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टॉपर बनना है तो ट्यूशन की जरूरत नहीं
टीम डिजीटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 14 Mar 2014 10:01 AM IST
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पीयू की छात्रा मनजोत कौर ने ओवर ऑल टॉपर रहने तक का सफर बिना ट्यूशन के तय किया है। हाल ही में पंजाब यूनिवर्सिटी के 63वें दीक्षांत समारोह में दो गोल्ड मेडल से नवाजी गई मनजोत कौर ने अपनी इस खुशी के पलों को साझा किया।
मनजोर कौर बताती हैं कि उन्हें ये गोल्ड मेडल एमएससी (केमिस्ट्री) के चौथे सेमेस्टर और एमएससी में ओवर ऑल टॉपर रहने पर मिले हैं। बीएससी में भी मुझे एक गोल्ड और एक सिल्वर मेडल से सम्मानित किया जा चुका है।
12वीं में मेरिट लिस्ट में भी शामिल रहीं मनजोत बताती हैं कि उन्होंने बिना ट्यूशन के यहां तक का सफर तय किया है। मनजोत प्रो. केएन सिंह और प्रो.परमजीत सिंह के निर्देशन में पीएचडी कर रही हैं।
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मनजोत अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां सुदेश कुमारी और पिता सोहन सिंह को मानती हैं। उन्हें खाली समय में म्यूजिक सुनना पसंद है। वह मूल रूप से कुरुक्षेत्र के कोहलापुर गांव की रहने वाली हैं।
देश की लड़कियों को सशक्त बनाने की दिशा में सोचते हुए मनजोत कहती हैं कि लड़कियों को सशक्त और मजबूत बनने में उनके अभिभावक ही सहयोग कर सकते हैं।
शादी से पहले तक ही एक लड़की को अपने कैरियर को संवारना होता है। शादी के पहले तक लड़की अपने अभिभावकों की छाया में ही रहती है।
ऐसे में अभिभावकों को चाहिए कि वे अपनी बेटियों को पढ़ाएं और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने में सहयोग करें। पढ़ाई से ही लड़कियों का जीवन बेहतर होगा। पढ़ाई से ही बेहतर समाज का निर्माण होगा।
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मनजोर कौर बताती हैं कि उन्हें ये गोल्ड मेडल एमएससी (केमिस्ट्री) के चौथे सेमेस्टर और एमएससी में ओवर ऑल टॉपर रहने पर मिले हैं। बीएससी में भी मुझे एक गोल्ड और एक सिल्वर मेडल से सम्मानित किया जा चुका है।
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12वीं में मेरिट लिस्ट में भी शामिल रहीं मनजोत बताती हैं कि उन्होंने बिना ट्यूशन के यहां तक का सफर तय किया है। मनजोत प्रो. केएन सिंह और प्रो.परमजीत सिंह के निर्देशन में पीएचडी कर रही हैं।
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मनजोत अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां सुदेश कुमारी और पिता सोहन सिंह को मानती हैं। उन्हें खाली समय में म्यूजिक सुनना पसंद है। वह मूल रूप से कुरुक्षेत्र के कोहलापुर गांव की रहने वाली हैं।
देश की लड़कियों को सशक्त बनाने की दिशा में सोचते हुए मनजोत कहती हैं कि लड़कियों को सशक्त और मजबूत बनने में उनके अभिभावक ही सहयोग कर सकते हैं।
शादी से पहले तक ही एक लड़की को अपने कैरियर को संवारना होता है। शादी के पहले तक लड़की अपने अभिभावकों की छाया में ही रहती है।
ऐसे में अभिभावकों को चाहिए कि वे अपनी बेटियों को पढ़ाएं और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने में सहयोग करें। पढ़ाई से ही लड़कियों का जीवन बेहतर होगा। पढ़ाई से ही बेहतर समाज का निर्माण होगा।