अक्सर मनुष्य के मन में यह विचार आता है कि किस देवी या देवता की पूजा करना फलदायी रहता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, अलग-अलग राशि के जातकों के देवता अलग-अलग होते हैं। राशिनुसार उनका पूजन करने से लाभ प्राप्त होता है और देवकृपा भी बनी रहती है।
प्रत्येक देवी-देवता किसी न किसी ग्रह से संबंधित होते हैं, ऐसे में यदि कोई देवी-देवता जातक की कुंडली की ग्रह स्थिति से मेल नहीं खाते हैं, तो जातक को पूजा-पाठ से अनुकूल परिणाम नहीं मिलते। कई बार तो ग्रह दशा के विपरीत देवी-देवता चुनने से जातक को हानि भी उठानी पड़ जाती है। मान्यता है कि अपनी कुंडली की ग्रह स्थिति के अनुसार ही देवी-देवता चुनना श्रेयस्कर होता है। कुंडली अनुकूल देवी-देवता जानने के लिए जातक की कुंडली का प्रथम भाव, पंचम भाव और नवम भाव से चुनना उत्तम होता है।
मेष लग्न :- इस लग्न के प्रथम भाव में मेष राशि, पंचम भाव में सिंह राशि व नवम भाव में धनु राशि होती है अतः इन जातकों के लिए हनुमान जी, सूर्य देव, श्री राम व भगवान विष्णु की उपासना उत्तम और फलदायक होती है।
वृष लग्न :- इस लग्न के प्रथम भाव में वृष राशि, पंचम भाव में कन्या राशि व नवम भाव में मकर राशि होती है, अतः इन जातकों के लिए मां लक्ष्मी, गणेश व मां दुर्गा की उपासना उत्तम और फलदायक होती है।
मिथुन लग्न :- इस लग्न के प्रथम भाव में मिथुन राशि, पंचम भाव में तुला राशि व नवम भाव में कुंभ राशि होती है। इन जातकों के लिए गणेश जी, मां लक्ष्मी, मां काली व शनि देव की उपासना उत्तम और फलदायक होती है।
कर्क लग्न :- इस लग्न के प्रथम भाव में कर्क राशि, पंचम भाव में वृश्चिक राशि व नवम भाव में मीन राशि होती है, अतः इन जातकों के लिए शिव जी, हनुमान जी तथा विष्णु जी की उपासना उत्तम और फलदायक होती है।