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जम्मू-कश्मीर डीडीसी चुनावः जम्हूरियत की जीत, लोकतंत्र की जड़ें होंगी मजबूत

Wed, 23 Dec 2020 04:51 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 23 Dec 2020 04:51 AM IST
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The victory of democracy in jammu kashmir after DDC elections
ddc election Jammu and Kashmir - फोटो : अमर उजाला

अनुच्छेद 370 हटने के बाद नए जम्मू-कश्मीर के पहले चुनाव में ताज किसी भी सिर सजे, लेकिन असली जीत जम्हूरियत की हुई है। प्रदेश में पहली बार हुए जिला विकास परिषद के चुनाव में जम्मू-कश्मीर की अवाम ने कई मिथक तोड़ दिए हैं। कश्मीर में आतंकियों एवं अलगाववादियों को दरकिनार कर लोगों ने बेखौफ होकर लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत किया है। अवाम ने जम्हूरियत पर मुहर लगाकर पाकिस्तान को करारा जवाब दिया है। जानकारों का मानना है कि डीडीसी चुनाव से प्रदेश में विधानसभा चुनाव का रास्ता भी साफ हुआ है।

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जिला विकास परिषद चुनाव के साथ ही जम्मू-कश्मीर में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू हो गई है। जिला विकास परिषद के माध्यम से केंद्र शासित प्रदेश में लोग अपने विकास का खाका खुद खींच सकेंगे। डीडीसी चुनाव में कई युवा जीतकर आए हैं। प्रदेश भर में डीडीसी की 280 सीटों पर 2178 उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे और करीब 30 लाख लोगों ने लोकतंत्र पर मुहर लगाई। आठ चरणों में हुए इस चुनाव में कुल 51.42 फीसदी मतदान रहा। आतंकवाद प्रभावित कश्मीर घाटी में विपरीत परिस्थितियों में करीब 40 फीसदी लोगों ने वोट डाले। 
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पिछले दो चुनावों की तुलना में यह दोगुना है। आतंकी खौफ के बीच बारिश-बर्फबारी में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग घाटी में लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए बूथों तक पहुंचे। पाकिस्तान की गोलीबारी से प्रभावित एलओसी से सटे पुंछ और राजोरी में रिकॉर्ड 80 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ। पाकिस्तान से सटे जम्मू संभाग के अन्य जिलों में भी बंपर वोटिंग कर लोगों ने बुलेट का जवाब बैलेट से दिया। 

केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू के प्रो. बच्चा बाबू का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में डीडीसी चुनाव कई मायनों में महत्वपूर्ण है। निश्चित रूप से इससे जम्हूरियत के प्रति लोगों की आस्था बढ़ती दिख रही है। साथ ही इससे लोकतंत्र की जड़े भी मजबूत होंगी। चाहे जम्मू हो या कश्मीर आम लोगों का निचले स्तर तक लोकतंत्र को मजबूत करने के प्रति उत्साह रहा।

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