मोटर वाहन बीमा का प्रीमियम तय करते समय कंपनियां अमूमन उसकी बाजार कीमत और इंजन की क्षमता को ध्यान में रखती हैं। आने वाले दिनों में इस प्रीमियम पर वाहन चलाने के तरीके और जोखिम उठाने का भी असर पड़ेगा। भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने इसके लिए ‘टेलीमैटिक्स फॉर मोटर इंश्योरेंस सिस्टम’ से गाड़ियों पर नजर रखी जाएगी।
शामिल हो सकते हैं तीन नए मानक
- वाहन का इस्तेमाल
- कुल कितने किलोमीटर चला
- वाहन चलाने का तरीका
- वाहन चालक को होगा लाभ
टेलीमैटिक्स सिस्टम है क्या?
बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) ने वाहन बीमा क्षेत्र के कई नियमों में बदलाव का मसौदा तैयार किया है। इसमें टेलीमैटिक्स सिस्टम भी शामिल है। अब आप सोचेंगे कि टेलीमैटिक्स सिस्टम है क्या। इसके तहत ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) के जरिये वाहनों पर नजर रखी जाएगी।
रियल टाइम डाटा तैयार होगा
इसके जरिये ड्राइवर की वाहन चलाने की आदतों का रियल टाइम डाटा तैयार किया जाएगा। वाहन का प्रीमियम तय करते समय कंपनियां इस डाटा के आधार पर राशि कम या ज्यादा कर सकती हैं। मसलन, अगर एक ही क्षमता और बाजार मूल्य की कार को कोई व्यक्ति सावधानीपूर्वक बिना जोखिम उठाए चलाता है, तो उसे तेज रफ्तार और खतरनाक ढंग से कार चलाने वाले की तुलना में कम प्रीमियम अदा करना होगा। बीमा नियामक का मानना है कि इस कदम से लोग सावधानीपूर्वक वाहन चलाने की ओर प्रोत्साहित होंगे और सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
किन आदतों की होगी रिकॉर्डिंग
ड्राइविंग के आधार पर होने वाले इंश्योरेंस को यूजेज बेस्ड इंश्योरेंस नाम दिया गया है। टेलिमैटिक्स डिवाइसेस से जुटाए गए डाटा में तेजी से अक्सेलरेटर दबाना, कार का कुल कवर डिस्टेंस, तेजी से ब्रेक लगाना, गाड़ी को नुकसान के कारण, कोनों पर तेजी से ड्राइविंग, तेजी से दिशा बदलना और एयरबैग्स का फंक्शन जैसे पैटर्न शामिल किए जाएंगे।