देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बिक्री अभी भी रफ्तार नहीं पकड़ पाई है। अंदाजा लगा सकते हैं कि देश की सबसे सस्ती इलेक्ट्रिक एसयूवी टाटा नेक्सन ईवी की साल 2020 में मात्र 3000 यूनिट्स रही बिक पाई हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लेकर देश में अभी तक पूरी तरह से इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार नहीं हो पाया है, वहीं अभी लोगों में इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लेकर कई गलतफहमियां भी हैं। आइए जानते हैं उनके बारे में...
क्या इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लेकर आपको भी हैं ये पांच गलतफहमियां, यहां पढ़ें सभी जवाब
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चार्जिंग में ज्यादा वक्त लेती है इलेक्ट्रिक गाड़ियां!
आम लोगों में अभी भी धारणा है कि अगर ईवी पर शिफ्ट करेंगे तो उन्हें चार्जिंग में दिक्कत पेश होगी। क्योंकि अगर ईंधन खत्म हो जाए तो उसे तो तुरंत भरवाया जा सकता है, लेकिन अगर ईवी को चार्ज करने में घंटों लग जाएंगे। हालांकि ये बात बिल्कुल सही है लेकिन ईवी को हमेशा चार्ज नहीं करना पड़ता। ईवी को आप रात को चार्जिंग के लिए लगा कर छोड़ सकते हैं। इसे 240 वोल्ट को पावर आउटलेट से भी चार्ज किया जा सकता है। ईवी का एक फायदा यह भी है कि आपको सीएनजी या पेट्रोल पंपों की लाइन में नहीं लगना पड़ता। वहीं हाईवे पर चार्जिंग स्टेशंस लगने के बाद आप लंबी यात्राएं भी कर सकेंगे। फिलहाल ईवी के लिए जो सुपर चार्जर आ रहे हैं वे 30 से 60 मिनट में फुल चार्जिंग का दावा करते हैं। एमजी ZS ईवी की फास्ट चार्जिंग 50 मिनट में 0 से 80 फीसदी तक चार्ज कर देता है। वहीं कंपनी अपने ग्राहकों को उनके घर या ऑफिस में फास्ट चार्जिंग की भी सुविधा दे रही है।
महंगी पड़ती है मेंटेनेंस!
शुरुआत में जब कोई नई तकनीक आती है तो महंगी होती है। देश में अभी बिक रहीं इलेक्ट्रिक कारें काफी महंगी हैं, हालांकि सरकार उन पर सब्सिडी भी दे रही है। लेकिन अभी भी वे काफी महंगी हैं। वहीं ईवी की मेंटेनेंस कॉस्ट दूसरे ईंधन वाले वाहनों के मुकाबले काफी कम है, क्योंकि ईवी में मूविंग पार्ट्स काफी कम होते हैं, वहीं इनका कूलिंग सिस्टम काफी कारगर होता है।
वहीं ईवी निर्माता कंपनियां जैसे एमजी ग्राहकों को मेंटेनेंस पैकेज भी दे रही हैं। एमजी ने ईशील्ड नाम से पैकेज भी लॉन्च किया है, जिसमें पांच साल की मैन्युफैक्चरिंग वारंटी मुफ्त में दे रही है, साथ ही बैटरी पर 8 साल या डेढ़ लाख किमी की वारंटी के साथ पांच साल तक रोड साइड असिस्टेंस भी दे रही है।
क्या बार-बार बदलनी पड़ती हैं इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बैटरियां?
यह एक बड़ा सवाल है जो आम ईवी ग्राहक नई इलेक्ट्रिक कार लेने से पहले सोचता है। लीथियम आयन बैटरी आने से बैटरियों की लागत में काफी कमी आई है, वहीं भारत अब हाई परफॉरमेंस बैटरियों के निर्माण का केंद्र बनने की तरफ अग्रसर है। फिलहाल ईवी बैटरियां दो लाख किमी से ज्यादा चलने के बाद भी 90 फीसदी क्षमता के साथ बनी रहती हैं। कंपनियां ईवी की बैटरी पर 8 साल या 1.5 लाख किमी तक की वारंटी भी दे रही हैं। टाटा नेक्सन ईवी की बैटरी पर कंपनी 8 साल या 1.60 लाख किमी की वारंटी ऑफर कर रही है।
लंबी दूसरी तय करने के लिए नहीं हैं काबिल!
ईवी की कम बिक्री के पीछे यह एक बड़ी वजह है। लोगों के मन में डर है कि ईवी से लंबा सफर तय नहीं किया जा सकता। ईवी की अपनी एक रेंज होती है और अगर एसी के साथ 100 की रफ्तार से ईवी चलाते हैं तो उसकी बैटरी की परफॉरमेंस पर असर पड़ता है। टाटा नेक्सन ईवी की सिंगल चार्जिंग पर रेंज 312 किमी, एमजी ZS ईवी की 340 किमी और ह्यूंदै कोना की रेंज सबसे ज्यादा 452 किमी तक है। जो लंबे सफर के लिए काफी है। सरकार जैसे-जैसे चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करेगी, दिक्कतें कम होती चली जाएंगी।