इशरत जहां मामले पर सरकार गंभीर, बन सकता है जांच आयोग
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इशरत जहां मुठभेड़ मामले में केन्द्रीय गृहमंत्रालय के हलफनामे में बदलाव को लेकर सरकार जांच आयोग गठित कर सकती है। सूत्रों के अनुसार इस प्रकरण को लेकर हो रहे खुलासे को सरकार गंभीरता से ले रही है।
पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लई और अवर सचिव आरवीएस मणि के खुलासे पर संवेदनशील सरकार कानून मंत्रालय और एटार्नी जनरल से कानूनी राय ले रही है। बताते हैं इशरत जहां मुठभेड़ मामले को लेकर तत्कालीन गृहमंत्री शिवराज पाटील के समय में दाखिल हलफनामा और बाद में दाखिल हलफनामें में हुए बदलाव की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है।
बदले हुए हलनामें में केन्द्र सरकार ने इशरत जहां के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से संबंध वाले अंश को हटा दिया था। जबकि अगस्त 2009 के हलफनामें मे इशरत को लश्कर का आतंकी बताया गया था। इसको लेकर गृहमंत्रालय भी जांच कर रहा है।
बजट सत्र के समापन होगा आयोग का गठन
15 जून 2004 को गुजरात पुलिस की स्पेशल टीम ने इशरत जहां को जावेद शेख उर्फ प्राणेश पिल्लई और दो पाकिस्तानी जीशान जौहर और अहमद अलीराणा के साथ मुठभेड़ में मार गिराया था।
ऐसी खुफिया सूचना थी कि ये आतंकी तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की हत्या करना चाहते थे और इशरत जहां इस षडयंत्र में शामिल थी। बाद में इस प्रकरण में उच्चतम न्यायालय ने स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम का गठन कर दिया था और इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी थी।
सूत्र बताते हैं कि अभी संसद का बजट सत्र चल रहा है। इस दौरान सरकार मामले की जांच के लिए होमवर्क कर रही है। माना जा रहा है कि 17 मार्च को बजट सत्र के पहले चरण के समापन के बाद सरकार जांच आयोग का गठन कर सकती है।