अब तक सुरक्षा मायनों में सिर्फ एक ही कार Tata Nexon का बोल-बाला था। वहीं अब होंडा की नई CR-V ने भी Euro NCAP में 5 स्टार रेटिंग हासिल कर सबको चौका दिया की है। Honda CR-V ने Euro NCAP में एडल्ट सेफ्टी में कार को 93 प्रतिशत, चाइल्ड सेफ्टी में 83 प्रतिशत, रोड सेफ्टी में 70 प्रतिशत और सेफ्टी असिस्ट में 76 प्रतिशत स्कोर मिला है।
लो आ गई भारत की दूसरी सुरक्षित कार, Euro NCAP में मिली 5 स्टार रेटिंग: वीडियो
इन फीचर्स के चलते मार गई बाजी
होंडा सीआर-वी (Honda CR-V) के इस मॉडल में फ्रंट ड्राइवर और पैसेंजर एयरबैग्स, साइड एयरबैग्स, लीड लिमिटर, आइसोफिक्स चाइल्ड रिअर सीट, ऑटो इमरजेंसी ब्रेकिंग टेक्नोलॉजी, स्पीड असिस्ट और लेन असिस्ट सिस्टम, सीट बेल्ट रिमाइंडर, पैसेंजर एयरबैग कट-ऑफ स्विच जैसे फीचर शामिल थे।
4 तरह के होते हैं टेस्ट
फ्रंटल इम्पैक्ट
क्रैश टेस्ट के दौरान कार की सीधी टक्कर में कार को 64 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अपने बराबर के वजन वाले एक ढांचे से टकराया जाता है। टेस्ट के दौरान इस कार में आगे की सीट पर दो डमी बैठाये जाते हैं।
साइड इम्पैक्ट
इस टेस्ट में एक कार दूसरी कार से 90 डिग्री पर टकराती है। जिसमें ड्राइवर सीट पर एक डमी बैठा होता है, जो 950 किलोग्राम की एक ट्रोली को ड्राइवर की साइड से टक्कर मारता है। इस ट्रोली की स्पीड 50 किलोमीटर प्रति घंटे रखी जाती है।
पोल इम्पैक्ट
इस टेस्ट में कार की टक्कर किसी खंभे या पेड़ से होती है।
पेडेस्ट्रियन
पेडेस्ट्रियन प्रोटेक्शन जिसमें जांचा जाता है कि अगर कार किसी पैदल यात्री से टकरा जाए तो उन्हें कितना नुकसान पहुंचेगा।
क्या होता है क्रैश टेस्ट
क्रैश टेस्ट यह जानने का तरीका है कि ड्राइवर, पैसेंजर और यहां तक कि पैदल यात्रियों के लिए भी वे कितनी सेफ हैं। इन्हीं पैमानों पर आमतौर पर पैसेंजर कारों और SUV का क्रैश टेस्ट होता है। जिसके तहत कारों को अलग-अलग एंगल से क्रैश किया जाता है। सभी टेस्ट क्रैश लैब में किए जाते हैं। ताकि टक्कर से जुड़े सभी आंकड़े रिकॉर्ड किए जा सकें। शुरू में जहां कई कार कंपनियों ने इस टेस्ट के परिणामों की आलोचना की, वहीं आज यह स्थिति है कि दुनियाभर में इस रेटिंग को आधिकारिक तौर पर माना जाता है।
सुरक्षा को तवज्जो नहीं देते भारतीय
साल 2017-18 की सेल्स रिपोर्ट में बीते सालों के मुकाबले 10 प्रतिशत अधिक गाड़ियां भारतीय ग्राहकों ने खरीदी। हालांकि मेट्रो सिटी में इनकी बिक्री में गिरावट दर्ज की गई । जिसके पीछे बड़ा कारण पार्किंग स्पेस भी रहा। आज भी देश में कई ऐसी गाड़ियां मौजूद हैं जिन्हें एनसीएपी टेस्ट में 0 से 1 तक भी स्टार मिलें हैं। लेकिन भारतीयों के लिए आज भी कम मूल्य और ज्यादा माइलेज इतना जरूरी है कि वो सुरक्षा पर ध्यान दिए बिना ही कार खरीद लेते हैं।