Shani Dev Favorite Zodiac Signs: नवग्रहों में शनि को न्यायाधीश का दर्जा प्राप्त है, क्योंकि वह जातकों को कर्म के अनुसार फल प्रदान करते हैं। यही कारण है कि महाराज को कर्मफलदाता भी कहा जाता है। शनि सबसे प्रभावशाली ग्रह भी है। कुंडली में उनकी स्थिति व्यक्ति के निजी जीवन से लेकर करियर कारोबार को प्रभावित करती है। इसके अलावा शनि एक राशि में लगभग ढाई वर्ष तक रहते है और उसके बाद ही चाल में बदलाव करते हैं। समय अधिक होने के कारण जातकों पर उनके गोचर का असर भी लंबे समय तक रहता है। शनि विशेष रूप से संघर्ष, न्याय, देरी और कठिनाई के लिए जाने जाते हैं। कुंडली में उनके कमजोर होने से व्यक्ति अधिक कष्ट झेलता है। हालांकि कुछ राशि वालों पर न्यायाधीश की सदैव कृपा बनी रही हैं। शनि की कृपा से इन राशि के लोगों को धन लाभ, सम्मान, सफलता और समाज में अच्छा दर्जा मिलता है। आइए इनके नाम जानते हैं।
Zodiac Signs: इन दो राशि वालों पर बनी रहती हैं शनि देव की कृपा, बनते हैं धनवान
Zodiac Signs: शनि एक राशि में लगभग ढाई वर्ष तक रहते है और उसके बाद ही चाल में बदलाव करते हैं। समय अधिक होने के कारण जातकों पर उनके गोचर का असर भी लंबे समय तक रहता है।
मकर और कुंभ
12 में से शनि मकर और कुंभ राशि के स्वामी ग्रह माने जाते हैं। इन राशि वालों पर महाराज हमेशा प्रसन्न रहते हैं। उनकी कृपा से इन दोनों राशि के लोग करियर में सफलता, व्यापार में अच्छा नाम, निवेश में लाभ और शिक्षा में हमेशा आगे रहते हैं। यदि इस राशि के लोग किसी चीज को पाने में संघर्ष करते हैं, तो वह इन्हें अवश्य मिलती है। ये लोग अपनी मेहनत से समाज में अच्छा नाम कमाने में कामयाब होते हैं। इसके अलावा इन्हें कर्मठ भी माना जाता है।
मकर और कुंभ राशि के लोग अक्सर झूठ, छल और बुराइयों से दूर रहते है। शनिदेव के आशीर्वाद से ये लोग रिश्तों में भाग्यशाली बनते हैं। मेहनत के बल पर जीवन में अच्छे मुकाम को प्राप्त करते हैं। इन जातकों को जीवन में धन और सुख-समृद्धि की प्राप्ति अवश्य होती है। लंबे समय से लंबित कार्य सफलतापूर्वक पूरे करते हैं।
ज्योतिषियों के मुताबिक इन राशि वालों को शनिवार के दिन शनि देव की पूजा और काली चीजों का दान करना चाहिए। साथ ही शनि देव के मंदिर जाकर सरसों का तेल का दीप जलाएं और इन खास मंत्रों का जप करें। यह आपके लिए लाभकारी हो सकता है।
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शनि गायत्री मंत्र
ॐ शनैश्चराय विदमहे छायापुत्राय धीमहि ।
शनि बीज मंत्र
ॐ प्रां प्रीं प्रों स: शनैश्चराय नमः ।।
शनि स्तोत्र
ॐ नीलांजन समाभासं रवि पुत्रं यमाग्रजम ।
छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम ।।