वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को भगवान शिव की जटाओं से माँ गंगा ने पृथ्वी की ओर अपनी यात्रा शुरू की थी। पुराणों के अनुसार गंगा सप्तमी के दिन गंगा शिव की जटाओं में से निकली थीं और गंगा दशहरा के दिन गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। विष्णु पुराण के अनुसार गंगा को विष्णुजी के बायें पैर के अंगूठे के नख से प्रवाहित होना बताया गया है। धर्मग्रंथों के अनुसार स्वर्ग में गंगा 'मंदाकिनी' के रूप में पृथ्वी पर 'गंगा' के रूप में और पाताल में 'भोगवती' के रूप में प्रवाहित हो रही है। ऐसी मान्यता है कि गंगा सप्तमी के दिन गंगा स्नान, दान,पूजा एवं मंत्रों का जप करने से प्राणी के दैहिक,दैविक और भौतिक ताप दूर होते हैं, परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
{"_id":"6448dd5f1c72bcdf48047b46","slug":"ganga-saptami-2023-must-these-remedies-and-chant-maa-ganga-mantra-benefits-and-significance-2023-04-26","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Ganga Saptami 2023: गंगा सप्तमी के दिन कर लें ये उपाय, समस्याओं से शीघ्र मिलेगा छुटकारा","category":{"title":"Vaastu","title_hn":"वास्तु","slug":"vastu"}}
Ganga Saptami 2023: गंगा सप्तमी के दिन कर लें ये उपाय, समस्याओं से शीघ्र मिलेगा छुटकारा
Thu, 27 Apr 2023 07:08 AM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 27 Apr 2023 07:08 AM IST
विज्ञापन
Ganga Saptami 2023: गंगा पूजन करना मोक्ष प्रदायक,अमोघ फलदायक माना गया है एवं इस दिन किया दान कई जन्मों के पुण्य के रूप में प्राणी को मिलता है।
- फोटो : iStock
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Ganga Saptami 2023
- फोटो : iStock
पाप होंगे दूर
यदि कोई मनुष्य पवित्र नदी तक नहीं जा पाता, तब वह अपने घर के पास की किसी नदी पर मां गंगा का स्मरण करते हुए स्नान करें और यह भी संभव नहीं हो तो मां गंगा की कृपा पाने के लिए इस दिन गंगाजल का स्पर्श और सेवन अवश्य करना चाहिए। विष्णु पुराण में लिखा है कि गंगा का नाम लेने, सुनने, उसे देखने, उसका जल पीने, स्पर्श करने, उसमें स्नान करने तथा सौ योजन (कोस) से भी गंगा नाम का उच्चारण करने मात्र से मनुष्य के तीन जन्मों तक के पाप नष्ट हो जाते हैं।
Ganga Saptami 2023: 26 या 27 अप्रैल, गंगा सप्तमी कब? जानें सही तिथि और पूजा विधि
यदि कोई मनुष्य पवित्र नदी तक नहीं जा पाता, तब वह अपने घर के पास की किसी नदी पर मां गंगा का स्मरण करते हुए स्नान करें और यह भी संभव नहीं हो तो मां गंगा की कृपा पाने के लिए इस दिन गंगाजल का स्पर्श और सेवन अवश्य करना चाहिए। विष्णु पुराण में लिखा है कि गंगा का नाम लेने, सुनने, उसे देखने, उसका जल पीने, स्पर्श करने, उसमें स्नान करने तथा सौ योजन (कोस) से भी गंगा नाम का उच्चारण करने मात्र से मनुष्य के तीन जन्मों तक के पाप नष्ट हो जाते हैं।
Ganga Saptami 2023: 26 या 27 अप्रैल, गंगा सप्तमी कब? जानें सही तिथि और पूजा विधि
Ganga Saptami 2023
- फोटो : iStock
धन लाभ होगा
बहुत प्रयास करने के बाद भी धन से जुड़ी दिक्कत है तो इस दिन आप गंगाजल को चांदी के पात्र में भरें और उसे अपने घर की उत्तर पूर्व दिशा में रख दें, ऐसा करने से धन का आगमन होगा। गंगाजल को हमेशा अपने पूजा स्थल और किचन के उत्तर-पूर्व में रखें, धीरे-धीरे आपको आर्थिक लाभ के साथ तरक्की और सफलता मिलने लगेगी। जिस घर में गंगाजल रखा होता है वहां सकारात्मक उर्जा का वास होता है ,उस घर में स्थिर लक्ष्मी निवास करती है।
बहुत प्रयास करने के बाद भी धन से जुड़ी दिक्कत है तो इस दिन आप गंगाजल को चांदी के पात्र में भरें और उसे अपने घर की उत्तर पूर्व दिशा में रख दें, ऐसा करने से धन का आगमन होगा। गंगाजल को हमेशा अपने पूजा स्थल और किचन के उत्तर-पूर्व में रखें, धीरे-धीरे आपको आर्थिक लाभ के साथ तरक्की और सफलता मिलने लगेगी। जिस घर में गंगाजल रखा होता है वहां सकारात्मक उर्जा का वास होता है ,उस घर में स्थिर लक्ष्मी निवास करती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Ganga Saptami Kab Hai
- फोटो : अमर उजाला
वास्तुदोष दूर होगा
कई बार वास्तु सम्मत भवन बनाने के बाद भी उसमें वास्तुदोष रह जाते हैं, जिसके कारण परिवार के सदस्यों को आर्थिक, शारीरिक और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यदि ऐसा है तो आप गंगा सप्तमी के दिन से शुरू करके अपने घर में गंगाजल का छिड़काव करें। नित्य ऐसा करने से वास्तु दोष का प्रभाव खत्म होगा और घर में सकारात्मक ऊर्जा स्तर बढ़ेगा,जिससे आपके कष्ट धीरे-धीरे दूर हो जाएंगे।
ज्योतिष का सबसे बड़ा परिवर्तन: अक्तूबर में राहु बदलेंगे राशि, जानिए 12 राशियों पर क्या होगा इसका प्रभाव ?
कई बार वास्तु सम्मत भवन बनाने के बाद भी उसमें वास्तुदोष रह जाते हैं, जिसके कारण परिवार के सदस्यों को आर्थिक, शारीरिक और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यदि ऐसा है तो आप गंगा सप्तमी के दिन से शुरू करके अपने घर में गंगाजल का छिड़काव करें। नित्य ऐसा करने से वास्तु दोष का प्रभाव खत्म होगा और घर में सकारात्मक ऊर्जा स्तर बढ़ेगा,जिससे आपके कष्ट धीरे-धीरे दूर हो जाएंगे।
ज्योतिष का सबसे बड़ा परिवर्तन: अक्तूबर में राहु बदलेंगे राशि, जानिए 12 राशियों पर क्या होगा इसका प्रभाव ?
विज्ञापन
- फोटो : अमर उजाला
अशुभ प्रभाव होंगे दूर
गंगा सप्तमी से शुरू करके यदि आप शिवलिंग पर नित्यप्रति गंगा जल से अभिषेक करेंगे तो भोलेनाथ जल्द ही प्रसन्न होंगे और कुंडली में ग्रहों की स्थिति मजबूत होगी। जीवन के सभी विकार नष्ट हो जाएंगे। इसी प्रकार हर शनिवार एक लोटे में साफ जल भरें और उसमें थोड़ा सा गंगाजल डाल लें। ये जल पीपल को चढ़ाएं। ऐसा करने से शनि के अशुभ प्रभाव से मुक्ति मिलती है।
गंगा सप्तमी से शुरू करके यदि आप शिवलिंग पर नित्यप्रति गंगा जल से अभिषेक करेंगे तो भोलेनाथ जल्द ही प्रसन्न होंगे और कुंडली में ग्रहों की स्थिति मजबूत होगी। जीवन के सभी विकार नष्ट हो जाएंगे। इसी प्रकार हर शनिवार एक लोटे में साफ जल भरें और उसमें थोड़ा सा गंगाजल डाल लें। ये जल पीपल को चढ़ाएं। ऐसा करने से शनि के अशुभ प्रभाव से मुक्ति मिलती है।