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डूबते सूर्य को महिलाओं ने दिया अर्घ्य

Thu, 26 Oct 2017 11:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/औरैया
अमर उजाला ब्यूरो/औरैया Updated Thu, 26 Oct 2017 11:37 PM IST
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The setting sun gave women arghya
छठ पूजा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
छठ महापर्व पर गुरुवार की शाम व्रती महिलाओं ने अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य दिया। माना जाता है कि इस व्रत को करने वाली स्त्रियां धन धान्य, पति-पुत्र तथा सुख समृद्धि से परिपूर्ण रहती हैं।
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गुरुवार की शाम अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देने से पहले महिला पुरुष एवं बच्चे सोहर गाते हुए नदी पोखर किनारे पहुंचे। बांस के बहंगी, बहंगी लचकत जाय, भरिहवा जै होउं कवनरम, भार घाटे पहुंचाय, बाटै जै पूछेले बटोहिया ई भार कैकरै घरै जाय आंख तोरे फूटै रे बटोहिया जंगरा लागै तोरे घूम, सोहर गाए।
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24 नवंबर को नहाय खाय एवं अगले दिन लोहंडा एवं खरना (छोटी छठ) के साथ प्रारंभ हुए छठ महापर्व के तीसरे दिन गुरुवार को डाला छठ की शाम गेल गांव के तरणताल के किनारे, एनटीपीसी बंबा के किनारे एवं दिबियापुर में नहर किनारे महिलाएं अपने परिजनों के साथ गीत गाती पहुंचीं। यहां पहले छठी मइया की पूजा की। इसके बाद पानी में घुटनों तक खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। शुक्रवार की सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर महिलाएं अपना व्रत पूरा करेंगी।
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किंवदंतियों के अनुसार, छठ पूजा का प्रारंभ महाभारत काल में कुंती द्वारा सूर्य की आराधना व पुत्र कर्ण के जन्म के समय से हुआ था। मान्यता है कि छठ देवी सूर्य देव की बहन हैं और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए जीवन के महत्वपूर्ण अवयवों में सूर्य व जल की महत्ता को मानते हुए भगवान सूर्य की आराधना तथा उनका धन्यवाद करते हुए मां गंगा-यमुना या किसी भी पवित्र नदी या पोखर (तालाब) के किनारे यह पूजा की जाती है।
इस व्रत को करने वाली महिलाएं पंचमी को एक बार नमक रहित भोजन करती हैं, षष्ठी को निर्जला व्रत के बाद अस्त होते हुए सूर्य को विधिपूर्वक पूजा करके अर्घ्य देती हैं। सप्तमी को ऊषाकाल में नदी या तालाब पर जाकर स्नान करती हैं और सूर्योदय होते ही अर्घ्य देकर जल ग्रहण करके व्रत पारायण करती हैं।
दिबियापुर में नहर किनारे स्थित छठ मैया पूजा स्थल पर नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी अजय कुमार के निर्देश पर पहली बार साफ सफाई कराई गई। वहीं, कलई चूना डालकर आस्थावानों को राहत देने का प्रयास किया गया। यहां बता दें कि पिछले वर्षों में कभी भी पूजा स्थल की सफाई नहीं हुई।
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