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यूपी : सीएम दफ्तर के दो अफसरों पर घूस मांगने का आरोप लगाने वाले को हाईकोर्ट ने फटकारा

Sun, 27 Jun 2021 08:41 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Sun, 27 Jun 2021 08:41 PM IST
सार

याचिकाकर्ता ने जमीन बदलने के मामले में मुख्यमंत्री के तत्कालीन प्रमुख सचिव एसपी गोयल व विशेष सचिव शुभ्रान्त शुक्ल पर 25 लाख रुपए रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। 
 

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UP: High court reprimanded two officers of CM's office for demanding bribe
लखनऊ हाईकोर्ट

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सीएम दफ्तर के दो आला अफसरों पर घूस मांगने का आरोप लगाने वाले याची की कड़ी निंदा करते हुए सख्त  फ टकार लगाई है। साथ ही उसे भविष्य में सावधान रहने की चेतावनी भी दी है। याचिकाकर्ता ने जमीन बदलने के मामले में मुख्यमंत्री के तत्कालीन प्रमुख सचिव एसपी गोयल व विशेष सचिव शुभ्रान्त शुक्ल पर 25 लाख रुपए रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। 

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कोर्ट ने जब याची को इसकी पुष्टि के लिए अदालत में तलब किया तो उसने आरोप को बिना शर्त वापस ले लिया। इसपर कोर्ट ने उसके इस आचरण की तीव्र भर्त्सना करते हुए कहा कि इस आरोप को बिना शर्त वापस लिया गया माना जाएगा। दोनों आला अफसरों के तरफ  से पेश हुए अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही का कहना था कि न्यायहित में इस तरह के गम्भीर व बेबुनियाद आरोप लगाने की प्रवृत्ति पर सख्त अंकुश लगाया जाना चाहिए। क्योंकि ऐसे झूठे आरोपों से अधिकारियों समेत सरकार की छवि को ठेस पहुंचती है। लिहाजा ऐसे मामलों में कड़ी कारवाई होनी चाहिए।
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न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी और न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह की खंडपीठ ने यह फैसला अभिषेक गुप्ता की याचिका पर दिया। याची ने राजस्व विभाग के 8 जून 2018 के आदेश को चुनौती देकर उक्त दोनों अफसरों के खिलाफ  पेट्रोल पंप के लिए हरदोई के संडीला तहसील के रईसो गांव की सम्बंधित जमीन को बदलने के लिए 25 लाख रुपए रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। साथ ही इन अफ सरों के खिलाफ  कार्रवाई की गुजारिश की थी।
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अदालत ने अहम पदों वाले इन दोनों वरिष्ठ सरकारी अफसरों के खिलाफ  ऐसा गम्भीर आरोप लगाने के तरीके पर नाखुशी जाहिर की है। कोर्ट ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण कहा कि आरोप लगाने के बाद जब याची को इसे पुष्ट करने बुलाया गया तब उसने कहा कि वह इस आरोप पर जोर नहीं देना चाहता है और आरोप को बिनाशर्त वापस लिया गया माना जाए। इस टिप्पणी के साथ अदालत ने जमीन के मुद्दे पर याचिका को मंजूर कर लिया।

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