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खीरीः पत्रकार रमन का शव चौराहे पर रखकर परिजन ने लगाया जाम

Tue, 05 Oct 2021 01:22 AM IST
पवन चंद्रा अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली Published by: पवन चंद्रा Updated Tue, 05 Oct 2021 01:22 AM IST
सार

सोमवार को पत्रकार रमन कश्यप का शव पोस्टमार्टम के बाद जब निघासन पहुंचा तो परिजन के साथ सपा कार्यकर्ताओं, व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों ने चौराहे पर शव रख कर जाम लगा दिया। इससे क्षेत्र में लंबा जाम लग गया।
 

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The family jammed by placing the body of journalist Raman at the crossroads
मदन के परिजन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तिकुनिया कांड की कवरेज करने गए निघासन कस्बे के एक युवा पत्रकार की भी मौत हुई है। सोमवार को पत्रकार रमन कश्यप का शव पोस्टमार्टम के बाद जब निघासन पहुंचा तो परिजन के साथ सपा कार्यकर्ताओं, व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों ने चौराहे पर शव रख कर जाम लगा दिया। इससे क्षेत्र में लंबा जाम लग गया।

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रमन के भाई पवन ने बताया कि रविवार को जब तिकुनिया में प्रदर्शनकारी किसानों की बाइट ले रहे थे, उसी समय किसानों पर चढ़ी गाड़ियों की चपेट में आकर रमन गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस उन्हें शव वाहन में लेकर लखीमपुर चली गई। लखीमपुर जिला अस्पताल में उनके मौत की पुष्टि की गई। रात में ही उनका पोस्टमार्टम किया गया। साथ ही उनकी पहचान निघासन निवासी पत्रकार रमन कश्यप के रूप में की गई। 
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रविवार को रमन का शव पोस्टमार्टम के बाद जब निघासन पहुंचा तो सपा नेता हिमांशु पटेल, अशोक कश्यप और मनोज वर्मा के नेतृत्व में कस्बे के व्यापारियों, स्थानीय नागरिकों और सपा कार्यकर्ताओं ने सोमवार को शव चौराहे पर रखकर जाम लगा दिया।
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जाम की सूचना पर पहुंचे सीडीओ अनिल कुमार सिंह, एएसपी अरुण कुमार सिंह, एएसपी लखनऊ अरविंद पांडेय और प्रभारी निरीक्षक वीके सिंह ने प्रदर्शनकारियों को काफी समझाने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी शव हटाने को तैयार नहीं हुए। कई घंटे तक चले धरना प्रदर्शन से पलिया रोड, तिकुनिया रोड और धौरहरा रोड पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। 

बाद में एसडीएम निघासन ओपी गुप्ता ने सरकार की ओर से मृतक आश्रित को 45 लाख रुपया मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को योग्यतानुसार सरकारी नौकरी देने का एलान किया। तब जाकर धरना प्रदर्शन खत्म हुआ और जाम खुल सका। बाद में कड़ी सुरक्षा के बीच अंतिम संस्कार कर दिया गया। यहां बता दें कि रमन के परिवार में पत्नी अनुराधा, बेटी वैष्णवी (11), बेटा अभिनव (ढाई साल) के अलावा पिता राम दुलारे और मां संतोष कुमारी हैं। 

परिजन का आरोप घायल रमन को भाजपा नेता ने मारी थी गोली 

तिकुनिया कांड में हादसे का शिकार हुए रमन कश्यप के परिजन का आरोप है कि भाजपा नेता की गाड़ी से टकराकर घायल होने के बाद जब रमन ने वहां से हटने की कोशिश की तो एक भाजपा नेता ने उन्हें गोली मार दी, जो उनकी बांह में लगी और वह बेहोश हो गए। बाद में उन्हें शव वाहन से लखीमपुर खीरी ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। परिजन और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, रविवार को तिकुनिया की सड़कों पर हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारियों की भीड़ थी, बावजूद इसके भाजपा नेता अपनी गाड़ियों को 80-90 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ा रहे थे।

बताते हैं कि रमन कश्यप दूसरी गाड़ी की चपेट में आकर घायल हुए थे। घायल होने के बाद जब उन्होंने वहां से हटने की कोशिश की तो एक भाजपा नेता ने उन्हें गोली मार दी, जो उसकी बांह में लगी। इसके बाद वह गिरकर बेहोश हो गए। बाद में उनकी मौत हो गई। मृतक के भाई पवन ने बताया कि घायल रमन को एंबुलेंस से अस्पताल ले जाने के बजाय उन्हें शव वाहन से लखीमपुर ले जाया गया। पवन ने कहा कि तिकुनिया पुलिस की यह संवेदनहीनता निंदनीय है। इसकी भी जांच होनी चाहिए। उधर, पूर्व विधायक आरएस कुशवाहा ने अपनी ओर से सभी मृतक के परिवारों को 25-25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। संवाद

किसानों ने निघासन में गृह राज्यमंत्री की होर्डिंग फाड़ीं

जिस वक्त पत्रकार रमन कश्यप का शव अंत्येष्टि के लिए ले जाया जा रहा था उसी समय किसानों का एक जत्था निघासन पहुंचा और वहां गृह राज्यमंत्री की लगी सभी होर्डिंग्स को फाड़कर नष्ट कर दिया। कस्बे में तैनात पुलिस ने किसानों को रोकने की कोशिश की, लेकिन किसानों के गुस्से के आगे उनकी एक न चली। संवाद

दिनभर की बैचेनी के बाद रात में टूटा मुसीबतों को पहाड़

पत्रकार रमन कश्यप अपने मां बाप का लाडला था और उसे पत्रकारिता का शौक था। इसी पत्रकारिता ने उसकी जान लेली। वह अपने पीछे बूढ़े माता पिता के अलावा पत्नी और दो मासूम बच्चों को रोता बिलखता छोड़ गया है।
मृतक रमन के पिता रामदुलारे ने बताया कि रमन रविवार की सुबह करीब साढ़े 10 बजे घर से बिना कुछ खाए पीए केवल चाय पीकर निकला था। जब उसकी मां ने कहा कि नाश्ता करके जाओ तो उसने कहा कि उसे काम पर जाने के लिए देर हो जाएगी। इसलिए वह लौटकर खाना खाएगा। तब उन्हें क्या पता था कि उनका बेटा लौटकर नहीं आएगा। वे लोग दिनभर उसका इंतजार करते रहे। लेकिन रात होने के बाद भी वह घर नहीं लौटा। रात करीब साढ़े तीन बजे एसडीएम निघासन ओपी गुप्ता ने रमन की मौत की सूचना परिवार वालों को दी। सूचना मिलते ही परिजन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा । एक दिन पहले हंसता मुस्काराता चेहरा लेकर तिकुनिया गए रमन कश्यप का शव जब वापस आया तो उसकी पत्नी गश खाकर गिर पड़ी। कुछ महीने पहले ही वह एक इलैक्ट्रॉनिक चैनल का पत्रकार बना था। यही पत्रकारिता उसकी मौत का कारण बन गई। 


रमन की मां संतोषी कुमारी, पत्नी आराधना और 11 वर्षीय बेटी वैष्णवी का रो रोकर बुरा हाल है। ढाई साल के मासूम बेटे को यह भी नहीं पता कि अब उसके पापा इस दुनिया में नहीं हैं।

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