केतु को अशुभ ग्रह के रूप में देखा जाता है। लेकिन ऐसा नहीं है कि केतु हमेशा अशुभ फल ही देता है, बल्कि इसके शुभ-अशुभ परिणाम इसकी परिस्थिति पर आधारित होते हैं। यदि केतु देवगुरु बृहस्पति के साथ युति बनाता है तो यह जातक के लिए राजयोग होता है। कुंडली में केतु के बली होने से जातक के पैर मजबूत होते हैं जबकि अशुभ, पीड़ित या कमजोर होने पर व्यक्ति को पैरों में दर्द, कमजोरी की शिकायत बनी रहती है।
ज्योतिष में केतु को अध्यात्म, वैराग्य, मोक्ष, गूढ़ विज्ञान और तांत्रिक विद्या का कारक माना जाता है। वर्तमान में केतु ग्रह वृश्चिक राशि में स्थित है और इस साल यह इसी राशि में रहेगा। हालांकि जून में केतु नक्षत्र परिवर्तन करेंगे। इस समय केतु ज्येष्ठा नक्षत्र में हैं, जो बुध ग्रह का नक्षत्र है और 2 जून को केतु अनुराधा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे जिसके स्वामी शनिदेव हैं। केतु के इस नक्षत्र परिवर्तन का सभी 12 राशियों पर शुभ-अशुभ प्रभाव पड़ेगा।
मेष राशि
आपको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। मानसिक तनाव रह सकता है। शारीरिक कष्ट हो सकता है। ध्यान रहे, नए वर्ष में आपको चोट भी लग सकती है। ऐसे में आपको सावधान रहने की सलाह दी जाती है। वाहन सावधानी पूर्वक चलाएं और सेहत से जुड़ी समस्या को गंभीरता से लें।
वृष राशि
जब केतु ज्येष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करेगा, उस समय आपको प्रेम जीवन में अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। उच्च शिक्षा में कामयाबी मिलेगी। वहीं अनुराधा नक्षत्र में जानें से समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ सकता है। अपनी सेहत ध्यान रखें। आपको पैरों में दर्द की शिकायत रह सकती है।
मिथुन राशि
आपको अपने जीवन में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। सेहत को लेकर ध्यान रखना होगा। हालांकि अगर कोर्ट कचहरी में आप किसी केस का सामना कर रहे हैं तो उसका फैसला आपके हक में आ सकता है। प्रतियोगी परीक्षा के लिए समय अच्छा गुजरेगा।
कर्क राशि
आपकी संतान को कष्ट का सामना करना पड़ सकता है। सफलता पाने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ेगी। भाग्य के भरोसे न बैठें। शत्रु आपके ऊपर हावी होने का प्रयास करेंगे और आपको स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानी का भी सामना करना पड़ सकता है।