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काम मिल जाए तो क्यों छोड़ें अपना शहर?
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sun, 21 Dec 2014 07:55 PM IST
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अमर उजाला के लिए 'हंसा रिसर्च' की ओर से किए गए सर्वे में लोगों ने जो राय दी उसके अनुसार 84 फीसदी लोग नहीं चाहते कि वे अपना शहर छोड़ें। शर्त बस इतनी सी है कि एक अच्छा रोजगार अपने ही शहर में मिल जाए।
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काम उनकी काबिलियत के अनुरूप हो और तनख्वाह उनके काम के हिसाब से। सर्वे में सिर्फ नौ फीसदी लोगों ने कहा कि अच्छा रोजगार मिलने के बावजूद यह मुश्किल है कि वे अपने शहर में ठहरें। जबकि सात प्रतिशत लोगों का कहना था कि इस बारे में उनका कोई निश्चित मत नहीं है।
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शहरों के लिहाज से देखें तो बरेली, कानपुर, इलाहाबाद और अलीगढ़ में ज्यादातर लोगों ने कहा कि अच्छा रोजगार मिल जाए तो वे अपना शहर नहीं छोड़ेंगे। बरेली में ऐसी राय रखने वालों की संख्या 99 फीसदी थी। जबकि अलीगढ़ में 97 फीसदी ने ऐसा कहा। कानपुर और इलाहाबाद में 95-95 फीसदी ने कहा कि अगर अच्छा रोजगार मिल जाए तो वे दूसरे शहर नहीं चाहेंगे।
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राजधानी लखनऊ, वाराणसी, मुराबादाबाद और झांसी में 83 से 88 फीसदी तक प्रतिभागियों ने कहा कि वह अपने शहर में ही रहना चाहते हैं। मेरठ और गोरखपुर में ऐसी राय रखने वालों की संख्या सबसे कम रही।
मेरठ में सिर्फ 62 फीसदी ने और गोरखपुर में 64 फीसदी ने कहा कि वे अपना शहर नहीं छोड़ना चाहते। मेरठ में तो सर्वाधिक 25 फीसदी लोगों ने कहा कि इस बात का सवाल ही नहीं है कि वे रोजगार के लिए अपने शहर में ठहरेंगे। जबकि गोरखपुर में ऐसी राय रखने वाले सिर्फ 10 फीसदी थे।
इन दोनों शहरों में जब लोगों से पूछा गया कि वे रोजगार के लिए अपना शहर क्यों छोड़ना चाहते हैं, तो मेरठ में 54 और गोरखपुर में 45 फीसदी लोगों ने कहा कि उनके अपने शहरों में रोजगार के ऐसे अवसर ही उपलब्ध नहीं हैं।
मेरठ में 12 फीसदी ने कम तनख्वाह को इसकी वजह बताया, तो गोरखपुर में 18 फीसदी लोगों ने कहा कि कम शिक्षित होने की वजह से उनके अनुरूप शहर में रोजगार मिलने में कठिनाई है।