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डॉ. संदीप ने पाया वो मुकाम कि आप भी करेंगे सलाम
ब्यूरो/अमर उजाला, मंडी
Updated Tue, 07 Jul 2015 11:14 AM IST
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आंखों की रोशनी के बिना ही संदीप ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से इतिहास में पीएचडी की डिग्री हासिल की है। वर्ष 1997 में ब्रेन टीवी के कारण डा. संदीप अपनी आंखों की 75 फीसदी रोशनी खो चुके हैं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और बहन की ओर से पाठ्यक्रम को कैसेट में रिकॉर्ड करवाने के बाद उसे सुनकर अपनी पढ़ाई पूरी की। डा. संदीप सुंदरनगर के चांबी क्षेत्र से संबंध रखते हैं।
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वर्तमान में डा. संदीप सिंह राघव राजकीय महाविद्यालय जुखाला में इतिहास के सहायक प्रोफेसर हैं। डा. संदीप ने 75 फीसदी आंखों को रोशनी जाने के बावजूद पढ़ाई को बरकरार रखते हुए पीएचडी की डिग्री हासिल की और दूसरों के लिए प्रेरणा स्रोत बने। डा. संदीप नेट और सेट भी पास कर चुके हैं। वर्ष 1997 में जब संदीप जमा एक में पढ़ रहे थे तो उन्हें ब्रेन टीवी होने के कारण उनकी 75 फीसदी आंखों की रोशनी चली गई।
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करीब दो वर्ष तक वे घर में रहे। इस बीच संजौली स्कूल में ब्लाइंड टीचर डा. दाता राम शर्मा उनके जीवन में आशा की किरण बने। उनसे मिलने के बाद संदीप ने अपनी पढ़ाई जारी की। बहन की ओर से पाठ्यक्रम कैसेट में रिकॉर्ड करने के बाद संदीप उसे सुनकर याद कर परीक्षा देते थे। हिमाचल प्रदेश विवि से अगस्त 2014 को उन्होंने पीएचडी पूरी की और नौ जून 2015 को उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की हाथों से डिग्री प्राप्त की।
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डा. संदीप अब तक कई अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय सेमिनारों में अपने-अपने पेपर प्रेजेंट कर चुके हैं। उनका एक रिसर्च पेपर अंतरराष्ट्रीय जर्नल में भी प्रकाशित हो चुका है। सिनेमा एंड सोसायटी किताब में संदीप का लेख प्रकाशित हो चुका है। डा. संदीप सिंह राघव ने बताया कि डा. दाता राम शर्मा उनकी जिंदगी में एक आशा की किरण बनकर आए।
भाई-बहन, दोस्तों, सुपरवाइजर डा. चेतन और उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव के सहयोग से पीएचडी की डिग्री हासिल कर पाया हूं। इनके सहयोग के बिना इस मुकाम तक पहुंचना मेरे लिया असंभव था।