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Hindi News ›   Chandigarh ›   Social Worker Kuljit Singh Interview

दूसरे के बच्चों में अपने 'खून' का दर्द

Tue, 15 Jul 2014 03:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 15 Jul 2014 03:05 PM IST
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Social Worker Kuljit Singh Interview

सेक्टर-38 निवासी कुलजीत सिंह का बेटा करमवीर जब तीन महीने का था, तो उनके बेटे की तबियत बिगड़ गई। जांच में पता चला कि बेटे को थैलीसीमिया है। गंभीर बीमारी का नाम सुनते ही पूरा परिवार टूट सा गया, लेकिन उनका हौसला नहीं गिरा। वे अपने बेटे के साथ इस बीमारी से लड़ते रहे।

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हर माह वे अपने बच्चे के लिए खून का इंतजाम करने लगे। इस बीच उन्हें पता चला कि पीजीआई में थैलीसीमिया बच्चों के मदद के लिए एक एसोसिएशन बनी हुई है, जो बच्चों को हर संभव मदद मुहैया करवाती है। कुलजीत को दूसरे बच्चों की परेशानी भी अपने बेटे में दिखने लगी।
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भगवान पर भरोसा कर वे अपने बच्चे के इलाज के साथ-साथ दूसरे बच्चों की मदद के लिए एसोसिएशन के साथ जुड़ गए। पिछले साल उन्होंने अपने बच्चे का बोन मेरोट्रांसप्लांट के जरिए इलाज कराकर थैलीसीमिया से आजाद करवा दिया। अब उनका बेटा करमवीर ठीक  हो चुका है, लेकिन कुलजीत अब भी दूसरे बच्चों की मदद में करने में जुटे हुए हैं।
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ब्लड डोनेशन कैंप लगवाते
थैलेसीमिक चिल्ड्रन वेलफेयर एसोसिएशन हर साल पीड़ित बच्चों के लिए गर्मियों में सात ब्लड डोनेशन कैंप आयोजित करवाती है। इनमें से एक कैंप का खर्चा वहन कुलजीत सिंह करते हैं। इसके अलावा बाकी कैंपों में वे भरपूर सहयोग करते हैं। चाहे डोनर लाने का काम हो या फिर किसी तरह की मदद का।

कुलजीत का कहना है कि उनका बच्चा ठीक हो चुका है। अब वे दूसरे बच्चों की मदद करना चाहते हैं। उन्हें मालूम है कि ऐसे बच्चों को किस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने बताया कि थैलेसीमिक बच्चों का इलाज अब बोन मेरो ट्रांसप्लांट के जरिए संभव है। अपने बेटे करमवीर का ट्रांसप्लांट लुधियाना सीएमसी में करवाया है। अब भी लोग बोनमेरो ट्रांसप्लांट के लिए डरते हैं। इसलिए वे लोगों को अब इसके प्रति भी जागरूक कर रहे हैं।

बेटे ने रेगुलर ब्लड डोनेट के लिए लिया प्रण
कुलजीत के दूसरे बेटे मनसाहिब सिंह ने अपने सेल देकर करमवीर को बीमारी से छुटकारा दिलाया है। अपने पापा के नक्शे कदम पर चलते हुए उसने भी प्रण लिया है कि 18 साल होते ही वह ब्लड डोनेट करने लगेगा।


मनसाहिब अभी 14 साल का है। ट्रांसप्लांट में उसका एचएलए अपने भाई करमवीर के साथ मैच कर गया था। मनसाहिब को जब ट्रांसप्लांट के लिए बताया गया तो वह झट से तैयार हो गया।

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