Raksha Bandhan 2025 Vastu Tips: राखी बांधते समय सभी लोग शुभ मुहूर्त तो देखते हैं परंतु वास्तु के अनुसार राखी बांधने का ध्यान कम लोग ही रखते होंगे। रक्षाबंधन के दिन इस बार वास्तु और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बांधें अपने भाई को राखी। इससे शुभ एवं मंगल होने के साथ ही सकारात्मक भाव का संचार भी होगा। पहले से ही राखी बांधने की संपूर्ण तैयारी करके रख लें।
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पांच वस्तुओं से रक्षासूत्र का निर्माण किया जाता है। इनमें दूर्वा (घास), अक्षत (चावल), केसर, चंदन और सरसों के दाने शामिल हैं।
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राखी का चयन
वैदिक राखी: पांच वस्तुओं से रक्षासूत्र का निर्माण किया जाता है। इनमें दूर्वा (घास), अक्षत (चावल), केसर, चंदन और सरसों के दाने शामिल हैं। इन पांच वस्तुओं को रेशम के कपड़े में बांध दें या सिलाई कर दें, फिर उसे कलावे में पिरो दें। इस प्रकार वैदिक राखी तैयार हो जाएगी। वास्तु अनुसार राखी प्राकृतिक चीजों से बनी हो या वैदिक राखी बांधें। पुरानी राखी न बांधें।
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यदि राशि अनुसार राखी नहीं मिल रही है तो वास्तु के अनुसार लाल, पीले और नारंगी रंग की राखी बांधना चाहिए।
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राशि के अनुसार राखी
मेष राशि के लिए लाल या नारंगी रंग, वृषभ राशि के लिए सफेद, गुलाबी या हल्के नीले रंग, मिथुन राशि के लिए हरा रंग, कर्क राशि के लिए सफेद रंग, सिंह राशि के लिए सुनहरे, पीले या केसरिया रंग, कन्या राशि के लिए गहरे हरे या भूरे रंग, तुला राशि के लिए गुलाबी, हल्का नीला या सफेद रंग, वृश्चिक राशि के लिए लाल, नारंगी या मैरून रंग, धनु राशि के लिए पीले या सुनहरे रंग, मकर राशि के लिए गहरे नीले, भूरे या काले, कुंभ राशि के लिए नीले या बैंगनी रंग और मीन राशि के लिए पीले या नारंगी रंग की राखी का चयन करें।
यदि राशि अनुसार राखी नहीं मिल रही है तो वास्तु के अनुसार लाल, पीले और नारंगी रंग की राखी बांधना चाहिए। डार्क नीले, जामुनी, काले या कत्थई रंग की राखी न बांधें।
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राखी बांधते समय उचित दिशा और स्थान का ज्ञान होना जरूरी है। राखी बांधने के लिए घर के ईशान, पूर्व या उत्तर दिशा का चयन करें जो शुद्ध और पवित्र हो।
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दिशा का चयन
राखी बांधते समय उचित दिशा और स्थान का ज्ञान होना जरूरी है। राखी बांधने के लिए घर के ईशान, पूर्व या उत्तर दिशा का चयन करें जो शुद्ध और पवित्र हो। यदि बहन अपने भाई को राखी बांध रही है तो बहन को पश्चिम में मुख करके राखी बांधना चाहिए। मतलब यह भी भाई का मुख पूर्व में होना चाहिए।
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भाई को लकड़ी के पाट पर बैठाकर बहन को कुश के आसन पर बैठना चाहिए।
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उचित आसन
भाई को लकड़ी के पाट पर बैठाकर बहन को कुश के आसन पर बैठना चाहिए। दोनों के आसनों में इतनी स्पेस होना चाहिए कि वहां पर आसानी से राखी की थाली आदि सामान रखा जा सके। यदि आसन कुश का न हो तो सूत की दरी का उपयोग कर सकते हैं। प्लास्टिक की चटाई या कपड़े के आसन का उपयोग न करें।