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Delhi: छत से गिरकर टूटी रीढ़ की हड्डी या नारियल के पेड़ से, इसका डाटा होगा तैयार, सही इलाज में मिलेगी मदद

Sat, 10 Dec 2022 08:38 AM IST
चमन शर्मा राकेश शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राकेश शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: चमन शर्मा Updated Sat, 10 Dec 2022 08:38 AM IST
सार

रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि देशभर में रीढ़ की हड्डी टूटने के सही आंकड़े मिलते हैं, तो उसके आधार पर इलाज की विधि, प्राथमिक उपचार व बचाव की रणनीति बनाई जा सकेगी। देश में अभी स्पाइनल कॉर्ड को लेकर कोई नीति नहीं है।

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Spinal cord society prepare data from broken spine falling from roof or coconut tree
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock

विस्तार

देश में रीढ़ की हड्डी टूटने पर उपचार के लिए अब भटकने की जरूरत नहीं होगी। स्पाइनल कॉर्ड सोसाइटी ऐसे मामलों का डाटा तैयार कर रही है। इसकी मदद से मरीज को चोट की प्रकृति के हिसाब से सटीक इलाज देना मुमकिन हो सकेगा। अगर कोई छत से गिरता है, तो उसको एक इलाज मिलेगा और कैंसर से हड्डी टूटती है तो उसे दूसरा।

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स्पाइनल कॉर्ड सोसाइटी और इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर के 22वें अंतर्राष्ट्रीय स्पाइन और स्पाइनल इंजरी कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों के बीच इस पर सहमति बनी है। सोसाइटी ने अपनी रिपोर्ट बनाकर केंद्र सरकार को भेजी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि देशभर में रीढ़ की हड्डी टूटने के सही आंकड़े मिलते हैं, तो उसके आधार पर इलाज की विधि, प्राथमिक उपचार व बचाव की रणनीति बनाई जा सकेगी। देश में अभी स्पाइनल कॉर्ड को लेकर कोई नीति नहीं है।
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सम्मेलन में आए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, दिल्ली के डॉ. संजय वधवा ने कहा कि देश में सबसे ज्यादा रीढ़ की हड्डी ऊंचाई से गिरने से टूटती है। देखा गया है कि दक्षिण भारत में नारियल के पेड़ से और उत्तर भारत में छत से गिरने के मामले ज्यादा आते हैं, लेकिन इसके बचाव को लेकर लोगों में जागरूकता नहीं है। यदि लोगों को पता होगा तो काफी मामले गंभीर होने से बच जाएंगे। इससे लोगों की जान भी बचेगी, साथ ही समस्याएं भी कम होंगी।

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स्पाइनल कॉर्ड सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. एचएस छाबड़ा ने कहा कि देशभर में ऐसे मामलों का केवल अनुमान ही लगाया जाता है। यदि दुर्घटना के समय स्पाइन कोड सेल को बचा लिया जाए तो मरीज जल्दी रिकवर कर सकता है, लेकिन देखा गया है कि लोग जानकारी के अभाव में सेल को डेड कर देते हैं, जो समस्या को बढ़ा देता है। विदेशों में इसे लेकर नीति है, यही कारण है कि वहां ऐसे मामलों में तुरंत उपचार मिल जाता है। एक अनुमान है कि हर साल 25 हजार मामले आते हैं, जबकि यह आंकड़ा काफी बड़ा हो सकता है।

ऐसे हो सकता है बचाव
सम्मेलन में दुनियाभर आए 600 से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों ने कहा कि दुर्घटना के स्थल पर यदि पीड़ित के पीठ को मोड़े बिना उठाया जाता है, तो रीढ़ की हड्डी में होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। कई बार दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी में नुकसान कम होता है, लेकिन उसे उठाकर लाने में नुकसान हो जाता है। यदि उसे सही से अस्पताल तक पहुंचाया जाता है, तो मरीज की समस्या कम हो सकती है। रीढ़ में चोट के कारण मौत तक भी हो जाती है।

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