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Hybrid Cars: हाइब्रिड कारों की पकड़ बढ़ी, ईवी से तेजी से आगे निकल रही हैं 'बीच का रास्ता' अपनाने वाली गाड़ियां
Thu, 31 Jul 2025 06:13 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 31 Jul 2025 06:13 PM IST
सार
भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में हाइब्रिड कारें धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं। और बिक्री के मामले में ये अब इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को पीछे छोड़ने लगी हैं। हाइब्रिड कार में ऐसी क्या खूबियां हैं जिसकी वजह से यह वक्त की मांग बनती जा रही हैं।
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हाइब्रिड कार
- फोटो : अमर उजाला
भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में हाइब्रिड कारें धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं। और बिक्री के मामले में ये अब इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को पीछे छोड़ने लगी हैं। वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में हाइब्रिड कारों की बिक्री 147 प्रतिशत बढ़कर 25,980 यूनिट्स तक पहुंच गई। जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 10,506 यूनिट्स था। इसके मुकाबले ईवी की बिक्री 75 प्रतिशत बढ़कर 40,468 यूनिट्स हुई है, जो कि पिछले साल 23,109 यूनिट्स थी।
Hybrid Vs Electric Cars
- फोटो : अमर उजाला
क्या होते हैं हाइब्रिड कार
हाइब्रिड कार का मतलब एक ऐसी गाड़ी होती है जिसमें दो तरह के पावर सिस्टम होते हैं - एक पेट्रोल या डीजल इंजन और दूसरा इलेक्ट्रिक मोटर। यानी यह गाड़ी एक साथ फ्यूल (जैसे पेट्रोल/डीजल) और बैटरी दोनों से चल सकती है।
दो सिस्टम, एक गाड़ी
हाइब्रिड कार में इंजन और मोटर दोनों लगे होते हैं। जब कार धीरे चल रही होती है या स्टार्ट होती है, तो यह ज्यादातर इलेक्ट्रिक मोटर से चलती है। जब ज्यादा स्पीड या पावर की जरूरत होती है, तो पेट्रोल/डीजल इंजन काम में आता है।
यह भी पढ़ें - Nitin Gadkari: देशभर के हाईवे और एक्सप्रेसवे पर 4,557 ईवी चार्जिंग स्टेशन लगाए गए, पीएम ई-ड्राइव से होगा बड़ा विस्तार
माइलेज ज्यादा, प्रदूषण कम
क्योंकि कार हर समय सिर्फ इंजन पर निर्भर नहीं रहती, इसलिए यह कम ईंधन खर्च करती है और ज्यादा माइलेज देती है। साथ ही इससे कम प्रदूषण होता है, क्योंकि कुछ हिस्सा इलेक्ट्रिक से चलता है।
चार्जिंग की जरूरत नहीं
अधिकतर हाइब्रिड कारों में इलेक्ट्रिक मोटर की बैटरी को खुद गाड़ी का इंजन या ब्रेक लगाने पर चार्ज किया जाता है। इसे सेल्फ-चार्जिंग हाइब्रिड कहते हैं। यानी आपको ईवी की तरह चार्जिंग स्टेशन ढूंढने की जरूरत नहीं होती।
यह भी पढ़ें - Tata Motors-Iveco: अब तक की सबसे बड़ी डील की तैयारी में टाटा मोटर्स, 4.5 अरब डॉलर में खरीदेगी इटली की इवेको
हाइब्रिड कार का मतलब एक ऐसी गाड़ी होती है जिसमें दो तरह के पावर सिस्टम होते हैं - एक पेट्रोल या डीजल इंजन और दूसरा इलेक्ट्रिक मोटर। यानी यह गाड़ी एक साथ फ्यूल (जैसे पेट्रोल/डीजल) और बैटरी दोनों से चल सकती है।
दो सिस्टम, एक गाड़ी
हाइब्रिड कार में इंजन और मोटर दोनों लगे होते हैं। जब कार धीरे चल रही होती है या स्टार्ट होती है, तो यह ज्यादातर इलेक्ट्रिक मोटर से चलती है। जब ज्यादा स्पीड या पावर की जरूरत होती है, तो पेट्रोल/डीजल इंजन काम में आता है।
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माइलेज ज्यादा, प्रदूषण कम
क्योंकि कार हर समय सिर्फ इंजन पर निर्भर नहीं रहती, इसलिए यह कम ईंधन खर्च करती है और ज्यादा माइलेज देती है। साथ ही इससे कम प्रदूषण होता है, क्योंकि कुछ हिस्सा इलेक्ट्रिक से चलता है।
चार्जिंग की जरूरत नहीं
अधिकतर हाइब्रिड कारों में इलेक्ट्रिक मोटर की बैटरी को खुद गाड़ी का इंजन या ब्रेक लगाने पर चार्ज किया जाता है। इसे सेल्फ-चार्जिंग हाइब्रिड कहते हैं। यानी आपको ईवी की तरह चार्जिंग स्टेशन ढूंढने की जरूरत नहीं होती।
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Maruti Suzuki Grand Vitara
- फोटो : Maruti Suzuki
नीति में बदलाव से उपभोक्ताओं की सोच बदली
ऑटो सेक्टर के विशेषज्ञ मानते हैं कि इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण राज्य सरकारों द्वारा हाल में किए गए नीतिगत बदलाव हैं। जिनसे हाइब्रिड कारों की ओनरशिप कॉस्ट (स्वामित्व लागत) में कमी आई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईवाई इंडिया के ऑटोमोटिव पार्टनर सोम कपूर ने कहा, "मांग पक्ष पर मिल रहे प्रोत्साहनों की वजह से हाइब्रिड वाहनों की मांग तेजी से बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश ने जहां रजिस्ट्रेशन टैक्स पूरी तरह माफ कर दिया है, वहीं दिल्ली भी इसी दिशा में सोच रही है। ग्राहक अब हाइब्रिड को एक ऐसे बीच के विकल्प के रूप में देख रहे हैं जो स्थिरता और सुविधा के बीच संतुलन बनाता है।"
यह भी पढ़ें - PUCC: भारत में 50% वाहन बिना बीमा के, कई राज्यों में 30% से भी कम गाड़ियों के पास प्रदूषण प्रमाण पत्र, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
उत्तर प्रदेश बना सबसे बड़ा ग्रोथ ड्राइवर
जून 2025 में उत्तर प्रदेश ने स्ट्रॉन्ग और प्लग-इन हाइब्रिड कारों पर रजिस्ट्रेशन टैक्स हटा दिया। जिसके चलते राज्य में इन वाहनों की बिक्री में चार गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 25 की पहली तिमाही में जहां 952 हाइब्रिड गाड़ियां बिकी थीं, वहीं वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में यह संख्या बढ़कर 4,228 यूनिट्स हो गई। इस टैक्स छूट से गाड़ियों की ऑन-रोड कीमतें लगभग 4 लाख रुपये तक कम हो गई हैं।
यह भी पढ़ें - Nitin Gadkari: नितिन गडकरी ने कहा- भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को दुनिया की नंबर-1 बनाने का लक्ष्य
ऑटो सेक्टर के विशेषज्ञ मानते हैं कि इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण राज्य सरकारों द्वारा हाल में किए गए नीतिगत बदलाव हैं। जिनसे हाइब्रिड कारों की ओनरशिप कॉस्ट (स्वामित्व लागत) में कमी आई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईवाई इंडिया के ऑटोमोटिव पार्टनर सोम कपूर ने कहा, "मांग पक्ष पर मिल रहे प्रोत्साहनों की वजह से हाइब्रिड वाहनों की मांग तेजी से बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश ने जहां रजिस्ट्रेशन टैक्स पूरी तरह माफ कर दिया है, वहीं दिल्ली भी इसी दिशा में सोच रही है। ग्राहक अब हाइब्रिड को एक ऐसे बीच के विकल्प के रूप में देख रहे हैं जो स्थिरता और सुविधा के बीच संतुलन बनाता है।"
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उत्तर प्रदेश बना सबसे बड़ा ग्रोथ ड्राइवर
जून 2025 में उत्तर प्रदेश ने स्ट्रॉन्ग और प्लग-इन हाइब्रिड कारों पर रजिस्ट्रेशन टैक्स हटा दिया। जिसके चलते राज्य में इन वाहनों की बिक्री में चार गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 25 की पहली तिमाही में जहां 952 हाइब्रिड गाड़ियां बिकी थीं, वहीं वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में यह संख्या बढ़कर 4,228 यूनिट्स हो गई। इस टैक्स छूट से गाड़ियों की ऑन-रोड कीमतें लगभग 4 लाख रुपये तक कम हो गई हैं।
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Honda City
- फोटो : Honda
कम सरकारी छूट के बावजूद हाइब्रिड में दिख रही मजबूती
हालांकि ईवी की तुलना में हाइब्रिड कारों को सरकार की तरफ से बहुत कम रियायतें मिलती हैं। ईवी पर सिर्फ 5 प्रतिशत जीएसटी लगता है, साथ ही उन्हें कई राज्यों में रोड टैक्स में छूट और सब्सिडी मिलती है। इसके मुकाबले, हाइब्रिड गाड़ियों पर टैक्स 43 प्रतिशत तक हो सकता है और केवल कुछ ही राज्य इन्हें सीमित छूट देते हैं। इसके बावजूद बिक्री में उछाल यह दिखाता है कि लोगों में हाइब्रिड के प्रति भरोसा बढ़ा है।
यह भी पढ़ें - EV Battery: ईवी मालिकों को जल्द मिलेगा 'बैटरी पासपोर्ट', एक स्कैन में मिलेगी बैटरी की पूरी जानकारी
ईवी से पूरी तरह बदलाव को लेकर अभी भी हिचकिचाहट
विशेषज्ञों का कहना है कि अभी भी बड़ी संख्या में उपभोक्ता इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर पूरी तरह से शिफ्ट करने को लेकर आश्वस्त नहीं हैं। ईवी की रेंज, चार्जिंग नेटवर्क और शुरुआती लागत जैसी चुनौतियां अब भी मौजूद हैं। ऐसे में हाइब्रिड गाड़ियां एक प्रैक्टिकल विकल्प बनकर उभरी हैं, जो पारंपरिक पेट्रोल या डीजल गाड़ियों के मुकाबले बेहतर माइलेज और कम प्रदूषण देती हैं। लेकिन साथ ही उनका फ्यूल और रीफ्यूलिंग सिस्टम वही रहता है जिससे लोग पहले से परिचित हैं।
यह भी पढ़ें - Top 5 Safest Cars in India: भारत की पांच सबसे सुरक्षित कारें, क्या आपकी कार इस लिस्ट में है?
हालांकि ईवी की तुलना में हाइब्रिड कारों को सरकार की तरफ से बहुत कम रियायतें मिलती हैं। ईवी पर सिर्फ 5 प्रतिशत जीएसटी लगता है, साथ ही उन्हें कई राज्यों में रोड टैक्स में छूट और सब्सिडी मिलती है। इसके मुकाबले, हाइब्रिड गाड़ियों पर टैक्स 43 प्रतिशत तक हो सकता है और केवल कुछ ही राज्य इन्हें सीमित छूट देते हैं। इसके बावजूद बिक्री में उछाल यह दिखाता है कि लोगों में हाइब्रिड के प्रति भरोसा बढ़ा है।
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ईवी से पूरी तरह बदलाव को लेकर अभी भी हिचकिचाहट
विशेषज्ञों का कहना है कि अभी भी बड़ी संख्या में उपभोक्ता इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर पूरी तरह से शिफ्ट करने को लेकर आश्वस्त नहीं हैं। ईवी की रेंज, चार्जिंग नेटवर्क और शुरुआती लागत जैसी चुनौतियां अब भी मौजूद हैं। ऐसे में हाइब्रिड गाड़ियां एक प्रैक्टिकल विकल्प बनकर उभरी हैं, जो पारंपरिक पेट्रोल या डीजल गाड़ियों के मुकाबले बेहतर माइलेज और कम प्रदूषण देती हैं। लेकिन साथ ही उनका फ्यूल और रीफ्यूलिंग सिस्टम वही रहता है जिससे लोग पहले से परिचित हैं।
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2025 Toyota Urban Cruiser Hyryder
- फोटो : Toyota
कम ऑप्शन के बावजूद तेजी से बढ़ रही लोकप्रियता
भारत में फिलहाल सिर्फ चार कंपनियों टोयोटा, लेक्सस, मारुति सुजुकी और होंडा की लगभग एक दर्जन हाइब्रिड मॉडल्स उपलब्ध हैं। इसके बावजूद, इस सेगमेंट की मांग तेजी से बढ़ रही है। वहीं ईवी बाजार में करीब 50 मॉडल्स उपलब्ध हैं, जिनमें टाटा मोटर्स, ह्यूंदै, किआ, महिंद्रा, एमजी, मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू, मिनी जैसी कंपनियां शामिल हैं।
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भारत में फिलहाल सिर्फ चार कंपनियों टोयोटा, लेक्सस, मारुति सुजुकी और होंडा की लगभग एक दर्जन हाइब्रिड मॉडल्स उपलब्ध हैं। इसके बावजूद, इस सेगमेंट की मांग तेजी से बढ़ रही है। वहीं ईवी बाजार में करीब 50 मॉडल्स उपलब्ध हैं, जिनमें टाटा मोटर्स, ह्यूंदै, किआ, महिंद्रा, एमजी, मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू, मिनी जैसी कंपनियां शामिल हैं।
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