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Hindi News ›   News Archives ›   City and States Archives ›   SP city president and the team's farewell

सपा शहर अध्यक्ष और टीम की विदाई

Sun, 07 Jun 2015 01:58 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
ब्यूरो, अमर उजाला Updated Sun, 07 Jun 2015 01:58 AM IST
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समाजवादी पार्टी के महानगर संगठन में चल रही रार का अंत शहर अध्यक्ष और उनकी टीम की विदाई से हुआ है। पार्टी कमान ने पांच जून को महानगर अध्यक्ष को पद से हटाकर उनकी कार्यकारिणी को भंग कर दिया है। इससे उनके विरोधियों में जश्न का माहौल है तो समर्थकों में मायूसी।
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गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी का महानगर संगठन दो गुटों में बंट चुका था। पदाधिकारियों में वर्चस्व की जंग छिड़ गई थी। कुछ पदाधिकारी तो महानगर अध्यक्ष के साथ काम नहीं करने की बात पार्टी कार्यालय पर लिखित में दे आए थे। इसके बाद पार्टी हाईकमान इन सभी पदाधिकारियों को हटा दिया था।
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शहर अध्यक्ष की सिफारिश पर नई कार्यकारिणी बनी। इस फैसले के बाद गोपनीय जांच कमेटी भी गठित कर दी गई थी। कमेटी के सदस्यों ने पूर्व विधायक, सांसद और वरिष्ठ पदाधिकारियों से शहर अध्यक्ष और पदाधिकारियों के बीच के झगड़े और शहर अध्यक्ष के व्यवहार की पड़ताल की। रायशुमारी के बाद अंतत: पांच जून को फर्रुख सियर और उनकी टीम को विदा कर दिया। छह जून को प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव का फैक्स आ गया।  
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इनबाक्स...
विवादों से रहा फर्रुख सियर का नाता
समाजवादी पार्टी ने वाजिद निसार को हटाकर फर्रुख सियर को शहर की कमान सौंपी थी। फर्रुख सियर की ताजपोशी पर लोगों ने कहा था कि पार्टी ने उदारवादी, मेहनती और ईमानदार कार्यकर्ता को सम्मान दिया है। कुर्सी मिलते ही फर्रुख सियर विवादों में रहने लगे। उनके अध्यक्ष बनने के बाद बयानबाजी के चलते पार्टी में दो फाड़ हो गए। उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के खिलाफ ही उल्टे सीधे बयान दिए। अनुभवहीन सलाहकारों की राय पर उन्होंने कई काम ऐसे किए, जिससे उनकी किरकरी हो गई। साथियों ने आरोप लगाना शुरू कर दिया कि पार्टी के कार्यों को गंभीरता से नहीं लेते हैं। इस पर उन्होंने अपनों से झगड़े मोल लेने शुरू कर दिया। यही वजह रही कि उन्होंने पदाधिकारियों के नाम की लिस्ट बदल-बदल कर दो महीने में पांच बार भेजी थी।
इनबाक्स...
ले डूबा एसएन मेडिकल कालेज प्रकरण
अपने करीब 10 माह के कार्यकाल में फर्रुख सियर विवादों से घिरे रहे लेकिन सेंट एंथनी स्कूल में हंगामा करने पर उनकी साख खराब हो गई। स्थानीय अधिकारियों ने भी इस मामले को गंभीरता लिया और उनके खिलाफ रिपोर्ट लखनऊ भेजी गई। हाल में ही एसएन मेडिकल कालेज में स्थित धार्मिक स्थल प्रकरण पर भी उनकी भूमिका को लेकर काफी चर्चाएं हुईं। प्रशासन भी प्रकरण में उनके साथ नहीं था। पार्टी के सदस्यों ने भी उनके खिलाफ रिपोर्ट भेज दी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि विवाद तो बहुत थे, लेकिन एसएन मेडिकल कालेज प्रकरण ने घड़े को गले तक भर दिया था।
‘निष्ठावान कार्यकर्ताओं की जीत’
शहर अध्यक्ष बनने के बाद फर्रुख सियर ने धर्मेंद्र यादव, मुनेंद्र जादौन, क्षमा जैन सक्सेना को शहर कार्यकारिणी में स्थान दिलाया था। कुछ ही दिनों बाद कुछ ऐसा हुआ कि तीनों पदाधिकारियों के अलावा तीनों विधानसभा अध्यक्षों की उन्होंने छुट्टी करा दी। हाल ही में नई कार्यकारिणी गठित करवा लाए। मुनेंद्र जादौन ने बताया कि हमने नेतृत्व के समक्ष अपना पक्ष रखा था और मामले की जांच कराने को कहा था। जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो गया है। पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं की जीत हुई है।

इनबाक्स...
सक्रिय हो गए नए दावेदार
फर्रुख सियर की विदाई के साथ ही शहर अध्यक्ष के पद के नए दावेदार सक्रिय हो गए हैं। पार्टी सूत्रों की मानें तो इस दौड़ में पूर्व अध्यक्ष वाजिद निसार, पूर्व उपाध्यक्ष राहुल चतुर्वेदी, रहीसुद्दीन कुरैशी, चंद्रसेन टपलू, अतुल गर्ग आदि कई लोग हैं। फर्रुख सियर की टीम में रहे धर्मेंद्र यादव भी दावेदारी कर सकते हैं।
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