अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (इंटरनल एनर्जी एजेंसी) (IEA,आईईए) ने अपनी विश्व ऊर्जा आउटलुक 2023 रिपोर्ट जारी की है। इसमें मोबिलिटी ऑप्शंस के बढ़ते दबदबे पर चर्चा की गई है, जो ऊर्जा के क्लीन और रिन्यूएबल सोर्स से चलते हैं। जबकि रिपोर्ट 2025 तक ओवरऑल ग्लोबल एमिशंस (वैश्विक उत्सर्जन) के चरम पर पहुंचने की भविष्यवाणी करती है। इसमें यह भी बताया गया है कि क्लीन एनर्जी के स्रोत इस दशक के आखिर तक ग्लोबल एनर्जी सिस्टम (वैश्विक ऊर्जा प्रणाली) को कैसे बदल देंगे।
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Volkswagen ID.7 Electric Car
- फोटो : Volkswagen
आईईए रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 में दुनिया भर में बिकने वाली हर 25 कारों में से एक इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) थी। रिपोर्ट इस बात पर रोशनी डालती है कि यह अब हर पांच कारों में से एक है। यानी अब दुनिया में बिकने वाली हर 5 कारों में से एक इलेक्ट्रिक वाहन है।
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MG 4 Electric Car
- फोटो : For Reference Only
रिपोर्ट साफ तौर पर दुनिया के कई हिस्सों में ईवी अपनाने की तेज रफ्तार की ओर इशारा करता है और आने वाले वर्षों के लिए एक आशावादी परिदृश्य को बयां करता है। इसी रिपोर्ट में आगे भविष्यवाणी की गई है कि मौजूदा रुझान के मुताबिक, 2030 में दुनिया में वर्तमान में मौजूद ईवी की संख्या कम से कम 10 गुना हो सकती है।
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For Reference Only
- फोटो : Social Media
लेकिन यह सिर्फ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ऑप्शंस के मैन्युफेक्चरिंग, पेशकश और खरीदारी के बारे में नहीं है। आईईए बिजली के क्लीन स्रोतों को एक प्रमुख फोकस क्षेत्र के रूप में इंगित करता है और भविष्यवाणी करता है कि सौर और पवन ऊर्जा आने वाले वर्षों के साथ और ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेंगी। तेल, कोयला और प्राकृतिक गैस जैसे फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ईंधन) की हिस्सेदारी 2030 तक मौजूदा 80 प्रतिशत से घटकर लगभग 73 प्रतिशत होने की उम्मीद है।
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Kia EV6 Electric Car
- फोटो : Kia
रिपोर्ट में 2030 के लिए कुछ देश-विशिष्ट भविष्यवाणियों के बारे में भी बात की गई है। इसमें कहा गया है कि भारत को 2030 तक सौर ऊर्जा से अपनी 18 प्रतिशत बिजली का उत्पादन करने की उम्मीद है, जो इस समय छह प्रतिशत से ज्यादा है। संयुक्त राज्य अमेरिका में, दशक के आखिर तक रिन्यूएबल सोर्स से ऊर्जा उत्पादन लगभग 45 प्रतिशत हो जाएगा, जो वर्तमान में 22 प्रतिशत है।