हर धर्म की अपनी मान्यताएं और परंपराएं होती है जिसे प्रत्येक धर्म मानने वाले लोग निर्वहन करते हैं। इसी तरह से हिंदू सनातन धर्म में भी कई मान्यताएं या परंपराएं हैं जिनकों लोग बहुत पुराने समय से निभाते चले आ रहै हैं। शास्त्रों के अनुसार अनुसार कई कार्यों को वर्जित माना गया है। आज के समय में कई लोग इन बातों को अंधविश्वास या दकियानूसी कहते हैं। तो क्या वाकई ये मान्यताएं केवल अंधविश्वास पर टिकी हैं या फिर इनके पीछे कोई तर्क और तथ्य भी हैं। तो चलिए जानते हैं ऐसी ही कुछ मान्यताओं और धारणाओं के बारे में कि ये सिर्फ 'अंधविश्वास हैं या तथ्य'
दांतो से क्यों नहीं चबाते हैं तुलसी 'अंधविश्वास या तथ्य' जानिए ऐसी ही धारणाओं के बारे में
हिंदू धर्म में तुलसी को पूजनीय और पवित्र पौधा माना गया है। इसके कई स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं। यही कारण है कि लोग तुलसी के पत्तो का सेवन भी करते हैं। तुलसी के पत्तों को दांतो से चबाने के लिए मना किया जाता है। बड़े-बुजुर्ग केवल ये कहते हैं कि तुलसी के पत्तों का चबाना अच्छा नहीं होता है। क्या आपको पता है कि ये बात पूरी तरह से सही है तुलसी के पत्तों में क्षार तत्व होते हैं, जब कोई तुलसी के पत्तों को चबाता है तो इसके क्षारीयपन के कारण दांत खराब हो जाते हैं। इसलिए तुलसी के पत्तों को नहीं चबाना चाहिए।
जब ग्रहण पड़ता है तो हमारे बड़े-बुजुर्ग घर से बाहर निकलने और ग्रहण देखने को मना करते हैं। उनका कहना होता है कि इससे नकारात्मकता हावी हो सकती है। इसके पीछे तथ्य यह है कि जब सूर्य ग्रहण पड़ता है तो उस समय निकलने वाली किरणें व्यक्ति की आंखों के लिए बहुत नुकसान दायक होती हैं।
हिंदू धर्म में मंदिर और पूजा करते समय घंटी अवश्य बजाई जाती है। मंदिर में प्रवेश करते और वापस आते समय मंदिर की घंटी बजाना शुभ माना जाता है। इसके पीछे तथ्य है कि जब घंटी बजाई जाती है तो कुछ समय लगभग 7 सेकेंड तक उसकी ध्वनि की गूंज बनी रहती है। उस ध्वनि की ऊर्जा सीधे शरीर में प्रवेश करती है, जिससे शरीर में जो सकारात्मक सिहरन होती है वह व्यक्ति के सातों चक्रों को प्रभावित करती है।
हिंदू धर्म के अनुसार जब किसी का अंतिम संस्कार करके वापस आते है तो स्नान करना आवश्यक माना गया है। यह एक आवश्यक नियम माना गया है। इसके पीछे तथ्य यह है कि हमारे बड़े बुजुर्ग स्वस्थ और स्वच्छ जीवनशैली जीने में विश्वास रखते थे। किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के बाद शरीर में कई तरह के किटाणु पनपने लगते हैं। अंतिम संस्कार करने वाले लोग और वहां मौजूद अन्य लोगों के भी उन जीवाणुओं की संपर्क आने की पूरी संभावना रहती है। इसलिए श्मशान से आकर स्नान अवश्य करना चाहिए।