किसी जातक की कुंडली में यदि लग्नेश पापाक्रांत हो, निर्बल हो, पापग्रहों से दृष्ट अथवा युत हो, तो जिस भाव में लग्नेश स्थित है, वहां स्थित राशि शरीर के जिस अंग को प्रदर्शित करती है, उस अंग में पीड़ा होती है। आइए जानते हैं कि किस लग्न के जातक को भविष्य में किस तरह की पीड़ा होने की आशंका बनी रहती है :
कुंडली बताएगी आपको कब और किस अंग में होगी पीड़ा
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मेष लग्न और मंगल पापाक्रांत हो, तो सिर में दर्द, रक्तचाप में असंतुलन, सिर में चोट लगने का भय बना रहता है।
नीच राशिगत लग्नेश और शारीरिक समस्या
मेष लग्न का स्वामी मंगल, चतुर्थ भाव में काल पुरुष के चतुर्थ अंग से सम्बंधित पीड़ा, फेफड़ों और छाती से सम्बंधित कष्ट देगा।
वृष लग्न हो और शुक्र पापाक्रांत हो, तो मुख में विकार उत्पन्न होता है, चेहरे में भी मलिनता आती है।
नीच राशिगत लग्नेश और शारीरिक समस्या
वृषभ लग्न का स्वामी शुक्र पंचम स्थान में नीच राशिगत होकर पंचम भाव से संबंध उदर संबंधी पीड़ा देने वाला होता है।
मिथुन लग्न हो और मिथुन लग्न का स्वामी पापाक्रांत हो तो श्वांस की नाली में, स्वर नली में विकार उत्पन्न होता है।
नीच राशिगत लग्नेश और शारीरिक समस्या
मिथुन लग्न का बुध दशम भाव में नीच राशिगत होकर स्थित हो, तो घुटनों में कष्ट देता है, क्योंकि दशम स्थान प्रमुख केंद्र स्थान है, जहां ग्रह बली हो जाते हैं।
कर्क लग्न के स्वामी चंद्र के पापाक्रांत होने से फेफड़ों से सम्बंधित कष्ट, प्लूरेसिस, टी.बी., अस्थमा, खांसी जैसी पीड़ा होती है।
नीच राशिगत लग्नेश और शारीरिक समस्या
कर्क लग्न का स्वामी चन्द्रमा पंचम भाव में नीच राशिगत हो, तो उदर में जलीय पीड़ा जैसे जलोदर आदि से कष्ट प्रदान करने वाला होता है। अर्थात जब चन्द्रमा सप्तम भाव में नीच हो, तो जातक के ज्येष्ठ भ्राता के पुत्र को जलोदर सम्बन्धी पीड़ा होती है। ज्येष्ठ भ्राता का स्थान एकादश होता है और उसका पुत्र उसके स्थान से पंचम अर्थात जन्मांग का तृतीय स्थान हुआ। तृतीयाधिपति चन्द्रमा जब नीच होगा, तो उपर्युक्त नियमानुसार उदर में कष्ट प्रदान करेगा।