शनिदेव न्याय के देवता हैं। ये बुरे कर्म करने वाले लोगों को दंडित करते हैं तो वहीं अच्छे कर्म करने वाले लोग इनकी शुभ दृष्टि के पात्र बनते हैं। शनिदेव जिस पर अपनी कृपा दृष्टि करते हैं उस व्यक्ति को हर कार्य में सफलता मिलती है। लेकिन शनि की वक्र दृष्टि से मनुष्य ही क्या देवताओं को भी भय लगता है। इसलिए सदैव अच्छे मार्ग पर चलते हुए अच्छे कर्म करने चाहिए। ज्योतिष में शनि की कृपा पाने के लिए कुछ उपाय बताए गए हैं जिनको करने से आप शनिदेव की कृपा पा सकते हैं।
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बड़ो का सम्मान करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं (प्रतीकात्मक तस्वीर)
शनि महाराज की कृपा पाने के लिए कभी भी किसी के साथ अन्याय न करें। अपने से बड़ों और बुजुर्गों का सदैव सम्मान करें। असहाय और कमजोर लोगों को न सताएं। गरीबों और जरुरत मंदों की सेवा करें। इससे शनिदेव आपसे प्रसन्न होंगे। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए आप कुछ अन्य उपाय भी कर सकते हैं। जिससे आप शनिदोष के कारण होने वाली परेशानियों से निजात पा सकते हैं।
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शनि की वक्र दृष्टि से बचने के लिए धारण करें लोहे का छल्ला (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
शनि की वक्रदृष्टि पड़ने से पारिवारिक जीवन और स्वास्थ्य से लेकर व्यापार तक में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इनकी वक्र दृष्टि से बचने के लिए हाथ में लोहे का छल्ला धारण करना चाहिए। लेकिन ये छल्ला आग में तपाकर न बनाया गया हो। किसी भी दिन छल्ला लाकर उसे रख दें और शनिवार के दिन प्रातःकाल के समय छल्ले को सरसों को तेल में डालकर रख दें। संध्या के समय छल्ले के तेल से निकाल कर गंगाजल से पवित्र करें। उसके बाद ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र के जाप के बाद इसे धारण। लेकिन शनिवार के दिन कभी भी लोहे से बनी चीजें खरीदकर घर में न लाएं।
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सरसों के तेल में छाया दान करनी चाहिए (प्रतीकात्मक तस्वीर)
शनिवार के दिन छायादान करना बहुत शुभ माना जाता है। किसी पात्र में सरसों का तेल लेकर उसमें रुपए का सिक्का डालकर अपने चेहरे का प्रतिबिंब तेल में देखें। उसके बाद उस तेल को दान कर दें। शनिवार के दिन तेल भी नहीं खरीदना चाहिए। इस दिन सरसों के तेल का दान किया जाता है।
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पीपल के वृक्ष की पूजा करें (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए काले तिल, सरसों के तेल, पुष्प और धूप आदि से शनिदेव की पूजा करनी चाहिए और काले रंग के वस्त्र अर्पित करने चाहिए। पूजा करते समय शनि के नामों का उच्चारण करना चाहिए। जब पूजा समाप्त हो जाए तो पीपल के वृक्ष की 7 परिक्रमा लगाकर शनि मंत्र का जाप करना चाहिए। लगातार 7 शनिवार तक निष्ठा पूर्वक यह उपाय करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं। शनिदोष से होने वाली परेशानियों से मुक्ति मिलती है।