कर देती है।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि 2 और 4 पहिया वाहनों सहित निजी वाहनों में ईवी अपनाने में तेजी लाने के लिए, घरेलू विनिर्माण पर और अधिक जोर देने से ईवी खरीद की निश्चित लागत को खत्म करने में मदद मिलेगी।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि 2 और 4 पहिया वाहनों सहित निजी वाहनों में ईवी अपनाने में तेजी लाने के लिए, घरेलू विनिर्माण पर और अधिक जोर देने से ईवी खरीद की निश्चित लागत को खत्म करने में मदद मिलेगी।