इस साल मिलेगा शहर को एक और ट्रॉमा सेंटर
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सड़क दुर्घटना या दूसरे गंभीर मरीजों को राहत देने के लिए बन रहे
हमारी कोशिश है कि साल के अंत तक इसमें मरीजों की भर्ती शुरू कर दी जाए। इसे जल्द से जल्द शुरू कराने के लिए संस्थान की गवर्निंग बॉडी की बैठक भी बुला ली गई है।
रायबरेली रोड पर बने रहे ट्रॉमा सेंटर स्टाफ से लेकर दूसरे संसाधन की समस्या के चलते शुरू नहीं हो सका। मरीजों की सुविधा को देखते हुए राज्य सरकार भी इसे शुरू करने के लिए प्रतिबद्ध दिख रही है।
मुख्य सचिव के साथ बैठक में अनुमति मिलने के बाद अब शुरू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ट्रॉमा सेंटर के लिए नए पदों का सृजन कर लिया जाएगा। इन पदों पर भर्ती के बाद ट्रॉमा सेंटर को शुरू कर दिया जाएगा।
इससे केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर पर बोझ कम करने में भी मदद मिलेगी। गंभीर बीमारियों से जूझने वाले मरीजों की भर्ती के लिए एसजीपीजीआई की स्थापना की गई थी।
इसे रेफरल सेंटर बनाए रखने के लिए सारे प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन, बिहार और मध्यप्रदेश तक पीजीआई के स्तर के चिकित्सा संस्थान न होने से मरीज हमारे यहां पहुंचते हैं। इनको इलाज उपलब्ध कराने की कोशिश भी की जा रही है।
500 बेड का नया अस्पताल
मरीजों को बोझ को देखते हुए पीजीआई ने वित्त आयोग से 500 बेड के नए अस्पताल की अनुमति मांगी है। इसकी अनुमति मिलने के बाद इस अस्पताल के निर्माण का काम शुरू कर दिया जाएगा। बेड बढ़ाने का प्रस्ताव संस्थान ने पास कर आयोग को भेज दिया है।
एनीस्थिसीया में डीएम कोर्स
क्रिटिकल
केयर और दूसरी विधाओं की पढ़ाई के बाद अब एडवांस एनीस्थिसीया में डीएम
कोर्स एसजीपीजीआई में शुरू किया जाएगा। इलाज को बेहतर बनाए जाने के लिए
एनिस्थिसीया में पढ़ाई को आधुनिक बनाए जाने की जरूरत है।
इसके अलावा
इमरजेंसी मेडिसिन का एक विभाग इस विधा में आधुनिक चिकित्सा उपलब्ध कराने के
लिए शुरू किया गया है। पीजीआई जल्द ही इसमें नए कोर्स और सुविधाएं
जोड़ेगा।
आंखों की बीमारी को लेकर आधुनिक चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए
एडवांस सेंटर ऑफ ऑफथेलमेलॉजी की स्थापना की जा चुकी है।