{"_id":"3b60a78fe54c64f968c6c40bf68422a8","slug":"sp-leaders-becam-panchayat-in-police-station-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सपा नेताओं की थाने में ‘पंचायत’","category":{"title":"City and States Archives","title_hn":"शहर और राज्य आर्काइव","slug":"city-and-states-archives"}}
सपा नेताओं की थाने में ‘पंचायत’
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Fri, 06 Feb 2015 02:17 AM IST
विज्ञापन
नौकरी दिलाने के नाम पर दलित समुदाय के तीन व्यक्तियों से लाखों रुपये ऐंठकर सपा कार्यकर्ता ने पीड़ितों के खिलाफ ही थाना रकाबगंज में तहरीर दे दी। इतना ही नहीं दबाव बनाने के लिए गुरुवार को सपा नेताओं ने थाने में पंचायत की। मीडिया के पहुंचने पर पंचायत में खलल पड़ गया।
हुआ यूं कि रकाबगंज क्षेत्र निवासी दलित समाज के तीन लोगों ने नौकरी और बिजली का बिल ठीक कराने के लिए एक सपा कार्यकर्ता को लगभग ढाई लाख रुपये दिए थे। बताते हैं कि न तो नौकरी लगी और न ही बिजली के बिल ही ठीक हुए। इस पर तीनों लोगों ने तगादा शुरू कर दिया। कई माह तक मामला चलता रहा। दबाव पड़ने पर सपा कार्यकर्ता ने कुछ दिन पहले तीनों को अपने घर बुलाकर कंप्यूटर और लैपटाप आदि उठाकर दे दिए। कहा कि बतौर अमानत इन्हें रख लो। आरोप है कि इसके बाद कार्यकर्ता ने तीनों के खिलाफ थाना रकाबगंज में लूट की तहरीर दे दी। इसमें घर से साढ़े चार लाख रुपये का माल लूटने का आरोप लगाया। गुरुवार को इस मामले की पंचायत करने सपा जिलाध्यक्ष, शहर अध्यक्ष और अन्य सपा नेता थाना रकाबगंज पहुंचे। दोपहर को थाना परिसर में सपा नेताओं ने दलित समाज के तीनों पीड़ितों को समझौता करने का दबाव बनाया। पंचायत में सपा शहर अध्यक्ष इंस्पेक्टर की कुर्सी काबिज थे। पंचायत के दौरान ही मीडियाकर्मी पहुंच गए तो खलल पड़ गया। इंस्पेक्टर सतीशचंद्र यादव का कहना है कि कोई पंचायत नहीं हुई। सपा नेताओं को शिष्टाचारवश थाने आने पर बिठा लिया गया था।
पार्टी के कार्यक्रम की तैयारी के सिलसिले में जिलाध्यक्ष और मेयर के साथ रकाबगंज थाने के सामने से गुजर रहे थे। इंस्पेक्टर के आग्रह करने पर थाने में बैठ गए थे। किसी तरह की पंचायत नहीं हुई।
विज्ञापन
- फर्रुख सियर, सपा, शहर अध्यक्ष
विज्ञापन
हुआ यूं कि रकाबगंज क्षेत्र निवासी दलित समाज के तीन लोगों ने नौकरी और बिजली का बिल ठीक कराने के लिए एक सपा कार्यकर्ता को लगभग ढाई लाख रुपये दिए थे। बताते हैं कि न तो नौकरी लगी और न ही बिजली के बिल ही ठीक हुए। इस पर तीनों लोगों ने तगादा शुरू कर दिया। कई माह तक मामला चलता रहा। दबाव पड़ने पर सपा कार्यकर्ता ने कुछ दिन पहले तीनों को अपने घर बुलाकर कंप्यूटर और लैपटाप आदि उठाकर दे दिए। कहा कि बतौर अमानत इन्हें रख लो। आरोप है कि इसके बाद कार्यकर्ता ने तीनों के खिलाफ थाना रकाबगंज में लूट की तहरीर दे दी। इसमें घर से साढ़े चार लाख रुपये का माल लूटने का आरोप लगाया। गुरुवार को इस मामले की पंचायत करने सपा जिलाध्यक्ष, शहर अध्यक्ष और अन्य सपा नेता थाना रकाबगंज पहुंचे। दोपहर को थाना परिसर में सपा नेताओं ने दलित समाज के तीनों पीड़ितों को समझौता करने का दबाव बनाया। पंचायत में सपा शहर अध्यक्ष इंस्पेक्टर की कुर्सी काबिज थे। पंचायत के दौरान ही मीडियाकर्मी पहुंच गए तो खलल पड़ गया। इंस्पेक्टर सतीशचंद्र यादव का कहना है कि कोई पंचायत नहीं हुई। सपा नेताओं को शिष्टाचारवश थाने आने पर बिठा लिया गया था।
विज्ञापन
पार्टी के कार्यक्रम की तैयारी के सिलसिले में जिलाध्यक्ष और मेयर के साथ रकाबगंज थाने के सामने से गुजर रहे थे। इंस्पेक्टर के आग्रह करने पर थाने में बैठ गए थे। किसी तरह की पंचायत नहीं हुई।
विज्ञापन
- फर्रुख सियर, सपा, शहर अध्यक्ष