फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   physically disable vrinda qualify IIT test

वृंदा का ये सक्सेस मंत्र आपको भी दिलाएगा बड़ा मुकाम

Tue, 01 Jul 2014 02:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Tue, 01 Jul 2014 02:42 PM IST
विज्ञापन
physically disable vrinda qualify IIT test

अगर हौसले बुलंद हों तो कठिन से कठिन राह भी आसान हो जाती है। फिर चाहे कितनी भी बाधाएं क्यों न आएं, मंजिल अपने आप पास आती जाती है। जी हां, ऐसा ही कुछ कारनामा डीएवी लक्कड़ बाजार की वृंदा ने कर दिखाया है।

विज्ञापन


जन्म से शारीरिक अक्षमता और स्वास्थ्य से संबंधित कई समस्याओं के बावजूद वृंदा ने आईआईटी (जेईई मेन) की राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में 87वां रैंक हासिल किया है। वह कंप्यूटर इंजीनियर बनना चाहती हैं।
विज्ञापन


ऑर्थो, यूरोलॉजी, न्यूरो की स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं से घिरीं वृंदा और उनकी मां छवि ने कभी हिम्मत नहीं हारी। स्कूल की हर गतिविधि में अव्वल रहीं वृंदा शारीरिक प्रतियोगिताओं को छोड़ हर क्षेत्र में अव्वल रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


मूलतया गाजियाबाद की वृंदा ने दसवीं में 10 सीजीपीए और 12वीं की परीक्षा बीमार और स्कूल से गैर हाजिर रहने के बावजूद 88 फीसदी अंकों के साथ पास की। शारीरिक अपंगता के कारण वृंदा को स्कूल आने-जाने की समस्या होती थी। इसका डटकर मुकाबला किया। उन्हें अपनी मेहनत पर पूरा भरोसा है।

यह है वृंदा की सफलता का मंत्र

वृंदा बचपन में मां की ओर से बताई लाइनों डू यूअर बेस्ट, वेरी बेस्ट एंड डू इट एवरी डे ... को अपनी सफलता का मंत्र मानती हैं। कहती हैं आज वह जो कुछ हैं, मां छवि और पिता मनोज कौशिक की बदौलत है।

उन्होंने हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। क्लास मेट और स्कूल ने पूरा साथ दिया। मांगने से पहले माता-पिता ने सब दिया। स्कूल प्रधानाचार्या कामना बैरी और स्टाफ ने पूरा सहयोग दिया।


तिब्बितयन स्कूल में शिक्षिका हैं मां

वृंदा की माता छवि शर्मा सेंट्रल तिब्बितयन स्कूल में शिक्षिका हैं। उन्होंने बताया कि बेटी जब ढाई साल में अपने पांव पर खड़ी हुई तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इसकी खातिर बीएड की। 12 साल से शिक्षण कार्य कर रही हैं। छवि और मनोज कौशिक कहते हैं कि उन्हें वृंदा की चिंता नहीं है। चार भाई-बहनों में छवि ने अपनी मेहनत से उनकी उम्मीदों से कहीं अधिक परिणाम दिए हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed