Navratri 2020 : शारदीय नवरात्रि स्थापना से लेकर दशहरा तक का समय अत्यंत पवित्र और उत्साह से परिपूर्ण होता है। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा बड़े ही चाव और भक्ति भाव से की जाती है। जगह-जगह माँ शेरावाली के पांडाल सजते है एवं श्रीराम की कथाओं का आयोजन बड़े सुंदर तरीके से किया जाता हैं। नवरात्रि में माँ दुर्गा की कृपा पाने के लिए हम उपवास, पूजा, अनुष्ठान आदि करते है जिससे जीवन में भय ,विघ्न और शत्रुओं का नाश होकर सुख-समृद्धि आती है। जिन भवनों में वास्तुदोष हो वहां सुख-शांति के लिए देवी माँ की पूजा से घर के वास्तुदोषों का शमन होता है और वहां उपस्थित सभी नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं।
वास्तु में मान्यता है कि नवरात्रि के दिनों में कन्याओं को देवी का रूप मानकर आदर-सत्कार करने एवं भोजन कराने से घर का वास्तुदोष दूर होता है और सुख-समृद्धि,ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। मनुष्य प्रकृति रूपी कन्याओं का पूजन करके साक्षात भगवती की कृपा पा सकते हैं। इन कन्याओं में मां दुर्गा का वास रहता है। कन्या पूजन नवरात्रि पर्व के किसी भी दिन या कभी भी कर सकते हैं लेकिन अष्टमी और नवमी को कन्या पूजन के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
जहाँ माता का दरबार सजा रहे है वह जगह साफ़-सुथरी हो,धूल-मिट्टी,मकड़ी के जाले नहीं हो,ये नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते है। पूजन कक्ष की दीवारें हल्के पीले, गुलाबी ,हरे, बैंगनी जैसे आध्यात्मिक रंग की हो तो अच्छा है,क्यों की ये रंग सकारात्मक ऊर्जा के स्तर को बढ़ाते है।काले,नीले और भूरे जैसे तामसिक रंगों का प्रयोग पूजा कक्ष की दीवारों पर नहीं होना चाहिए।
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नवरात्रि का महत्व
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वास्तुविज्ञान के अनुसार मानसिक स्पष्टता और प्रज्ञा का दिशा क्षेत्र ईशान कोण यानि कि उत्तर-पूर्व दिशा को पूजा-पाठ के लिए श्रेष्ठ माना गया है। यहाँ माता रानी की पूजा करने से उपासक को पूजा का पूर्ण फल मिलता है,घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बना रहेगा।
धर्मशास्त्रों के अनुसार कलश को सुख-समृद्धि, वैभव और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना गया है। कलश में सभी ग्रह नक्षत्रों एवं तीर्थों का वास होता है। इनके आलावा ब्रह्मा, विष्णु,रूद्र,सभी नदियों,सागरों,सरोवरों एवं तेतीस कोटि देवी-देवता कलश में विराजमान होते हैं। वास्तु के अनुसार ईशान कोण(उत्तर-पूर्व)जल एवं ईश्वर का स्थान माना गया है और यहां सर्वाधिक सकारात्मक ऊर्जा रहती है। इस दिशा में कलश रखने से जल तत्व से जुड़े वास्तुदोष दूर होकर सुख-समृद्धि आती है।