{"_id":"fa056416fd5cf7063d1578a2e090195e","slug":"navneet-sikera-talks-on-women-safety","type":"story","status":"publish","title_hn":"'असल सुरक्षा तब, जब महिलाएं रात में बाहर निकलें'","category":{"title":"City and States Archives","title_hn":"शहर और राज्य आर्काइव","slug":"city-and-states-archives"}}
'असल सुरक्षा तब, जब महिलाएं रात में बाहर निकलें'
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sun, 26 Jan 2014 01:02 PM IST
विज्ञापन
महिलाओं की सुरक्षा सबसे अहम मुद्दा है। महिलाएं रात में अकेले सुरक्षित सड़क पर चल सकें तब सुरक्षा के मायने होंगे। वीमेन पावरलाइन ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया है।
विज्ञापन
अब सार्वजनिक वाहनों में सुरक्षा के उपाय किए जा रहे हैं। जल्द ही नई व्यवस्था लागू की जाएगी। इसमें हर ऑटो-टैक्सी ड्राइवर के पुलिस आई-कार्ड बनाए जाएंगे। पुलिस उन्हें यह परिचय पत्र देगी।
विज्ञापन
यह उन्हें वाहन के डैश-बोर्ड पर लगाना होगा, जिससे सभी को आसानी से दिख जाए। अगर कोई घटना होती है तो तत्काल ड्राइवर का नाम और गाड़ी नंबर देखकर लोग पुलिस को सूचना दे सकेंगे।
विज्ञापन
ड्राइवर का भी पूरा रिकॉर्ड पुलिस के पास होगा। ब्यौरा पुलिस के पास रहने की वजह से पहले ही ड्राइवरों के व्यवहार में सुधार आएगा। यदि कोई घटना होती भी है तो तत्काल उस ऑटो का पता चल सकेगा।
महिलाओं के साथ होने वाली घटनाओं में 90 प्रतिशत हमारा समाज भी जिम्मेदार है। हम लड़कियों को बोलने ही नहीं देते। यदि कोई छेड़खानी करता है तो वह जवाब नहीं देतीं। दरअसल, घर में उन्हें यही सिखाया गया है।
यदि वे जवाब दें तो काफी हद तक समस्या वहीं खत्म हो जाए। वह जवाब नहीं देतीं तो छेड़खानी करने वाले का दुस्साहस और बढ़ जाता है। वीमेन पावरलाइन ने सबसे बड़ा काम तो यही किया है कि वे यहां अपनी बात कह सकती हैं। अब छेड़खानी जैसे मुद्दे पर घर से लेकर स्कूल-कॉलेज तक चर्चा शुरू हुई है।
सिटी बसों में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत हिस्सा आरक्षित करने से भी काफी सुधार हुआ है। पहले कुछ सीटें आरक्षित रहती थीं। भीड़ भरी बस में महिलाओं का उन सीटों तक पहुंचना ही मुश्किल होता था।
अब वे आगे से चढ़ेंगी और आरक्षित सीटों पर बैठ सकेंगी। इतना ही नहीं, आरक्षित हिस्से में पुरुष खड़े होकर भी सफर नहीं कर सकेंगे। इसमें महिलाएं ही खड़ी होकर सफर कर सकेंगी। महिलाओं को उनके अधिकार दिए बिना कोई भी समाज आगे नहीं जा सकता।
प्रेशर हॉर्न के खिलाफ अभियान
हमने लाल-नीली बत्तियों के खिलाफ अभियान चलाया। उसका काफी असर हुआ है। यह अभियान लगातार जारी रहेगा। इसकेसाथ अब प्रेशर हॉर्न के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जाएगा। इसकी तैयारी कर रहे हैं। हमने ध्वनि प्रदूषण की जांच कराई थी। पॉलीटेक्निक चौराहे पर 95 डेसीबल ध्वनि प्रदूषण था। मानक के अनुसार औद्योगिक क्षेत्र में भी 75 डेसीबल से ज्यादा शोर नहीं होना चाहिए।
रोकेंगे अवैध पार्किंग
ट्रैफिक एक बड़ी समस्या है। इसकी एक बड़ी वजह सड़क पर होने वाली अवैध पार्किंग है। इसके खिलाफ भी अभियान चलाया जाएगा। नगर निगम और एलडीए सहित अन्य विभागों से भी इसमें सहयोग लिया जाएगा। पता चला है कि कुछ सरकारी पार्किंग में अवैध कारोबार चल रहे हैं। इन पार्किंग को बहाल कराया जाएगा।